यूपी में बच्चों की पढ़ाई में भागीदार बनेंगे अभिभावक, डीबीटी राशि के सही उपयोग पर जोर
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की जरूरी शैक्षिक सुविधाओं को लेकर योगी सरकार ने अभिभावकों की जिम्मेदारी और भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया है। शैक्षिक सत्र 2026-27 में कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए डीबीटी के जरिए दी जा रही धनराशि का इस्तेमाल केवल स्कूल ड्रेस, जूता-मोजा, स्वेटर, स्कूल बैग और स्टेशनरी की खरीद में करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग अब विद्यालय स्तर पर यह भी सत्यापित करेगा कि बच्चों को निर्धारित सामग्री मिली है और वे उसका नियमित रूप से उपयोग कर रहे हैं।
निर्धारित सामग्री की खरीद पर ही खर्च होगी राशि
विभाग ने विकासखंड और विद्यालय स्तर पर अभिभावकों को स्पष्ट रूप से बताने के निर्देश दिए हैं कि डीबीटी के माध्यम से प्राप्त धनराशि का उपयोग केवल निर्धारित सामग्री की खरीद में किया जाए। अभिभावकों को ऐसी सामग्री खरीदने के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिसकी गुणवत्ता और उपयोगिता पूरे शैक्षिक सत्र में बनी रहे। प्रधानाध्यापक और शिक्षक अभिभावकों के साथ संवाद करते हुए यह सुनिश्चित करेंगे कि विद्यार्थियों के लिए निर्धारित सामग्री खरीदी और उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही बच्चे विद्यालय में इन सामग्रियों का नियमित रूप से उपयोग कर रहे हैं या नहीं, इस पर भी ध्यान दिया जाएगा।
बच्चों की सामग्री का कक्षावार और विद्यार्थीवार सत्यापन
विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों को प्राप्त सामग्री का कक्षावार और विद्यार्थीवार सत्यापन कराया जाएगा। इसके तहत देखा जाएगा कि बच्चे स्कूल ड्रेस, जूता-मोजा और स्वेटर में विद्यालय आ रहे हैं तथा स्कूल बैग और आवश्यक स्टेशनरी का उपयोग कर रहे हैं। विभाग ने स्कूल ड्रेस के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया है। अभिभावकों और विद्यार्थियों को ड्रेस का उपयोग मुख्य रूप से विद्यालय एवं विद्यालयीय गतिविधियों के दौरान करने के लिए जागरूक किया जाएगा। ड्रेस, स्वेटर, जूता-मोजा, बैग और स्टेशनरी के नियमित रखरखाव एवं सुरक्षित संरक्षण के लिए भी प्रेरित किया जाएगा।
डीबीटी राशि को अन्य मदों में खर्च करने पर रोक
निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि डीबीटी की धनराशि का उपयोग निर्धारित सामग्री के अलावा अन्य प्रयोजनों में नहीं किया जाना है। यदि किसी विद्यार्थी के संबंध में निर्धारित सामग्री की खरीद नहीं होने या डीबीटी राशि के अन्य उपयोग की जानकारी मिलती है, तो उसके अभिभावकों से संपर्क कर आवश्यक परामर्श दिया जाएगा। विद्यालय निरीक्षण के दौरान खंड शिक्षा अधिकारी और जिला स्तरीय अधिकारी इस व्यवस्था की निगरानी करेंगे। जनपद स्तर पर प्राप्त शिकायतों और फीडबैक का समयबद्ध निस्तारण कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता, संवेदनशीलता और अभिभावकों के साथ सहयोगात्मक व्यवहार सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
बच्चों को जरूरी सुविधाएं समय पर मिलने पर जोर
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा, “योगी सरकार का प्रयास है कि बच्चों को पढ़ाई के लिए जरूरी सभी सुविधाएं समय पर मिलें और सरकारी सहायता का वास्तविक लाभ उन तक पहुंचे।” उन्होंने कहा कि डीबीटी के माध्यम से उपलब्ध धनराशि का निर्धारित सामग्री पर उपयोग होने से बच्चों की शैक्षिक जरूरतें पूरी होंगी और विद्यालय के प्रति उनका जुड़ाव और मजबूत होगा।
सामग्री के नियमित उपयोग और संरक्षण पर जोर
महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा, “डीबीटी के माध्यम से उपलब्ध कराई गई धनराशि के निर्धारित उपयोग और विद्यार्थियों तक सामग्री की पहुंच का विद्यालय स्तर पर सत्यापन सुनिश्चित कराया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि अभिभावकों और विद्यार्थियों को सामग्री के नियमित उपयोग, रखरखाव और संरक्षण के लिए जागरूक करने पर भी विशेष जोर है।
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