जेम पर यूपी को तीन राष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं। प्

जेम पर यूपी को तीन राष्ट्रीय पुरस्कार, सीएम योगी ने सराहा सरकारी खरीद में पारदर्शिता का मॉडल

UP Wins Three National GeM Awards, CM Yogi Hails Transparent Procurement

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) के जरिए शासकीय खरीद में पारदर्शिता और समावेशिता सुनिश्चित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश को बड़ी राष्ट्रीय उपलब्धि मिली है। प्रदेश को जेम पर उत्कृष्ट योगदान के लिए तीन राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उपलब्धि की सराहना की है। मंगलवार को एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी, प्रमुख सचिव एमएसएमई शशि भूषण लाल एवं स्टेट जेम नोडल व डिप्टी सीईओ कृष्ण मुरारी ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उन्हें पुरस्कारों और प्रदेश की उपलब्धियों की जानकारी दी।

जेम पर यूपी सरकार ने की ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा की खरीद

जेम के माध्यम से प्रदेश सरकार ने शुरुआत से अब तक ₹1 लाख करोड़ से अधिक की शासकीय खरीद की है। इसमें ₹55,972 करोड़ से अधिक की खरीद एमएसई से हुई है। इस तरह कुल सरकारी खरीद में एमएसई की भागीदारी 55 प्रतिशत से अधिक रही है। मुख्यमंत्री ने जेम के जरिए सरकारी खरीद में पारदर्शिता बढ़ाने और छोटे उद्यमों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के प्रयासों की सराहना की।

यूपी को मिले तीन राष्ट्रीय पुरस्कार

जेम पर उत्तर प्रदेश के प्रदर्शन को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित जेम के 10वें स्थापना दिवस समारोह में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने प्रदेश को तीन प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया। यूपी को जेम ओवरऑल एक्सीलेंस अवार्ड, हाईएस्ट जेम प्रोक्योरमेंट वैल्यू और बेस्ट आउटरीच बिल्डिंग अवार्ड मिले। इन पुरस्कारों को एमएसएमई के प्रमुख सचिव शशि भूषण लाल सुशील ने प्राप्त किया।

चार साल में 43 से बढ़कर 59 प्रतिशत हुई एमएसई की हिस्सेदारी

वित्तीय वर्ष 2026-27 में जुलाई तक जेम के माध्यम से प्रदेश में कुल ₹7,235 करोड़ की शासकीय खरीद हुई। इसमें एमएसई (पैन इंडिया) से ₹4,253 करोड़ यानी 59 प्रतिशत की खरीद हुई, जिसमें उत्तर प्रदेश के अपने उद्यमों की हिस्सेदारी 86 प्रतिशत यानी ₹3,646 करोड़ रही। वर्ष 2025-26 में कुल ₹22,337 करोड़ की जेम खरीद में एमएसई की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत थी। इस दौरान यूपी के एमएसई से ₹9,976 करोड़ की खरीद हुई, जो कुल एमएसई खरीद का 82 प्रतिशत रही।

यूपी के एमएसई की हिस्सेदारी भी लगातार बढ़ी

वर्ष 2024-25 में ₹16,830 करोड़ की कुल जेम खरीद में एमएसई का योगदान ₹8,952 करोड़ यानी 53 प्रतिशत रहा। इसमें यूपी के एमएसई की हिस्सेदारी ₹7,264 करोड़ यानी 81 प्रतिशत थी। वहीं 2023-24 में ₹20,248 करोड़ की कुल खरीद में एमएसई से ₹8,771 करोड़ यानी 43 प्रतिशत की खरीद हुई थी। इसमें यूपी के एमएसई की हिस्सेदारी ₹6,680 करोड़ यानी 76 प्रतिशत रही। इस तरह चार वर्षों में एमएसई की हिस्सेदारी 43 से बढ़कर 59 प्रतिशत हो गई।

महिला और एससी-एसटी उद्यमियों को भी मिला लाभ

जेम के जरिए उत्तर प्रदेश के छोटे उद्यमियों को देशभर के सरकारी खरीदारों तक पहुंच मिली है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में जुलाई तक प्रदेश के एमएसई को जेम से ₹16,953 करोड़ का कारोबार मिला। इसमें महिला उद्यमियों को ₹2,202 करोड़, एससी/एसटी उद्यमियों को ₹255 करोड़ और स्टार्टअप्स को ₹2,360 करोड़ का कारोबार प्राप्त हुआ। इससे विभिन्न वर्गों के उद्यमियों की सरकारी बाजार में भागीदारी बढ़ी है।

पिछले वर्षों में भी बढ़ा कारोबार

वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश के छोटे उद्यमियों को जेम से ₹27,235 करोड़ का कारोबार मिला था। इसमें महिला उद्यमियों को ₹4,755 करोड़, एससी/एसटी उद्यमियों को ₹752 करोड़ और स्टार्टअप्स को ₹3,203 करोड़ का कारोबार मिला। वर्ष 2024-25 में एमएसई को ₹21,275 करोड़ का कारोबार मिला, जिसमें महिला उद्यमियों का हिस्सा ₹3,310 करोड़, एससी/एसटी का ₹507 करोड़ और स्टार्टअप्स का ₹2,139 करोड़ रहा। 2023-24 में एमएसई को ₹18,230 करोड़ का कारोबार मिला था।

समावेशी खरीद नीति से बढ़ी एमएसई की भागीदारी

जेम के यूपी स्टेट नोडल एवं डिप्टी सीईओ कृष्ण मुरारी ने बताया कि प्रदेश में एमएसई को सरकारी खरीद में अधिक अवसर देने के लिए योगी सरकार ने 26 नवंबर 2024 को शासनादेश जारी किया था। इसके बाद जेम पर एमएसई की भागीदारी और खास तौर पर यूपी के एमएसई से होने वाली सरकारी खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। सरकार का फोकस महिला उद्यमियों, एससी/एसटी उद्यमियों और स्टार्टअप्स को भी सरकारी बाजार से जोड़ने पर है। इससे स्थानीय उत्पादों और सेवाओं के लिए बाजार बढ़ने के साथ उद्यमिता और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिल रहा है।

सरकारी खरीद में पारदर्शिता के साथ स्थानीय उद्यमों को बाजार

योगी सरकार जेम को ई-गवर्नेंस, पारदर्शी सरकारी खरीद और स्थानीय उद्यमों को बाजार उपलब्ध कराने के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में इस्तेमाल कर रही है। सरकारी विभागों को प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के जरिए उत्पाद और सेवाएं खरीदने का विकल्प मिल रहा है। वहीं प्रदेश के छोटे उद्यमों, महिलाओं, एससी/एसटी उद्यमियों और स्टार्टअप्स को बड़े सरकारी बाजार से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। इससे सरकारी खरीद में समावेशिता को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।

₹6.39 करोड़ के प्लॉट-शेड की नीलामी से मिले ₹32.54 करोड़

जेम सरकारी खरीद के साथ सरकारी परिसंपत्तियों का बेहतर मूल्य दिलाने का भी माध्यम बन रहा है। कानपुर में एमएसएमई विभाग के औद्योगिक प्लॉट और शेड की नीलामी इसका उदाहरण बनी। उद्योग निदेशालय, कानपुर ने 13 से 21 जुलाई 2026 के बीच 34 औद्योगिक प्लॉट एवं शेड की 99 वर्ष की लीज के लिए नीलामी की। इनका अपेक्षित/आरक्षित मूल्य ₹6.39 करोड़ था, जबकि प्रतिस्पर्धी बोली के बाद विक्रय मूल्य ₹32.54 करोड़ पहुंच गया।

आरक्षित मूल्य से 409 प्रतिशत अधिक रहा विक्रय मूल्य

नीलामी से सरकार को आरक्षित मूल्य की तुलना में ₹26.15 करोड़ की अतिरिक्त आय हुई। प्राप्त मूल्य आरक्षित मूल्य से 409 प्रतिशत अधिक रहा। यह नीलामी डिजिटल और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के जरिए सरकारी परिसंपत्तियों का बेहतर मूल्य हासिल करने का उदाहरण बनी है।

यह भी पढ़ें:   अखिलेश यादव से मिले तैराकी और राइफल शूटिंग के पदक विजेता खिलाड़ी, स्पोर्ट्स पॉलिसी का किया ऐलान