यूपी में जीरो फैटलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना के तहत सड़

यूपी में जीरो फैटलिटी योजना से सड़क हादसों में कमी, 1107 लोगों की बची जान

UP Zero Fatality Plan Reduces Road Accidents, Saves 1,107 Lives

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली जनहानि को न्यूनतम करने के विजन के तहत प्रदेश में सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय में जीरो फैटलिटी डिस्ट्रिक्ट (जेडएफडी) योजना के तृतीय और चतुर्थ चरण की क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों के प्रभारियों की एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें 59 जिलों के 213 दुर्घटना बाहुल्य स्थानों पर गठित 228 क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों के प्रभारी और जेडएफडी के नोडल अधिकारियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में दुर्घटनाओं के मूल कारणों की वैज्ञानिक तरीके से पहचान कर उनकी रोकथाम पर विशेष जोर दिया गया।

हादसों के कारणों की पहचान जरूरी: डीजीपी

उत्तर प्रदेश के डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को केवल आकस्मिक घटना मानकर नहीं चलना चाहिए। प्रत्येक हादसे के पीछे मौजूद कारणों की पहचान कर उन्हें दूर करना जरूरी है। उन्होंने क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों को अपने-अपने क्षेत्र में दुर्घटना संभावित स्थानों और वहां होने वाले हादसों के कारणों की पहचान कर मिशन मोड में प्रभावी रोकथाम और प्रवर्तन कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

दुर्घटना रोकथाम के लिए विशेषज्ञता पर जोर

डीजीपी ने कहा कि दुर्घटना की रोकथाम और दुर्घटना की जांच दोनों विशेषज्ञता वाले कार्य हैं। इसलिए टीमों को तकनीकी और व्यावहारिक जानकारी के साथ काम करना होगा। उन्होंने संबंधित विभागों के साथ लगातार समन्वय करने और चिन्हित कमियों के समाधान का फॉलोअप करने के भी निर्देश दिए।

दुर्घटना के बाद कार्रवाई ही नहीं, रोकथाम भी प्राथमिक जिम्मेदारी

डीजीपी ने स्पष्ट किया कि क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों की जिम्मेदारी केवल दुर्घटना के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि हादसों को रोकना भी उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक दुर्घटना के बाद उसके कारणों की समीक्षा की जाए और यह पता लगाया जाए कि व्यवस्था में किस कमी के कारण हादसा हुआ। साथ ही, उसकी पुनरावृत्ति रोकने के लिए जरूरी सुधार किए जाएं। उन्होंने आवश्यक प्रवर्तन, सड़क सुरक्षा उपाय और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ प्रक्रियाओं का सही और लगातार पालन करने पर भी जोर दिया।

जेडएफडी से दुर्घटनाओं और मौतों में कमी

बताया गया कि जेडएफडी योजना के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। जनवरी से अगस्त 2026 तक जेडएफडी से आच्छादित स्थानों पर पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं में 6.97%, मृतकों में 8.03% और घायलों में 6.11% की कमी दर्ज की गई। इस अवधि में 1,255 सड़क दुर्घटनाएं कम हुईं और 1,107 अमूल्य मानव जीवन बचाने में सफलता मिली। यानी औसतन रोजाना करीब 7 दुर्घटनाएं कम हुईं और करीब 5 लोगों की जान बची।

जहां दुर्घटनाएं अधिक, वहां कार्रवाई अधिक

जेडएफडी योजना ‘जहां दुर्घटनाएं अधिक, वहां कार्रवाई अधिक’ के सिद्धांत पर आधारित है। इसके तहत वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर दुर्घटना बाहुल्य स्थानों की पहचान की जा रही है। इन स्थानों पर लक्षित प्रवर्तन, सड़क सुरक्षा उपाय, संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और सड़क इंजीनियरिंग से जुड़ी कमियों को दूर करने पर जोर दिया जा रहा है।

तकनीक और प्रशिक्षण से मजबूत होगी सड़क सुरक्षा

कार्यशाला में सड़क सुरक्षा, मोटर वाहन अधिनियम, दुर्घटना जांच, ब्लैक स्पॉट, प्राथमिक उपचार, सीपीआर समेत अन्य विषयों पर विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण दिया। डीजीपी ने सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और जांच में विशेषज्ञता विकसित करने, जरूरी प्रशिक्षण लेने और उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने के निर्देश दिए।

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