राउज़ एवेन्यू कोर्ट: अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैंडीक को NIA मामले में मिली डिफ़ॉल्ट जमानत
नई दिल्ली: राउज़ एवेन्यू कोर्ट में एक विशेष NIA जज ने शुक्रवार को अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैंडीक को डिफ़ॉल्ट जमानत दे दी। जज ने यह देखते हुए जमानत दी कि NIA ने म्यांमार आतंकी प्रशिक्षण शिविर मामले में अभी तक पूरी चार्जशीट दाखिल नहीं की है। हालांकि, आरोपी पर आव्रजन और विदेशी अधिनियम की धारा 21 और 23 के तहत अपराधों का आरोप लगाया गया है।
NIA मामले में मैथ्यू वैंडीक को जमानत
वैंडीक को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 13 मार्च को UAPA के तहत कथित अपराध के लिए गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने गौर किया कि वैंडीक 180 दिनों से अधिक समय से हिरासत में था। हालांकि NIA वैंडीक के खिलाफ UAPA के तहत चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई और आगे की जांच अभी जारी है। सभी तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, विशेष जज प्रशांत शर्मा ने मैथ्यू आरोन वैंडीक को जमानत दे दी।
मैथ्यू वैंडीक को डिफ़ॉल्ट जमानत का हकदार माना
विशेष जज ने कहा, UAPA के तहत अपराधों के संबंध में NIA द्वारा की जा रही आगे की जांच को देखते हुए, इस स्तर पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि आरोपी मैथ्यू आरोन वैंडीक डिफ़ॉल्ट जमानत का हकदार नहीं है। विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने कहा, इस प्रकार जांच एजेंसी अपूर्ण आरोपपत्र दाखिल करके आरोपी मैथ्यू आरोन वैन डाइक को डिफ़ॉल्ट जमानत देने से इनकार करने के उद्देश्य से बीएनएसएस की धारा 187(3) का उल्लंघन नहीं कर सकती।
NIA मामले में वैंडीक को सशर्त जमानत
न्यायालय ने आदेश दिया, इस मामले के सभी तथ्यों और अभिलेखों पर विचार करने के बाद आरोपी मैथ्यू आरोन वैन डाइक को 1,00,000 रुपये के व्यक्तिगत बांड/जमानत बांड जमा करने पर, न्यायालय की संतुष्टि के अधीन जमानत दी जाती है। आरोपी पर एनआईए द्वारा यूएपीए की धारा 18 के तहत मामला दर्ज किया गया था। उसे 13 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। न्यायालय ने कहा कि यूएपीए की धारा 43डी(2) के प्रावधान (1) के अनुसार, जांच आरोपी की गिरफ्तारी की तारीख से 180 दिनों के भीतर पूरी हो जानी चाहिए थी जो 08.09.2026 को समाप्त हुई।
NIA द्वारा अपूर्ण आरोपपत्र दाखिल
एनआईए ने 08.09.2026 को अपूर्ण आरोपपत्र दाखिल किया, क्योंकि यह धारा 187(3) के संबंध में दाखिल किया गया था। आव्रजन एवं विदेशी अधिनियम, 2025 की धारा 21 और 23 के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। एनआईए का कहना है कि यूएपीए के तहत अपराधों से संबंधित आगे की जांच अभी जारी है। अदालत ने कहा कि आरोपी ने जमानत न मिलने की अर्जी दाखिल करते हुए कहा है कि अपूर्ण आरोपपत्र के मद्देनजर आवेदक/आरोपी जमानत का हकदार है।
वकीलों ने दी मुचलका भरने की दलील
आवेदक ने जमानत मांगी है। यह स्वीकार किया गया है कि एनआईए यूएपीए के तहत अपराधों से संबंधित जांच को 180 दिनों की वैधानिक अवधि के भीतर पूरा नहीं कर सकी। वैंडिक के वकील रोहित डंडरियाल और रोहित गौर ने बताया कि वह अदालत के निर्देशानुसार निजी मुचलका और जमानती मुचलका देने के लिए तैयार हैं।
(इनपुट: ANI)
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