केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप

भारत के LPG आयात में अमेरिका की 67% हिस्सेदारी, 2030 तक रिफाइनिंग क्षमता 300 MMTPA होगी: हरदीप पुरी

US Accounts for 67% of India's LPG Imports; Refining Capacity to Reach 300 MMTPA by 2030

नई दिल्ली: केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत अपने लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) का लगभग 67 प्रतिशत आयात अमेरिका से कर रहा है। उन्होंने कहा कि आपूर्ति में रुकावटों से निपटने के लिए भारत ने आयात के स्रोतों में विविधता लाने के साथ घरेलू उत्पादन और प्रसंस्करण क्षमता भी बढ़ाई है। मंत्री ने दक्षिण गोवा में 29वें एनर्जी टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन मीट के दौरान आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि नियमित आपूर्ति मार्गों में बड़ी रुकावटें आने के बावजूद भारत ने सक्रिय योजना और रणनीतिक साझेदारियों के जरिए संभावित ईंधन संकट को टाला। पुरी ने कहा, "जब होर्मुज संकट हुआ, तो आपकी सप्लाई के तीन बड़े स्रोत कतर, अमीरात और सऊदी थे। अचानक ऐसा लगा कि वे सप्लाई नहीं कर पाएंगे, लेकिन इसी उम्मीद में हमने जनवरी में यूनाइटेड स्टेट्स के साथ एक एग्रीमेंट साइन किया था कि हम वहां से अपनी LPG का 10% इंपोर्ट करेंगे। जब वह काम कर गया, तो हमने उसे बढ़ाने का फैसला किया। आज हम अपनी LPG का 67% यूनाइटेड स्टेट्स से इंपोर्ट कर रहे हैं। हमने अल्जीरिया, दूसरे स्रोतों और जो भी हमें LPG दे सकता था, उससे खरीदना शुरू कर दिया।"

27 से बढ़कर 41 देशों तक पहुंचा आयात नेटवर्क

पुरी ने बताया कि भारत ने अपने आयात के स्रोतों को 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक पहुंचाया है। इसके साथ ही घरेलू रिफाइनरियों में LPG उत्पादन भी बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि इसका सबसे जरूरी हिस्सा यह था कि हम घरेलू उत्पादन को 34,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन से बढ़ाकर 55,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन कर पाए, जिसमें सभी ने मिलकर काम किया।" मंत्री ने बताया कि घरेलू रिफाइनरियां आमतौर पर व्यावसायिक लाभ के लिहाज से ईंधन के बजाय पेट्रोकेमिकल उत्पादों को प्राथमिकता देती हैं। हालांकि, जरूरत पड़ने पर उत्पादन को LPG की ओर बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा, "सभी रिफाइनरियां LPG नहीं बनाना चाहतीं, वे पेट्रोकेमिकल बनाना चाहती हैं क्योंकि यह व्यावसायिक रूप से ज्यादा फायदेमंद है, लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो आप ज्यादा LPG बनाएंगे।"

LPG की कमी और जमाखोरी की अफवाहों पर क्या बोले पुरी?

पुरी ने घरेलू ईंधन की कमी को लेकर बाजार में चल रही अफवाहों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि जमाखोरी के कारण रोजाना LPG सिलेंडरों की मांग के इंडेंट कुछ समय के लिए 51 लाख से बढ़कर 90 लाख हो गए थे। उनके मुताबिक, प्रशासनिक जांच, राज्यों के बीच समन्वय और प्रतीक्षा अवधि में बदलाव के जरिए स्थिति को जल्द नियंत्रित कर लिया गया।

2030 तक 300 MMTPA होगी रिफाइनिंग क्षमता

भारत के ऊर्जा ढांचे के विस्तार का जिक्र करते हुए पुरी ने कहा कि देश की मौजूदा रिफाइनिंग क्षमता लगभग 290 मिलियन मीट्रिक टन सालाना है, जिसे 2030 तक बढ़ाकर 300 मिलियन मीट्रिक टन सालाना करने की योजना है। उन्होंने कहा, "आज हमारी रिफाइनिंग क्षमता 290 मिलियन मीट्रिक टन सालाना है। दिक्कत यह है कि आज और 2030 के बीच आप इसे 300 मिलियन मीट्रिक टन सालाना कर देंगे। यह क्षमता बढ़ाना ऐसे समय में हो रहा है, जब वैश्विक रिफाइनिंग क्षमता घट रही है।" पुरी ने कहा कि यूरोप में रिफाइनिंग क्षमता लगातार कम हो रही है, जबकि पश्चिमी देश नई ग्रीनफील्ड रिफाइनिंग परियोजनाएं नहीं बना रहे हैं। ऐसे में भारत एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय रिफाइनिंग केंद्र के रूप में उभर रहा है। इससे घरेलू ईंधन की बढ़ती मांग पूरी करने, निर्यात बढ़ाने और पेट्रोकेमिकल उत्पादन के विस्तार में मदद मिल सकती है।

ऊर्जा सुरक्षा के लिए पिछले दस वर्षों में उठाए कदम

सोशल मीडिया मंच X पर पुरी ने कहा कि भारत का ऊर्जा क्षेत्र संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए पहले से तैयार था। उन्होंने पिछले दस वर्षों में ऊर्जा सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों का भी जिक्र किया। पुरी के मुताबिक, भारत ने कच्चे तेल के आयात के स्रोत 27 से बढ़ाकर 41 देशों तक किए, 5.33 मिलियन टन के रणनीतिक भंडार बनाए और रिफाइनिंग क्षमता को 215 से बढ़ाकर 267 MMTPA किया। इसके अलावा, ईंधन बिक्री केंद्रों की संख्या लगभग 52,000 से बढ़ाकर एक लाख से अधिक की गई और LPG आयात टर्मिनलों की संख्या 11 से बढ़ाकर 22 की गई। उन्होंने घरेलू LPG उत्पादन को लगभग 34,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन से बढ़ाकर 55,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन करने को भी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में अहम कदम बताया।

समुद्र मंथन से बढ़ेगी अपतटीय ऊर्जा खोज

मंत्री ने कहा कि समुद्र मंथन भारत की अपतटीय हाइड्रोकार्बन क्षमता का इस्तेमाल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके तहत पहले से निर्धारित लगभग 10 लाख वर्ग किलोमीटर के 'नो-गो' क्षेत्र को खोज और अन्वेषण के लिए खोलने की बात कही गई है। पुरी ने X पर कहा कि E20 ईंधन किसानों को अतिरिक्त आय देने के साथ भारत के ऊर्जा आयात बिल को कम रखने में भी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि GOBARdhan योजना के जरिए कृषि अवशेषों और जैविक कचरे से संपीड़ित बायोगैस (CBG) बनाने की संभावनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे 'अन्नदाता से ऊर्जादाता' के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के साथ ग्रामीण आजीविका और कचरे से उपयोगी संसाधन बनाने की पहल को भी समर्थन मिल रहा है।

(ANI) 

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