उत्तराखंड में 160 किमी का रोपवे नेटवर्क, केदारनाथ से कैंची धाम तक बदलेगा सफर
देहरादून (उत्तराखंड)। उत्तराखंड के पहाड़ों पर अब सफर का अंदाज बदलने वाला है। केदारनाथ से हेमकुंड साहिब, कैंची धाम से कार्तिक स्वामी और मसूरी से नीलकंठ तक सरकार रोपवे कनेक्टिविटी का बड़ा नेटवर्क तैयार कर रही है। प्रदेश में करीब 160 किलोमीटर लंबे करीब 51 रोपवे प्रोजेक्ट विकसित करने की योजना है। मकसद है- दुर्गम धार्मिक और पर्यटन स्थलों की दूरी घटाना, सड़कों से ट्रैफिक का दबाव कम करना और उत्तराखंड को देश के बड़े रोपवे हब के रूप में विकसित करना।
Key Highlights
- 160 किमी का रोपवे नेटवर्क: उत्तराखंड में करीब 160 किमी लंबाई के 51 रोपवे प्रोजेक्ट विकसित करने की योजना है।
- प्रमुख धार्मिक स्थल जुड़ेंगे: केदारनाथ, हेमकुंड साहिब, कैंची धाम, यमुनोत्री, कार्तिक स्वामी और पूर्णागिरि जैसे स्थलों तक पहुंच आसान बनाने पर जोर है।
- मसूरी का सफर होगा तेज: पुरुकुल-मसूरी रोपवे से करीब 1–1.5 घंटे का सफर घटकर 15–20 मिनट होने की उम्मीद है। परियोजना का लक्ष्य 2027 है।
- सड़क पर ट्रैफिक का दबाव घटाने की कोशिश: सरकार रोपवे को पहाड़ी सड़कों पर बढ़ते यातायात और पर्यटकों की बढ़ती संख्या के बीच वैकल्पिक परिवहन के तौर पर विकसित कर रही है।
- कुमाऊं में भी विस्तार: नैनीताल-ज्योलीकोट-हनुमानगढ़ी और आगे कैंची धाम तक रोपवे की योजना के साथ रानीखेत, अल्मोड़ा और अन्य क्षेत्रों में भी संभावित रूट की स्टडी चल रही है।
बदल जाएगा मंजिल तक पहुंचने का रास्ता
उत्तराखंड में सड़क के साथ अब आसमान में कनेक्टिविटी का बड़ा नेटवर्क बिछाने की तैयारी है। राज्य और केंद्र की साझेदारी से करीब 160 किलोमीटर में 51 रोपवे विकसित करने की योजना है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चयनित परियोजनाओं पर तेजी से काम करते हुए 9 नवंबर तक काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
पहले चरण के बड़े रोपवे
- सोनप्रयाग - केदारनाथ
- गोविंदघाट - हेमकुंड साहिब
- कनकचौरी - कार्तिक स्वामी
- जोशीमठ - औली — गोरसों
- रानीबाग - हनुमानगढ़ी - कैंची धाम
- रैथल - दयारा बुग्याल
केदारनाथ से हेमकुंड तक आसान सफर
फोकस उन धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर है, जहां सड़क मार्ग लंबा, कठिन या ट्रैफिक के दबाव वाला है। केदारनाथ और हेमकुंड साहिब जैसे ऊंचाई वाले तीर्थस्थलों के लिए रोपवे यात्रियों की कठिन चढ़ाई को काफी हद तक आसान कर सकता है। वहीं कैंची धाम जैसे तेजी से बढ़ते धार्मिक केंद्रों के लिए रोपवे को सड़क पर बढ़ते ट्रैफिक का विकल्प माना जा रहा है।
मसूरी रोपवे से घटेगा सफर का समय
सबसे अहम परियोजनाओं में देहरादून-मसूरी रोपवे भी शामिल है। पुरुकुल से मसूरी लाइब्रेरी तक करीब 5.2 किलोमीटर लंबे रोपवे का काम चल रहा है। परियोजना पूरी होने पर देहरादून से मसूरी पहुंचने का एक से डेढ़ घंटे का सफर करीब 15 से 20 मिनट में पूरा होने की उम्मीद है। पर्यटन विभाग के मुताबिक परियोजना को 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
- पुरुकुल से मसूरी - 5.2 KM
- मौजूदा सफर - करीब 1 से 1.5 घंटा
- रोपवे से अनुमानित सफर - 15 से 20 मिनट
- लक्ष्य - 2027
यमुनोत्री और पूर्णागिरि पर भी फोकस
यमुनोत्री की कठिन चढ़ाई को आसान बनाने के लिए खरसाली-यमुनोत्री रोपवे पर भी काम आगे बढ़ाया जा रहा है। वहीं पूर्णागिरि धाम के लिए ठुलीगाड़ से रोपवे प्रस्तावित है। इस साल एक अप्रैल से 19 सितंबर तक पूर्णागिरि में 24 लाख 62 हजार 319 श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। ऐसे में रोपवे को बढ़ती श्रद्धालु संख्या के बीच बड़ी कनेक्टिविटी परियोजना के रूप में देखा जा रहा है।
ऋषिकेश में नीलकंठ तक रोपवे योजना
ऋषिकेश में भी रोपवे कनेक्टिविटी का बड़ा प्लान है। त्रिवेणी घाट से नीलकंठ महादेव मंदिर तक करीब छह किलोमीटर लंबी परियोजना पर काम किया जा रहा है। पहले चरण में करीब 4.1 किलोमीटर रोपवे विकसित करने की योजना है। हरिद्वार में मनसा देवी और चंडी देवी के लिए भी मौजूदा व्यवस्था के साथ नए समानांतर अलाइनमेंट विकसित करने की तैयारी है।
सिर्फ चारधाम तक सीमित नहीं रहेगा रोपवे का जाल
मसूरी में कैमल बैक रोड से लाल टिब्बा, जॉर्ज एवरेस्ट और कैंपटी फॉल, देहरादून में टपकेश्वर से रॉबर्स केव, गुच्चूपानी से पैसिफिक मॉल, पुरुकुल, सहस्रधारा और मालदेवता तक संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। मालदेवता से धनोल्टी तक करीब 15 किलोमीटर लंबे रोपवे की संभावना भी जांची जा रही है। कुमाऊं में रानीखेत, अल्मोड़ा, द्वाराहाट और नैनीताल क्षेत्र में कई संभावित रूट की फिजिबिलिटी स्टडी चल रही है।
कैंची धाम के लिए अलग कनेक्टिविटी प्लान
कैंची धाम में लगातार बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए कुमाऊं के लिए अलग रणनीति तैयार की गई है। पहले चरण में नैनीताल से ज्योलीकोट और ज्योलीकोट से हनुमानगढ़ी, जबकि अगले चरण में ज्योलीकोट से कैंची धाम तक रोपवे की योजना है। पर्यटन विभाग के मुताबिक पहले चरण की DPR तैयार हो चुकी है, जबकि कैंची धाम तक दूसरे चरण की DPR पर काम चल रहा है।
बढ़ते पर्यटन के बीच नई परिवहन चुनौती
सरकार के इस रोपवे मिशन के पीछे बढ़ता पर्यटन भी बड़ी वजह है। साल 2025 में उत्तराखंड में छह करोड़ तीन लाख से ज्यादा पर्यटक और तीर्थयात्री पहुंचे। अब चुनौती इतनी बड़ी संख्या को पहाड़ों पर सुरक्षित और सुविधाजनक परिवहन उपलब्ध कराने की है। सरकार का दावा है कि रोपवे से जहां सफर आसान होगा, वहीं सड़कों पर वाहनों का दबाव कम करने, पर्यावरणीय दबाव घटाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करने में भी मदद मिलेगी।
प्रभाव विश्लेषण (Impact Analysis)
सवाल 1: आम यात्रियों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों के दैनिक सफर पर इस प्रोजेक्ट का क्या असर पड़ेगा? उत्तर: इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को पहाड़ों की कठिन और लंबी चढ़ाई से राहत मिलेगी। केदारनाथ, हेमकुंड साहिब और मसूरी जैसे व्यस्त रूटों पर लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी, जिससे यात्रियों का समय बचेगा और सफर सुरक्षित व आरामदायक हो जाएगा।
सवाल 2: स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यावरण (Eco-tourism) पर इसका क्या दीर्घकालिक प्रभाव होगा? उत्तर: सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होने से कार्बन उत्सर्जन घटेगा, जिससे पहाड़ी पर्यावरण को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, नए रोपवे स्टेशनों के आसपास स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यवसाय के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों की आर्थिकी मजबूत होगी। (Published By: Ravi Pandey)
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