नेपाल की आपदा से सबक, उत्तराखंड में हिमनद झीलों की निगरानी होगी और मजबूत: मंत्री मदन कौशिक
देहरादून (उत्तराखंड) [भारत]: उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने शुक्रवार को कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है और राज्य सरकार संभावित जोखिमों को कम करने के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रही है। नेपाल में हाल ही में हुई आपदा से सबक लेते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार राज्य भर में हिमनद झीलों, नदियों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के लिए निगरानी तंत्र को और मजबूत कर रही है।
हिमनद झीलों के वैज्ञानिक सर्वेक्षण पर जोर
उन्होंने कहा कि संवेदनशील हिमनद झीलों के वैज्ञानिक सर्वेक्षण और नियमित निगरानी के साथ-साथ उन्नत पूर्व चेतावनी प्रणालियों की स्थापना पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जहां भी आवश्यकता होगी, अतिरिक्त उपकरण और तकनीकी संसाधन तैनात किए जाएंगे ताकि किसी भी संभावित खतरे के बारे में प्रशासन और जनता को समय पर सूचना मिल सके। कौशिक ने कहा कि मानव जीवन की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। आपदा से पहले की तैयारियों, समय पर चेतावनी, स्थानीय स्तर पर क्षमता निर्माण और विभागों के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से संभावित जानमाल के नुकसान को कम करने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए जाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि मानसून के मौसम में सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
नेपाल में बाढ़ से 389 लोगों की मौत
नेपाल के रसुवा जिले में भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ के बाद मरने वालों की संख्या 389 हो गई है और 977 लोग लापता बताए जा रहे हैं। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने गुरुवार को जारी अपनी नवीनतम रिपोर्ट में यह जानकारी दी। लापता लोगों में से 517 विदेशी नागरिक हैं और 127 विदेश में रहने वाले नेपाली नागरिक हैं जो नेपाल घूमने आए थे।
कुमाऊं क्षेत्र में हाई अलर्ट
गुरुवार को ही पड़ोसी देश नेपाल में भीषण बाढ़ और लगातार बारिश के कारण उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में भी प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है। चंपावत जिला मजिस्ट्रेट मनीष कुमार के अनुसार, चंपावत जिला प्रशासन काली-शारदा नदी के जलस्तर पर कड़ी निगरानी रख रहा है, जो बनबासा और तनकपुर क्षेत्रों से होकर बहती है। नेपाल में बाढ़ की स्थिति और पहाड़ी क्षेत्रों में जारी बारिश को देखते हुए शारदा बैराज, नदी घाटों और अन्य संवेदनशील नदी तटीय क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है। चंपावत प्रशासन ने पुष्टि की है कि जिला प्रशासन के निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए पुलिस, एसडीआरएफ और आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट पर रखा गया है और नदी तटों के आसपास के क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। चंपावत प्रशासन ने यह भी पुष्टि की है कि नेपाल में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों, शारदा बैराज और नदी घाटों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
सीएम धामी ने दिए व्यापक सर्वेक्षण के निर्देश
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन को राज्य भर में संवेदनशील हिमनदी झीलों का व्यापक सर्वेक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन करने का निर्देश दिया। झीलों की स्थिति, जलस्तर, उनके आकार में परिवर्तन, आसपास के भूभाग और संभावित जोखिम क्षेत्रों की निगरानी के लिए नियमित आकलन किए जाएंगे। विज्ञप्ति में कहा गया है कि संभावित खतरे की स्थिति में समय पर चेतावनी सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक सेंसर, जलस्तर निगरानी उपकरण, संचार प्रणाली और अन्य आवश्यक तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
निकासी मार्ग और संचार व्यवस्था मजबूत होगी
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि प्रयास केवल प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली स्थापित करने तक सीमित नहीं होने चाहिए। हिमनदी झीलों से उत्पन्न आपदाओं के संभावित प्रभाव को कम करने के लिए सभी आवश्यक सुरक्षा और जोखिम-निवारण उपाय लागू किए जाने चाहिए। संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की जाएगी और उन्हें सुरक्षित निकासी मार्गों, संभावित रूप से प्रभावित क्षेत्रों के मानचित्रण, सुदृढ़ संचार प्रणालियों, स्थानीय स्तर पर चेतावनी तंत्र और राहत एवं बचाव कार्यों के लिए बेहतर तैयारियों के साथ मजबूत किया जाएगा।
जिला स्तर पर निगरानी के निर्देश
बैठक में विशेष रूप से हिमनदी झीलों, नदी के जलस्तर और संवेदनशील स्थानों की निगरानी पर ध्यान केंद्रित किया गया, साथ ही प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, संचार नेटवर्क, आपदाओं के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों की समीक्षा की गई। विज्ञप्ति में कहा गया है कि जिला मजिस्ट्रेटों को अपने-अपने जिलों में संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने और किसी भी असामान्य गतिविधि की तत्काल उच्च अधिकारियों को सूचना देने का निर्देश दिया गया है।
(एएनआई)
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