विश्व हिंदू परिषद ने महाराष्ट्र में नवरात्रि के दौ

महाराष्ट्र में गरबा-डांडिया को लेकर विश्व हिंदू परिषद की नई गाइडलाइन, मुस्लिमों की एंट्री पर रोक का ऐलान

प्रतीकात्मक तस्वीर

मुंबई (महाराष्ट्र)। मुंबई में नवरात्रि उत्सव शुरू होने से पहले गरबा और डांडिया कार्यक्रमों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने राज्य में होने वाले गरबा और डांडिया आयोजनों में मुस्लिमों की भागीदारी पर रोक लगाने का ऐलान किया है। संगठन ने कार्यक्रमों के आयोजकों और व्यापारियों के लिए कुछ दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। इनमें कार्यक्रम में आने वाले लोगों के लिए तिलक लगाना और आधार कार्ड साठ लाना अनिवार्य करने की बात कही गई है।

11-21अक्टूबर तक होगी नवरात्रि

नवरात्रि का पर्व इस वर्ष 11 अक्टूबर से शुरू होकर 21 तक मनाया जाएगा। इससे पहले VHP की ओर से जारी इस निर्देश ने महाराष्ट्र की राजनीति में भी बहस छेड़ दी है। विपक्षी दलों ने इसे संविधान में दिए गए समानता और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों के खिलाफ बताते हुए सवाल उठाए हैं।

आयोजकों को पहचान सत्यापन की सलाह

VHP की ओर से आयोजकों को कथित तौर पर गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में शामिल होने वाले लोगों की पहचान को लेकर सतर्क रहने के लिए कहा गया है। संगठन की ओर से आधार कार्ड की जांच करने और कार्यक्रम स्थल पर लोगों के माथे पर तिलक लगाने जैसे उपायों को करने को कहा गया है।

इस्लाम में मूर्ति पूजा की परंपरा नहीं

VHP का तर्क है कि नवरात्रि मुख्य रूप से देवी आराधना और हिंदू धार्मिक परंपराओं से जुड़ा पर्व है। इस त्योहार में मुस्लिम समुदाय के लोगों की गरबा कार्यक्रमों में भागीदारी पर सवाल उठाया। VHP का कहना है, कि जब इस्लाम में मूर्ति पूजा की परंपरा नहीं है, तो ऐसे धार्मिक आयोजन में मुस्लिमों के शामिल होने का औचित्य क्या है।

संजय राउत ने VHP पर साधा निशाना

VHP के ऐलान पर शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने संगठन के रुख पर सवाल उठाते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान का हवाला दिया। राउत ने कहा कि VHP को मोहन भागवत के उस संदेश पर भी विचार करना चाहिए, जिसमें उन्होंने भारत में मुसलमानों से नफरत करने वाले हिंदुओं को वास्तविक हिंदू नहीं मानने की बात कही थी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या VHP अपने इस रुख के जरिए RSS प्रमुख के विचारों से अलग राय रखता है। राउत ने यह भी सवाल उठाया कि क्या VHP की ओर से जारी इस तरह के निर्देशों को RSS नेतृत्व की सहमति प्राप्त है।

कांग्रेस ने बताया असंवैधानिक

कांग्रेस ने भी VHP के इस कदम की आलोचना की है। पार्टी विधायक अमीन पटेल ने कहा कि भारत में धार्मिक त्योहार सामाजिक मेल-जोल और आपसी भाईचारे का माध्यम रहे हैं। उनके मुताबिक, अलग-अलग समुदायों के लोग एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होते रहे हैं और यही परंपरा सामाजिक सद्भाव को मजबूत करती है।

NCP (SP) ने सरकार से पूछा सवाल

NCP (SP) के प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो ने भी VHP के निर्देश को लेकर महाराष्ट्र सरकार से सवाल किया है। उनका कहना है कि इस तरह की घोषणा से राज्य में सामाजिक शांति और सामुदायिक सौहार्द प्रभावित होने की आशंका है। क्रास्टो ने राज्य सरकार से पूछा कि यदि कोई संगठन इस तरह के निर्देश जारी करता है तो सरकार की भूमिका क्या होगी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करेगी या फिर संगठन को कानून-व्यवस्था से जुड़े विषयों पर निर्देश देने की अनुमति दी जाएगी।

अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष ने क्या कहा?

महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आस्था और धार्मिक त्योहार मनाने की स्वतंत्रता है। उनका कहना है कि देश में कई धार्मिक और सामाजिक संगठन अलग-अलग समुदायों के लोगों को अपने कार्यक्रमों में आमंत्रित करते हैं। त्योहारों का उद्देश्य लोगों को आपस में जोड़ना और भाईचारे को बढ़ावा देना होना चाहिए।

धार्मिक आयोजनों को लेकर ऐसा माहौल नहीं बनना चाहिए

प्यारे खान ने यह भी कहा कि किसी कार्यक्रम का आयोजक यदि किसी व्यक्ति को आमंत्रित नहीं करना चाहता तो वह अलग बात है, लेकिन धार्मिक आयोजनों को लेकर ऐसा माहौल नहीं बनना चाहिए जिससे समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच दूरी बढ़े। उनके अनुसार, आम तौर पर लोग किसी आयोजन में तभी शामिल होते हैं जब उन्हें आमंत्रित किया जाता है।

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