सरकारी वादों से निराश ग्रामीणों ने खुद चंदा जुटाकर बनाया बांस का अस्थायी पुल
जमुई (बिहार)। खैरा प्रखंड की हरनी पंचायत के जतहर और कैरवातरी गांव के ग्रामीण आज भी एक अदद पुल का इंतजार कर रहे हैं। करीब 150 मीटर चौड़ी नदी बरसात के दिनों में दोनों गांवों का संपर्क मुख्य इलाके से काट देती है। वर्षों तक सरकारी आश्वासन मिलने के बाद अब ग्रामीणों ने खुद चंदा जुटाकर बांस-बल्ले के सहारे अस्थायी पुल बनाने की कमान संभाल ली है।
नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ीं
इन गांवों की आबादी करीब 250 से 300 है। बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, मरीजों और गर्भवती महिलाओं को होती है। बच्चों को नदी पार कर अरुणमबांक यानी सोखो जाना पड़ता है। वहीं मरीजों को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। ऐसे में मरीजों को खटोली पर लादकर नदी पार करानी पड़ती है।
पुल निर्माण के लिए ग्रामीणों ने कई बार लगाई गुहार
ग्रामीणों के अनुसार पुल निर्माण की मांग को लेकर विधायक, सांसद और मंत्री से कई बार गुहार लगाई गई। स्थानीय विधायक की ओर से डीपीआर तैयार होने और जल्द निर्माण शुरू होने का आश्वासन भी मिला, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हुआ।
ग्रामीणों ने खुद चंदा जुटाकर अस्थायी पुल बनाया
सरकारी वादों से निराश ग्रामीणों ने खुद चंदा जुटाकर अस्थायी पुल बनाना शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें स्थायी पुल चाहिए, ताकि बरसात में गांव का संपर्क न टूटे। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी श्री नवीन ने ग्रामीणों को बुलाया है। अब देखना होगा कि वर्षों पुरानी मांग पर प्रशासन कब तक ठोस कदम उठाता है।
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