पश्चिम बंगाल में एसआइआर के दूसरे चरण में वोटरों की

केंद्रीय अधिकारियों की निगरानी में होगी वोटरों की सुनवाई

Voters' hearing will be conducted under the supervision of central officials

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में एसआइआर के दूसरे चरण में वोटरों की सुनवाई के वक्त चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त केंद्र सरकार के अधिकारी मौजूद रहेंगे। सुनवाई 25-26 दिसंबर के बाद होने की संभावना है। सुनवाई के दौरान अलग-अलग केंद्रों में मौजूद रहने वाले केंद्र सरकार के अधिकारियों को सूक्ष्म पर्यवेक्षक (माइक्रो आब्जार्बर) कहा जा रहा है। करीब डेढ़ करोड़ वोटरों की सुनवाई सरकारी कार्यालयों में की जाएगी। चुनाव अयोग राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय की सुरक्षा का दायित्व केंद्रीय पुलिस को दिये जाने के बारे में विचार कर रहा है।

मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने किया था अनुरोध

जानकारों के मुताबिक मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने चुनाव आयोग से वोटरों के सुनवाई के वक्त केंद्र सरकार के अधिकारियों को तैनात करने के लिए अनुरोध किया था। चुनाव आयोग ने उनके अनुरोध को मंजूर कर लिया और पूरी सुरक्षा, विश्वसनीयता और शांति से सुनवाई के लिए व्यवस्था करने पर जोर दिया है।

वोटरों की सुनवाई के दौरान सूक्ष्म पर्यवेक्षक ईआरओ और एआरओ के कार्यों पर रखेंगे  नजर

राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी के निर्देश के मुताबिक सूक्ष्म पर्यवेक्षक वोटरों की सुनवाई के दौरान ईआरओ और एआरओ के कार्यों पर नजर रखेंगे। सूक्ष्म पर्यवेक्षकों की तैनाती के पहले उन्हें मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय में प्रशिक्षण दी जाएगी। सूक्ष्म पर्यवेक्षक यह जांच करेंगे कि ईआरओ और एआरओ द्वारा वोटरों के गणना फार्म, वोटरों के दस्तावेज की जांच ठीकठाक से की गई है या नहीं। उसमें कोई कमी या कड़बड़ी रहने पर वे उसमें सुधार करवाएंगे।

एसआइआर के पहले चरण में हटाए गए हैं 58 लाख से अधिक नाम

एसआइआर के पहले चरण में 58 लाख से अधिक वोटरों के नाम हटाए गए हैं। उनमें 24 लाख से अधिक मृत वोटर हैं। 30 लाख से ज्यादा ऐसे वोटर हैं जिनके नाम का मिलान 2002 के वोटर लिस्ट से नहीं हो पाया है। गणना फॉर्म में पिता-माता, दादा-दादी, नाना-नानी के नाम, उम्र आदि की भी जांच की जाएगी। चुनाव आयोग बीएलओ द्वारा हुई गलतियों की भी जांच करेगा।

राज्य सरकार के अधिकारियों की भूमिका संदेहास्पद होने के कारण हुई केंद्र सरकार के अधिकारियों की नियुक्ति

जानकारों का कहना है कि राज्य सरकार के अधिकारियों की भूमिका संदेहास्पद होने के कारण केंद्र सरकार के अधिकारियों की नियुक्ति की जरूरत के बारे में विचार किया गया। पिछले दिनों मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुले तौर पर चुनाव आयोग पर राज्य के अधिकारियो-कर्मचारियों पर काम का ज्यादा बोझ लाद कर उन्हें परेशान करने का आरोप लगाया था। उनका यह भी आरोप था कि एसआइआर के कार्य को कम समय में और जल्दबाजी में कराया जा रहा है। दो साल का काम दो महीने में काराया जा रहा है।

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