वैज्ञानिक पद्धति से गिने जाएंगे गिद्ध, प्रदेश में संख्या सर्वाधिक
भोपाल। मध्य प्रदेश वन विभाग द्वारा वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। 22, 23 और 24 मई 2026 को गिद्ध गणना (समर काउंट 2026) की तैयारी की जा रही है। इस गणना को सफल बनाने के लिए गुरुवार को मुख्यालय स्तर पर एक विशेष ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें प्रदेश के समस्त उप वन मंडल अधिकारियों (SDO) और परिक्षेत्र अधिकारी (Range Officers) भाग लेंगे। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य गणना के दौरान अपनाई जाने वाली वैज्ञानिक पद्धति, डेटा संकलन और 'बर्ड काउंट इंडिया' जैसे डिजिटल टूल्स के उपयोग की बारीकियों से अधिकारियों को अवगत कराना है। रेंज स्तर के अधिकारी अब अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को इसके लिए प्रशिक्षित करेंगे।
पिछले वर्ष के आंकड़े
मध्य प्रदेश वन विभाग की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में गिद्धों की कुल संख्या 12,981 दर्ज की गई थी। इस वृद्धि के साथ ही मध्य प्रदेश भारत में सबसे अधिक गिद्धों वाला राज्य बन गया है। प्रदेश में गिद्धों की कुल 7 प्रजातियां पाई जाती हैं। स्थानीय प्रजातियों में भारतीय गिद्ध, सफेद पीठ वाले गिद्ध और अन्य हैं। प्रवासी प्रजातियों में जैसे हिमालयन ग्रिफॉन जैसे 3 प्रजाति शामिल हैं। पन्ना टाइगर रिजर्व, कान्हा नेशनल पार्क, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और गांधी सागर अभयारण्य गिद्धों के सबसे पसंदीदा आवास स्थल हैं।
गणना से यह फायदा
गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के 'प्राकृतिक सफाईकर्मी' हैं। इस गणना का उद्देश्य न केवल उनकी वर्तमान संख्या को स्पष्ट करना है, बल्कि भविष्य की संरक्षण रणनीतियों को एक नई दिशा प्रदान करना भी है। जबलपुर के गढ़ा प्रेम नगर निवासी देवेंद्र गोस्वामी के आंगन में बने शिव मंदिर के दरवाजे पर एक तीन फीट लंबा सांप देखा गया। सर्प विशेषज्ञ गजेंद्र दुबे ने सांप को सुरक्षित पकड़कर देवताल तालाब में छोड़ दिया।
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