सोनम वांगचुक की पत्नी ने दिल्ली HC में याचिका दायर

वांगचुक की पत्नी पहुंचीं HC, निजी अस्पताल शिफ्ट करने की मांग; सफदरजंग पर अवैध हिरासत का आरोप

Wangchuk Wife Moves HC Over Hospital Dispute

नई दिल्ली: जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि जे. आंगमो ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर सफदरजंग अस्पताल से उनके तत्काल डिस्चार्ज और परिवार की पसंद के निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने के निर्देश देने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकारी अस्पताल में उनका लगातार रखा जाना चिकित्सा उपचार के नाम पर "अवैध और असंवैधानिक कारावास" के समान है।

मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप

संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर याचिका में आंगमो ने अदालत से सफदरजंग अस्पताल में वांगचुक की निरंतर मौजूदगी को अवैध घोषित करने की मांग की है। साथ ही, परिवार, कानूनी सलाहकारों और उनकी भूख हड़ताल के दौरान स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे डॉक्टरों को उनसे मिलने की अनुमति देने की भी मांग की गई है। याचिका में संपूर्ण मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध कराने और स्वतंत्र चिकित्सा परीक्षण की अनुमति देने का भी अनुरोध किया गया है।

जंतर-मंतर से अस्पताल ले जाने पर सवाल

याचिका में आरोप लगाया गया है कि NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में 28 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे वांगचुक को 18 जुलाई को उनकी सहमति और परिवार को पूर्व सूचना दिए बिना जबरन सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। याचिका के अनुसार, यह कार्रवाई दिल्ली उच्च न्यायालय के 16 जुलाई के आदेश के कार्यान्वयन के नाम पर की गई, जबकि अदालत ने केवल दैनिक चिकित्सा निगरानी और डॉक्टरों की सलाह के अनुसार आवश्यक हस्तक्षेप का निर्देश दिया था।

हाईकोर्ट के आदेश की व्याख्या पर आपत्ति

याचिका में कहा गया है कि न तो सोनम वांगचुक और न ही उनकी पत्नी उस जनहित याचिका के पक्षकार थे, जिसमें अदालत ने सरकारी डॉक्टरों द्वारा प्रतिदिन स्वास्थ्य निगरानी और जरूरत पड़ने पर चिकित्सा हस्तक्षेप का आश्वासन दर्ज किया था। याचिका में तर्क दिया गया है कि अदालत के आदेश में उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाने या अस्पताल में भर्ती रखने की कोई अनुमति नहीं दी गई थी।

पोटेशियम रिपोर्ट को लेकर उठाए सवाल

आंगमो ने दावा किया है कि जब वांगचुक को हटाया गया, तब उनके सभी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य पैरामीटर स्थिर थे और वे पहले से ही योग्य डॉक्टरों की निगरानी में थे। उनका कहना है कि ऐसी कोई चिकित्सीय आपात स्थिति नहीं थी, जो उन्हें अस्पताल ले जाने को उचित ठहराती। याचिका में वांगचुक के पोटेशियम स्तर को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि अस्पताल ने परिवार को बताया कि उनका पोटेशियम स्तर 2.9 तक गिर गया था, जबकि एक दिन पहले की मेडिकल रिपोर्ट में यह 4.3 दर्ज था।

स्वतंत्र जांच का भी किया गया दावा

याचिका के अनुसार, कई अनुरोधों के बाद अस्पताल ने करीब 10.5 घंटे बाद रक्त का नमूना उपलब्ध कराया। इसके बाद एक स्वतंत्र प्रयोगशाला में जांच कराने पर कथित तौर पर पोटेशियम स्तर 3.6 पाया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे अस्पताल में भर्ती रखने के चिकित्सीय आधार पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

निजी अस्पताल में स्थानांतरण की मांग

याचिका में आरोप लगाया गया है कि तीन लिखित अनुरोधों के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने वांगचुक को छुट्टी देने या निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति नहीं दी। इसके अलावा, उनके वकीलों और इलाज कर रहे डॉक्टरों को उनसे मिलने नहीं दिया गया और परिवार के साथ भी सीमित चिकित्सा जानकारी साझा की गई।

अनुच्छेद 19 और 21 के उल्लंघन का दावा

याचिका में कहा गया है कि वांगचुक की निरंतर अस्पताल में मौजूदगी किसी गिरफ्तारी, हिरासत या न्यायिक आदेश पर आधारित नहीं है। आरोप लगाया गया है कि "चिकित्सा हस्तक्षेप" का इस्तेमाल उनके शांतिपूर्ण विरोध को रोकने के बहाने के रूप में किया जा रहा है। इसे संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत मिले व्यक्तिगत स्वतंत्रता, शारीरिक स्वायत्तता, सूचित सहमति और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकारों का उल्लंघन बताया गया है।

अंतरिम राहत में क्या मांगा गया

आंगमो ने अदालत से वांगचुक की कथित कैद को अवैध घोषित करने, उन्हें तत्काल रिहा करने, परिवार की पसंद के अस्पताल में स्थानांतरित करने, कानूनी सलाहकारों और डॉक्टरों से मिलने की अनुमति देने, संपूर्ण मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध कराने और उनकी या आवश्यक होने पर उनकी पत्नी की सूचित सहमति के बिना कोई दवा या उपचार न देने का निर्देश जारी करने की मांग की है।

16 जुलाई के आदेश के बाद बढ़ा विवाद

गौरतलब है कि 16 जुलाई को दिल्ली उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने वांगचुक की भूख हड़ताल के दौरान बिगड़ते स्वास्थ्य को लेकर दायर जनहित याचिका का निपटारा करते हुए केंद्र सरकार के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया था कि सरकारी डॉक्टर प्रतिदिन उनके स्वास्थ्य की निगरानी करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर आवश्यक चिकित्सा हस्तक्षेप उपलब्ध कराएंगे। इसके दो दिन बाद वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जिसके बाद उनकी पत्नी ने उनके लगातार अस्पताल में भर्ती रखे जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

ANI

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