बाराबंकी में घाघरा नदी का घटा जलस्तर, तराई में कटान बढ़ने से ग्रामीण चिंतित
बाराबंकी: तहसील रामनगर के घाघरा घाट स्थित एल्गिन ब्रिज केंद्रीय जल आयोग एवं संजय सेतु के पास सरयू-घाघरा नदी का जलस्तर शुक्रवार को लगातार घटने लगा। नदी का जलस्तर अब खतरे के लाल निशान से 23 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया है। हालांकि पानी घटने के साथ ही तराई क्षेत्र में नदी का कटान तेज होने से ग्रामीणों की चिंता बनी हुई है।
105.850 मीटर दर्ज किया गया जलस्तर
केंद्रीय जल आयोग के कर्मचारी पवन कुमार ने बताया कि शुक्रवार दोपहर 12 बजे घाघरा नदी का जलस्तर 105.850 मीटर दर्ज किया गया। यह खतरे के लाल निशान से 23 सेंटीमीटर नीचे है। उन्होंने बताया कि इससे पहले नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 73 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया था। अब नदी डेंजर लेवल से नीचे उतरकर वार्निंग लेवल की ओर पहुंच गई है। दोपहर दो बजे जलस्तर 105.840 मीटर दर्ज किया गया, यानी दो घंटे में एक सेंटीमीटर की कमी दर्ज हुई।
जलमग्न हुई हजारों बीघा कृषि योग्य भूमि
जलस्तर घटने के साथ ही तराई क्षेत्र में कई स्थानों पर नदी कटान कर रही है। ग्राम पंचायत तपेशिपाह के आसपास खाली पड़ी जमीन को घाघरा-सरयू नदी लगातार अपने आगोश में ले रही है। नदी की धारा खेतों के किनारों तक पहुंचने से ग्रामीणों को कृषि भूमि के कटान का खतरा सता रहा है। बाढ़ के कारण हजारों बीघा कृषि योग्य भूमि जलमग्न हो गई है। खेतों में लगी धान और गन्ने की फसल पानी में डूबने से किसानों को भारी नुकसान हुआ है।
घाघरा की बाढ़ से फसलें बर्बाद
लगातार चार दिनों तक हुई बारिश और इसके बाद घाघरा नदी में आई बाढ़ ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खड़ी फसल बर्बाद होने से किसानों की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ा है। तराई क्षेत्र के ग्रामीणों ने प्रशासन से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फसलों और जमीन के नुकसान का सर्वे कराकर किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिलाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर घटने के बावजूद बाढ़ से हुए नुकसान का असर लंबे समय तक रहेगा। प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में कटान और फसल क्षति का स्थलीय निरीक्षण कराने की मांग की गई है।
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