बुरहानपुर के गांव में पहाड़ के गड्ढे से पानी लाने को मजबूर महिलाएं
बुरहानपुर। किसी स्थान का नाम अक्सर उसकी पहचान बन जाता है, लेकिन बुरहानपुर जिले का 'नादियामाल' गांव इस पहचान से कोसों दूर है। नाम से भले ही यह गांव समृद्ध और संपन्न प्रतीत होता हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। यहाँ की 200 से अधिक की आबादी आज भी बुनियादी सुविधाओं, विशेषकर पीने के पानी के लिए भीषण संघर्ष कर रही है।
जानिए त्रासदी के बारे में
इस गांव की सबसे बड़ी त्रासदी पानी की कमी है। जहां सरकारें हर घर नल से जल पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे करती हैं, वहीं नादियामाल गांव की महिलाएं आज भी अपनी प्यास बुझाने के लिए पहाड़ों का रुख करने को मजबूर हैं।
दुर्गम सफर के पाद गड्ढों का पानी
गांव की महिलाएं और युवतियां मीलों पैदल चलकर पहाड़ों के ऊबड़-खाबड़ रास्तों से गुजरती हैं। पहाड़ में बने छोटे-छोटे गड्ढों में जमा गंदा और दूषित पानी ही इनके जीवन का एकमात्र सहारा है। यह पानी न केवल अपर्याप्त है, बल्कि यह दूषित भी होता है, जिससे ग्रामीणों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव
नादियामाल गांव केवल जल संकट ही नहीं, बल्कि अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी से भी जूझ रहा है। गांव के लोगों का कहना है कि प्रशासन का ध्यान इस ओर नहीं है, जिसके कारण उन्हें अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ता है। नाम में 'माल' (धन/समृद्धि) होने के बावजूद, यहां के लोग विकास की मुख्यधारा से कटे हुए नजर आते हैं।
प्रशासनिक उदासीनता पर गहरे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने कई बार अपनी समस्या से अधिकारियों को अवगत कराया है, लेकिन आश्वासन के सिवाय उन्हें कुछ नहीं मिला। पहाड़ों के गड्ढों से पानी भरने की यह तस्वीर न केवल इस गांव की लाचारी को दर्शाती है, बल्कि विकास के दावों पर भी बड़े सवाल खड़े करती है। नादियामाल गांव की स्थिति यह दर्शाती है कि विकास की रोशनी अभी भी दूरस्थ इलाकों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाई है। जब तक प्रशासन इस गांव के लिए स्थायी जल आपूर्ति का कोई ठोस समाधान नहीं निकालता, तब तक इन महिलाओं का यह कठिन सफर जारी रहेगा।
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