योगी आदित्यनाथ ने रामनाथ कोविंद का किया सम्मान, बोले- वे वंचितों और गरीबों की आवाज बने
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्ट्रगल्स’ (Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles) के विमोचन कार्यक्रम में उन्हें सम्मानित किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कोविंद के साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने के सफर को याद किया। उन्होंने शिक्षा, जनसेवा और व्यक्तिगत संघर्षों के जरिए कोविंद की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
परौंख गांव से शुरू हुआ रामनाथ कोविंद का सफर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने रामनाथ कोविंद के शुरुआती जीवन और उनके गांव परौंख का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें कई बार कोविंद की जन्मस्थली जाने का अवसर मिला है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री भी इस गांव का दौरा कर चुके हैं। योगी आदित्यनाथ के अनुसार, कोविंद का जन्म एक बेहद गरीब परिवार में हुआ था और कम उम्र में ही उन्होंने अपनी मां को खो दिया था।
मुश्किलों के बावजूद शिक्षा और जनसेवा पर दिया जोर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रामनाथ कोविंद ने अपने जीवन की कठिनाइयों को कभी आगे बढ़ने में बाधा नहीं बनने दिया। उन्होंने कहा, "लेकिन उन्होंने कभी भी उस अभाव का इस्तेमाल जिंदगी से भागने या अपने लिए कुछ मांगने के बहाने के तौर पर नहीं किया। उन्होंने गांव के स्कूल में पढ़ाई की और उच्च शिक्षा हासिल की।" मुख्यमंत्री ने कोविंद के जीवन को संघर्षों के बीच शिक्षा और आगे बढ़ने के संकल्प से जुड़ा उदाहरण बताया।
वकील से राष्ट्रपति तक का सफर किया याद
योगी आदित्यनाथ ने रामनाथ कोविंद के वकील के रूप में करियर और सार्वजनिक जीवन में उनकी विभिन्न भूमिकाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने राज्यसभा सांसद, बिहार के राज्यपाल और भारत के राष्ट्रपति के तौर पर कोविंद की यात्रा को रेखांकित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविंद ने अलग-अलग जिम्मेदारियों के माध्यम से सार्वजनिक जीवन में अपनी पहचान बनाई और अंततः देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचे।
'वंचितों और गरीबों की आवाज बने रामनाथ कोविंद'
मुख्यमंत्री ने रामनाथ कोविंद के सामाजिक सरोकारों और राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए कहा, "एक वकील के तौर पर, वे वंचितों और गरीबों की आवाज बने। उन्होंने भारत के राष्ट्रवादी मिशन को अपने संघर्ष का हिस्सा बनाया। पहले बीजेपी सदस्य और पदाधिकारी के तौर पर, फिर राज्यसभा सांसद के तौर पर, फिर बिहार के राज्यपाल के तौर पर और आखिरकार भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचकर, उन्होंने भारत के सबसे लोकप्रिय राष्ट्रपतियों में से एक के तौर पर अपना नाम दर्ज कराया।" (Source: ANI)
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