नशे के खिलाफ योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति: वर्ष 2026 में 80 करोड़ की अवैध संपत्ति जब्त
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। योगी सरकार की नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का असर उत्तर प्रदेश में लगातार दिखाई दे रहा है। यूपी पुलिस और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने नशीले पदार्थों के कारोबार में शामिल तस्करों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के साथ उनकी अवैध संपत्तियों पर भी कड़ा शिकंजा कसा है। मादक पदार्थों के तस्करों के विरुद्ध निरुद्धीकरण की कार्रवाई में तेजी लाई गई है और वर्ष 2026 में 23 सितंबर तक प्रदेश में 71 तस्करों के खिलाफ पीआईटी एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।
डीजीपी ने साझा किए कार्रवाई के मुख्य उद्देश्य
यूपी डीजीपी राजीव कृष्ण ने जानकारी दी कि नशे के खिलाफ इस अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल तस्करों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ना और नशे के कारोबार से अर्जित अवैध संपत्ति को जब्त करना भी है। उत्तर प्रदेश को वर्ष 2029 तक नशामुक्त बनाने के निर्धारित लक्ष्य की दिशा में पुलिस और प्रशासन द्वारा कार्रवाई लगातार तेज की जा रही है ताकि अपराधियों के हौसले पस्त किए जा सकें।
अवैध संपत्ति जब्ती और तस्करों की आर्थिक कमर पर प्रहार
नशे के कारोबार से कमाई गई अवैध संपत्ति को जब्त कर तस्करों की आर्थिक कमर तोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में 29 मामलों में करीब 19 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई थी, जबकि वर्ष 2026 में 23 सितंबर तक 69 मामलों में करीब 80 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति जब्त की जा चुकी है। पुलिस और एएनटीएफ की संयुक्त कार्रवाई के माध्यम से कई कुख्यात तस्करों के नेटवर्क पर सीधा प्रहार किया गया है।
एनडीपीएस एक्ट के तहत कानूनी प्रक्रिया और जब्ती
डीजीपी ने स्पष्ट किया कि पुलिस की यह कार्रवाई केवल गिरफ्तारी तक ही सीमित नहीं है। एनडीपीएस एक्ट की धाराओं के तहत नशीले पदार्थों की तस्करी से अर्जित अवैध संपत्ति को पहले अस्थायी रूप से फ्रीज किया जाता है और जांच व सुनवाई के बाद उसे स्थायी रूप से जब्त कर लिया जाता है। इस सख्त कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से तस्करों को आर्थिक रूप से पूरी तरह कमजोर किया जा रहा है ताकि वे इस अवैध कारोबार को दोबारा न फैला सकें।
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