यूपी में 200 करोड़ से बने अत्याधुनिक आपदा प्रबंधन केंद्र का उद्घाटन, सीएम योगी ने अर्ली वार्निंग सिस्टम पर दिया जोर
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण करते हुए कहा कि सतर्कता, पूर्व तैयारी और जनजागरूकता से आपदाओं में जन-धन की हानि को कम किया जा सकता है। उन्होंने स्कूलों, परिवारों और समाज में आपदा जागरूकता बढ़ाने, अर्ली वार्निंग सिस्टम, तकनीक और नियमित मॉक ड्रिल को मजबूत करने पर जोर दिया। करीब 200 करोड़ रुपये से अधिक लागत से बना यह भवन अत्याधुनिक आपदा प्रबंधन केंद्र के रूप में कार्य करेगा।
कार्मिक सम्मानित, वेबसाइट का शुभारंभ
मुख्यमंत्री आज यहां उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण (UPSDMA) के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण करने के पश्चात आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आपदा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले राज्य आपदा मोचन बल के कार्मिकों को सम्मानित तथा प्राधिकरण की वेबसाइट का शुभारम्भ किया। उन्होंने प्राधिकरण में राज्य आपातकालीन परिचालन केन्द्र, SEOC कार्य प्रणाली तथा NDRF, SDRF, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं द्वारा लगायी गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
200 करोड़ से बना अत्याधुनिक केंद्र
ज्ञातव्य है कि उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण का नवनिर्मित भवन 200 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित किया गया है। यह भवन आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित आपदा प्रबन्धन केन्द्र के रूप में विकसित किया गया है। इस भवन में 24x7 संचालित अत्याधुनिक राज्य आपातकालीन संचालन केन्द्र, 200 से अधिक लोगों की क्षमतायुक्त ऑडिटोरियम, क्लासरुम, लेक्चर हॉल, हॉस्टल तथा लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध है।
आपदा जागरूकता और प्रशिक्षण पर बल
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि हम आपदाओं के विषय में लोगों में जागरूकता का प्रसार करते हैं, तो आपदाओं से होने वाली जन-धन हानि को रोका जा सकता है। लोग अक्सर आपदा आने तथा जन-धन की व्यापक हानि होने के पश्चात सक्रिय होते हैं तथा अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हैं, जबकि विभिन्न आपदाओं के सम्बन्ध में पूर्व तैयारी आवश्यक है। प्रदेश में वर्तमान में 45,000 होमगार्ड्स भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। प्रशिक्षण प्राप्त आपदा मित्रों को होमगार्ड भर्ती में प्राथमिकता दी जाएगी। होमगार्ड्स स्वयंसेवकों को आपदा मित्र की ट्रेनिंग अनिवार्य रूप से प्रदान की जाएगी। फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स की मॉक ड्रिल की तैयारी भी आवश्यक है।
होमगार्ड्स को मिल रही बेहतर सुविधाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम होमगार्ड्स स्वयं सेवकों को अनेक सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। उन्हें अच्छा मानदेय दे रहे हैं। 05 लाख रुपये प्रतिवर्ष कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। घटना-दुर्घटना होने पर होमगार्ड स्वयंसेवक के परिजनों को लगभग 35 से 40 लाख रुपये की सहायता राशि उपलब्ध करायी जाती है। मुख्यमंत्री राहत कोष से 05 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता की जाती है। यह सब इसलिए किया जाता है, ताकि वह समाज के लिए अपनी सेवा का बेहतर उपयोग करते हुए राहत उपलब्ध करा सकें।
स्कूलों में आपदा जागरूकता बढ़ाने की अपील
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूल-कॉलेजों में जाकर वहां के शिक्षकों व विद्यार्थियों को बाढ़, आकाशीय बिजली तथा अतिवृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं के विषय में जागरूक किया जाए। आपदा के समय बरती जाने वाली सावधानियों के विषय में अवगत कराया जाए। कुछ आपदाएं मानव निर्मित होती हैं, जैसे असावधानी से होने वाली अग्निकांड की घटना या गलत डिजाइन के कारण किसी भवन का धराशायी हो जाना। मानव निर्मित आपदाओं को सतर्कता एवं पूर्व तैयारी से रोकना पूर्णतः सम्भव है। उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने मानव-वन्यजीव द्वन्द्व को आपदा की श्रेणी में सम्मिलित कर लोगों को राहत देने का कार्य किया है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष पर सतर्कता जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी हाल ही में समाचारों में जनपद बहराइच में मगरमच्छ द्वारा 12 वर्ष आयु के एक बच्चे का जीवन समाप्त करने की दुःखद घटना सुनने को मिली। थोड़ी सी सावधानी बरतने पर ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। एक मगरमच्छ अपने पूरे जीवनकाल में 04 से 05 किलोमीटर के दायरे में विचरण करता है। सभी को यह पता होना चाहिए कि कौन से क्षेत्र मगरमच्छ के प्रति संवेदनशील हैं। इस बारे में समय-समय पर अलर्ट भी जारी होना चाहिए। बिजनौर में विगत दो वर्षों में 80 लेपर्ड रेस्क्यू किए गए हैं। यह लेपर्ड ज्यादातर गन्ने की बेल्ट में पाये जा रहे हैं। यदि वहां के लोग इनके बारे में जागरूक नहीं हैं, तो वह इन लेपर्ड की चपेट में आ सकते हैं। लेपर्ड पीछे से हमला करता है। यदि हम लोगों को लेपर्ड के स्वभाव तथा क्षेत्र के विषय में जागरूक करेंगे, तो बड़े पैमाने पर जनहानि को रोका जा सकता है।
वज्रपात से बचाव के लिए तकनीक का उपयोग
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में मानव-वन्यजीव द्वन्द्व से 4,000 तथा प्राकृतिक आपदाओं से 5,000 से अधिक लोग काल-कवलित हुए हैं। टेक्नोलॉजी का उपयोग कर वज्रपात की घटना से लोगों की जान बचाई जा सकती है। जिन क्षेत्रों में लाइटनिंग की घटना होने वाली है, वहां कम से कम डेढ़-दो घण्टे पूर्व लोगों को अलर्ट भेजा जाना चाहिए। लोगों को बताया जाना चाहिए कि बिजली चमकने पर वह पक्की छत के नीचे चले जाएं। स्वयं तथा अपने पशुओं को खुले आसमान में न रखें। पेड़ों के नीचे न खड़े हों। किसी धातु का सामान लेकर न चलें।
अर्ली वार्निंग सिस्टम को प्रभावी बनाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत दिनों प्रदेश में अचानक आए भीषण तूफान, भारी बारिश और आकाशीय बिजली गिरने से एक ही दिन में 111 लोगों की मौत हुई थी। मैंने राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ इस घटना के सम्बन्ध में बैठक की थी। मैंने बैठक में कहा कि इन मौतों को रोका जा सकता था। इसके लिए हमें अर्ली वार्निंग सिस्टम को प्रभावी बनाना पड़ेगा। बैठक के ठीक तीसरे दिन NDRF और SDRF ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।
समय पर अलर्ट से टला बड़ा हादसा
NDMA और SDMA ने बेहतरीन कोऑर्डिनेशन का कार्य किया। इसका परिणाम सहारनपुर में देखने को मिला। वहां शाकुम्भरी देवी मन्दिर में जागरण तथा भण्डारे का कार्यक्रम चल रहा था। इस कार्यक्रम में हजारों लोग सम्मिलित थे। शिवालिक पहाड़ियों में रात्रि में अचानक भारी वर्षा होने लगी। अलर्ट जारी किया गया। प्रशासन ने कार्यक्रम में सम्मिलित लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया। देखते ही देखते नदियों में लगभग 04 फीट पानी बढ़ गया। यदि अलर्ट जारी न किया गया होता तथा प्रशासन द्वारा तेजी न दिखायी गयी होती, तो सैकड़ों लोग चपेट में आ सकते थे।
तकनीक आधारित आपदा प्रबंधन की जरूरत
मुख्यमंत्री ने कहा कि SDMA का अच्छे संस्थानों से समन्वय आज की आवश्यकता है। उन संस्थानों से MOU करें। ट्रेनिंग के साथ जुड़ें। समय-समय पर सोशल, डिजिटल, विजुअल तथा प्रिन्ट मीडिया के माध्यम से प्रत्येक तबके के लोगों को व्यापक अवेयरनेस कार्यक्रम से जोड़ें। जनपद, ब्लॉक, तहसील, थाना, नगर निकाय आदि स्तर पर मॉक ड्रिल चलाएं। टेक्नोलॉजी ड्रिवेन डिजास्टर मैनेजमेन्ट को प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। इस कार्य में सेटेलाइट एवं रिमोट सेंसिंग मॉनीटरिंग की सहायता ली जा सकती है। आर्टिफिशियल इन्टेलिजेन्स आधारित रिस्क मैपिंग की दिशा में कार्य करना होगा।
डिजिटल अलर्ट और ड्रोन तकनीक पर फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम प्रिडिक्टिव एनालिटिक्स आधारित अर्ली वॉर्निंग सिस्टम तथा मोबाइल बेस्ड सिटीजन अलर्ट सिस्टम का उपयोग कर रहे हैं। इस पूरे सीजन में जब भी इस प्रकार की किसी घटना की आशंका होती है, तो हमें इस सिस्टम का उपयोग करना पड़ेगा। GIS आधारित डिसीजन मेकिंग एण्ड डिजिटल कण्ट्रोल रूम प्रभावी बनाना पड़ेगा। ड्रोन आधारित सर्च एण्ड रेस्क्यू ऑपरेशन का अधिक इन्टीग्रेटेड उपयोग आज की आवश्यकता है। प्रदेश को एक ऐसे राज्य के रूप में बनाना है, जहां प्रत्येक नागरिक यह विश्वास कर सके कि संकट की घड़ी में सरकार उनके साथ खड़ी है।
आपदा योद्धाओं को सम्मान देने की पहल
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज आपदा के क्षेत्र में प्रशंसनीय कार्य करने वाले कार्मिकों को सम्मानित किया गया है। हमें अन्य विभागों को जोड़ते हुए किसी की जान बचाने वाले नाविक तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष में अमूल्य जीवन बचाने में अपना योगदान देने वाले व्यक्तियों को भी सम्मानित करना होगा। इस विषय में नई सोच विकसित करनी पड़ेगी। SDMA के माध्यम से इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। प्रदेश में आपदा प्रबन्धन के लिए धनराशि की कमी नहीं है। उचित नियोजन की दिशा में किए जाने वाले प्रयासों को अच्छी नीयत के साथ प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।
आपदा प्रबंधन में नवाचार पर जोर
वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण द्वारा आपदा प्रबन्धन के क्षेत्र में नवाचार, तकनीकी क्षमता विकास, राहत एवं प्रतिक्रिया कार्यों पर विशेष बल दिया जा रहा है। जब विपत्ति आती है, तो लोगों में दो प्रकार का रिएक्शन होता है। एक रिएक्शन व्यक्ति को कठोर बनाता है और दूसरा रिएक्शन व्यक्ति को दयालु बनाता है। मुख्यमंत्री के प्रयासों से इस भवन का लोकार्पण हो रहा है। यह अत्यन्त सराहनीय कार्य है, इससे उनकी प्रदेश के नागरिकों के प्रति संवेदनशीलता प्रदर्शित होती है।
सुरक्षित भविष्य की सोच का प्रतीक भवन
राजस्व राज्यमंत्री सुरेन्द्र दिलेर ने कहा कि आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण का नव निर्मित भवन केवल ईंट-पत्थरों से निर्मित एक संरचना नहीं, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के सुरक्षित, सक्षम और आपदा प्रतिरोधी भविष्य की सोच का प्रतीक है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश सरकार इस व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए निरन्तर कार्य कर रही है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में आपदा प्रबन्धन केवल एक प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि करोड़ों नागरिकों के जीवन की सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है।
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