अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) पर अमेरिका द

ICC पर अमेरिकी प्रतिबंधों के खिलाफ 8 देशों ने उठाई आवाज, अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था के समर्थन में आए साथ

अमेरिकी प्रतिबंधों पर आठ देशों की आपत्ति

वाशिंगटन डीसी: ग्रुप ऑफ सेवन (जी7) के छह सदस्यों ने शुक्रवार (स्थानीय समय) को अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) पर प्रतिबंध लगाने के संयुक्त राज्य अमेरिका के फैसले से कड़ी असहमति व्यक्त की और न्यायालय की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और अखंडता के लिए अपने "निरंतर और अटूट समर्थन" की पुष्टि की। एक संयुक्त बयान में कनाडा, डेनमार्क, जर्मनी, फ्रांस, इटली, जापान, नीदरलैंड और यूनाइटेड किंगडम के विदेश मंत्रियों ने कहा, हम अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) के रोम क़ानून के हस्ताक्षरकर्ता सदस्य देश, आईसीसी की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और अखंडता के लिए अपने निरंतर और अटूट समर्थन की पुष्टि करते हैं।

आठ देशों ने ICC पर अमेरिकी प्रतिबंधों का किया विरोध

बयान में आगे कहा गया, आईसीसी के प्रतिबद्ध समर्थकों के रूप में हम संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा न्यायालय पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा पर खेद व्यक्त करते हैं और इससे पूरी तरह असहमत हैं। आठों देशों ने उपायों की तैयारी के लिए अदालत के प्रयासों को भी स्वीकार किया और रोम संधि के तहत इसके निरंतर कामकाज के लिए अपने समर्थन को दोहराया। बयान में कहा गया है, हम रोम क़ानून के तहत अपने जनादेश को पूरा करने के लिए न्यायालय द्वारा ऐसे उपायों की तैयारी के लिए किए गए कार्यों की सराहना करते हैं। ऐसा करने में न्यायालय को सक्षम बनाने के लिए हम अपने अटूट समर्थन को रेखांकित करते हैं। संभावित परिणामों की चेतावनी देते हुए विदेश मंत्रियों ने कहा कि अगर प्रतिबंध लागू किए जाते हैं, तो इससे न्यायालय, उसके कर्मचारियों और उनके परिवारों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा, जो गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों के आरोपियों को न्याय के कटघरे में लाने और पीड़ितों का समर्थन करने के लिए काम करते हैं।

ICC के समर्थन और अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही के लिए मिलकर करेंगे काम

फिर भी अगर ये प्रतिबंध लागू होते हैं, तो इनका न्यायालय के कामकाज, उसके समर्पित कर्मचारियों और उनके परिवारों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा। वे प्रतिदिन सबसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों के आरोपियों को न्याय के कटघरे में लाने और उनके पीड़ितों का समर्थन करने के लिए काम करते हैं। इन देशों ने आगे कहा कि वे आईसीसी के प्रति अपने समर्थन में एकजुट हैं और दिसंबर 2026 में होने वाली राज्यों के पक्षकारों की सभा से पहले रोम संधि के पक्षकार न होने वाले देशों के साथ रचनात्मक और समावेशी संवाद के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसमें आगे कहा गया है, हम न्यायालय के महत्वपूर्ण कार्यों का समर्थन करने, नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय प्रणाली को बनाए रखने और जवाबदेही को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे।

अमेरिकी प्रतिबंधों पर ICC का विरोध

आईसीसी द्वारा अमेरिकी प्रशासन के संस्था पर प्रतिबंध लगाने के फैसले को दृढ़ता से खारिज करने के बाद संयुक्त बयान जारी किया गया, जिसमें इस कदम को इसके संचालन को बाधित करने और अदालत के लिए काम करने वाले या उसके साथ सहयोग करने वालों को डराने का प्रयास बताया गया। अमेरिकी प्रशासन ने अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय पर प्रतिबंध लगाना शीर्षक वाले एक कार्यकारी आदेश के तहत प्रतिबंधों की घोषणा की, जिसमें अमेरिकी संप्रभुता पर चिंता और वाशिंगटन द्वारा न्यायिक संस्था से उत्पन्न खतरे के रूप में वर्णित बातों का हवाला दिया गया। अपने जवाब में आईसीसी ने इस कार्रवाई को एक अभूतपूर्व कदम बताया है जो 125 सदस्य देशों द्वारा नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध, युद्ध अपराध और आक्रामकता के अपराध की जांच और अभियोजन के लिए सौंपी गई एक स्वतंत्र न्यायिक संस्था को लक्षित करता है।

काम जारी रखने का संकल्प

आज संयुक्त राज्य अमेरिका ने अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय पर एक संस्था के रूप में प्रतिबंध लगा दिए हैं। न्याय के हित में काम करने वाले तेरह स्वतंत्र न्यायाधीशों और अभियोक्ताओं के खिलाफ लगाए गए आरोपों की एक श्रृंखला के बाद यह अभूतपूर्व कदम उठाया गया है। आईसीसी ने कहा कि इन उपायों का उद्देश्य न्याय में बाधा डालना और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपनी जिम्मेदारियों को निभाने से रोकना है। बयान में आगे कहा गया, यह न्याय की प्रक्रिया में बाधा डालने और न्यायालय को उसके उद्देश्य से किए जाने वाले कार्यों को करने से रोकने का प्रयास है। यह विधि के शासन और अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था की नींव पर हमला है, जो इस सरल सिद्धांत का उल्लंघन करता है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। अदालत ने आगे कहा कि यह पदनाम इसके कामकाज को बाधित करने और इसके काम से जुड़े व्यक्तियों को डराने के उद्देश्य से किया गया था। आईसीसी की अध्यक्ष टोमोको अकाने ने कहा कि संस्था कानून और सबूतों के आधार पर स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से अपने जनादेश का निर्वहन करना जारी रखेगी।

अंतरराष्ट्रीय न्याय की रक्षा के लिए सदस्य देश आगे आएं

अकाने ने कहा, अदालत गंभीर अपराधों के अनगिनत पीड़ितों के हित में केवल कानून और सबूतों के आधार पर कार्रवाई करते हुए स्वतंत्रता और निष्पक्षता के साथ अपने जनादेश का पूरी तरह से निर्वहन करना जारी रखेगी। आईसीसी ने संस्था की स्थापना करने वाले देशों से इसके निरंतर कामकाज का समर्थन करने का भी आग्रह किया, इस बात पर जोर देते हुए कि अंतरराष्ट्रीय न्याय को बनाए रखने की जिम्मेदारी अदालत से परे तक फैली हुई है, लेकिन न्यायालय अकेला नहीं रह सकता। इसका भविष्य अब उन राज्यों के हाथों में भी है जिन्होंने इसे बनाया है। न्यायालय ने कहा और यह भी जोड़ा कि रोम संधि सबसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों को बिना दंड के न रहने देने की सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतिनिधित्व करती है। यह घटनाक्रम अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा आईसीसी के खिलाफ अतिरिक्त प्रतिबंधों की घोषणा के बाद सामने आया है। वाशिंगटन ने कहा कि इन उपायों का उद्देश्य अमेरिकी संप्रभुता की रक्षा करना और अमेरिकी नागरिकों को अदालत द्वारा उत्पन्न खतरे से बचाना है।

अमेरिका में ICC की संपत्तियां होंगी ब्लॉक

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने X पर एक पोस्ट में इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि इस कदम से अदालत के भीतर अमेरिकी सहयोगियों को वाशिंगटन की चिंताओं को दूर करने की दिशा में काम करने के लिए प्रोत्साहन मिलना चाहिए। प्रतिबंधों के तहत और लागू लाइसेंसों और अपवादों के अधीन रहते हुए आईसीसी से संबंधित संपत्ति और संपत्ति में हित जो संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित हैं या अमेरिकी व्यक्तियों के पास हैं, अवरुद्ध हैं और अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) को इसकी सूचना दी जानी चाहिए।

कुछ गतिविधियों को 180 दिन की छूट

इन उपायों के तहत अमेरिकी नागरिकों द्वारा किए जाने वाले लेन-देन या संयुक्त राज्य अमेरिका के भीतर या उससे होकर गुजरने वाले लेन-देन, जिनमें नामित या अन्यथा प्रतिबंधित व्यक्तियों की संपत्ति या हित शामिल हैं, पर भी रोक लगा दी गई है, जब तक कि लागू लाइसेंस के तहत छूट या अनुमति न दी गई हो। अमेरिकी वित्त विभाग ने साथ ही आईसीसी से संबंधित कुछ लेन-देनों को अधिकृत करने वाले सामान्य लाइसेंस जारी किए, जिनमें 180 दिनों तक इसके संचालन को बनाए रखने के लिए आवश्यक गतिविधियां, निर्दिष्ट सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएं, अदालत की पेंशन योजना से संबंधित गतिविधियां और आईसीसी के बंदियों से संबंधित गतिविधियां शामिल हैं। 

(इनपुट: ANI)

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