बलोचिस्तान में कथित फर्जी मुठभेड़, सुरक्षा बलों पर लापता युवाओं की हत्या के आरोप
बलोचिस्तान (पाकिस्तान)। बलोचिस्तान में एक बार फिर न्यायेत्तर हत्याओं (एक्स्ट्राजुडिशियल किलिंग) के मामले सामने आए हैं। बलोच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने दावा किया है कि पहले से लापता दो युवकों को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने फर्जी मुठभेड़ में मार दिया है। द बलोचिस्तान पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटनाएं पंजगुर जिले में हुईं। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यह जबरन गुमशुदगी के बाद हिरासत में हत्या करने के बार-बार दोहराए जा रहे पैटर्न का हिस्सा है।
17 वर्षीय छात्र की हिरासत के बाद संदिग्ध मौत
द बलोचिस्तान पोस्ट के मुताबिक, बीवाईसी ने बताया कि शपातन के रहने वाले 17 वर्षीय एक छात्र को कथित तौर पर 5 अप्रैल 2026 को पारोम इलाके से फ्रंटियर कोर के कर्मियों ने हिरासत में लिया था। समूह का दावा है कि वह कई दिनों तक हिरासत में रहा। इस दौरान उसे गंभीर शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी गई। बाद में उसका शव एक दूरदराज के इलाके में लावारिस हालत में मिला, जिस पर गोलियों के कई निशान और क्षत-विक्षत होने के संकेत थे। बीवाईसी ने अपने बयान में अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे कथित दुर्व्यवहार को छिपाने के लिए ऐसी मौतों को सशस्त्र मुठभेड़ के रूप में गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। समूह ने तर्क दिया कि हातिम की हत्या को झूठी मुठभेड़ बताया गया, जबकि उसके लापता होने की जानकारी पहले से ही दर्ज थी।
एक और मामले में 18 वर्षीय युवक समेत चार की मौत
समूह ने 18 वर्षीय मरवान के मामले पर भी प्रकाश डाला, जो उसी जिले में एक और कथित फर्जी मुठभेड़ में मारे गए चार लोगों में शामिल था। उनके शवों को अस्पताल लाया गया और उन्हें आपसी झड़प में हुई मौतों के रूप में पेश किया गया। बीवाईसी का कहना है कि वे पहले से लापता थे। बलोच युवाओं के खिलाफ इसे एक व्यवस्थित अभियान बताते हुए बीवाईसी ने आरोप लगाया कि हाल के महीनों में दर्जनों लोग इसी तरह की परिस्थितियों में मारे गए हैं।
संस्थाओं की चुप्पी पर सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग
इसके अलावा, समूह ने न्यायपालिका सहित पाकिस्तानी संस्थानों पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया। वहीं, वैश्विक मानवाधिकार संगठनों की चुप्पी की भी आलोचना की। समूह ने जबरन गुमशुदगी के मामलों की स्वतंत्र जांच, लापता लोगों को तुरंत अदालत में पेश करने और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
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