जापानी पत्रिका 'प्रेसिडेंट' ने आनंद कुमार के डिजिट

जापानी पत्रिका 'प्रेसिडेंट' ने की आनंद कुमार के 'सुपर इन्फिनिटी' की तारीफ, बताया वैश्विक आंदोलन

Super 30 founder Anand Kumar (File Photo)

टोक्यो (जापान)। प्रतिष्ठित जापानी पत्रिका 'प्रेसिडेंट' ने 'सुपर 30' के संस्थापक आनंद कुमार की डिजिटल पहल 'सुपर इन्फिनिटी' की जमकर सराहना की है। पत्रिका ने इसे दुनिया भर के बच्चों के मन से गणित का डर दूर करने वाला एक 'वैश्विक शैक्षिक आंदोलन' करार दिया है।

दो भागों में छपे इस विशेष फीचर में पत्रिका ने आनंद कुमार के सफर को एक युवा गणित प्रेमी से लेकर दुनिया भर में शिक्षा पहुँचाने वाले शिक्षक के रूप में रेखांकित किया है। इसमें बताया गया है कि कैसे उनकी 'सुपर 30' पहल ने वंचित छात्रों को आईआईटी (IIT) तक पहुँचाया। जापानी पाठकों को इसकी महत्ता समझाने के लिए इसकी तुलना टोक्यो यूनिवर्सिटी से की गई है।

अनोखी शिक्षण शैली और 'सुपर इन्फिनिटी' का विस्तार

पत्रिका ने कुमार के पढ़ाने के अनोखे तरीकों की तारीफ की है, जिसमें वे जटिल गणितीय पहेलियों को सुलझाने के लिए 'भोलू' और 'रिकी' जैसे काल्पनिक पात्रों का इस्तेमाल करते हैं। 'सुपर इन्फिनिटी' का उद्देश्य मुफ्त डिजिटल शिक्षा के जरिए इस विजन को वैश्विक स्तर पर ले जाना है। इसके वीडियो को जापानी भाषा में भी लॉन्च करने की योजना बनाई जा रही है। बता दें कि उनके जीवन पर ऋतिक रोशन स्टारर फिल्म 'सुपर 30' भी बन चुकी है।

संघर्षों से भरा पटना का शुरुआती दौर

1970 के दशक की शुरुआत में बिहार की राजधानी पटना का माहौल आज से काफी अलग था। मौर्य और गुप्त साम्राज्य की प्राचीन राजधानी रहा पटना उस वक्त जर्जर बुनियादी ढांचे और भीषण गरीबी से जूझ रहा था। ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल में 1 जनवरी 1973 को जन्मे आनंद कुमार के पिता राजेंद्र प्रसाद डाक विभाग में एक सामान्य क्लर्क थे। कम वेतन के बावजूद उन्हें शिक्षा की ताकत पर अटूट भरोसा था और वे मानते थे कि "गरीबी से बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता शिक्षा ही है।"

रेलवे ट्रैक के पास बीता बचपन

कुमार परिवार रेलवे पटरियों के बेहद करीब डेढ़ कमरे के एक छोटे और जर्जर मकान में रहता था। हर घंटे वहाँ से गुजरने वाली भारी-भरकम ट्रेनें पूरी इमारत को हिला देती थीं, जिससे घर के बर्तन तक खनकने लगते थे। लेकिन इस शोरगुल के बीच भी नन्हे आनंद ने अपनी पढ़ाई से कभी ध्यान नहीं भटकाया। उन्होंने भारी आवाज़ों को पूरी तरह अनसुना कर गणित की शांत और अनंत दुनिया में अपनी ऐसी एकाग्रता बनाई, जिसने आगे चलकर उनकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी। ​(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)

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