लाहौर में आवारा कुत्तों को मारने पर भड़के पशु अधिकार संगठन
लाहौर (पाकिस्तान)। पशु अधिकार के लिए काम करने वाले संगठनों ने स्थानीय प्रशासन पर लाहौर और प्रांत के कई अन्य हिस्सों में आवारा कुत्तों की हत्या को फिर से शुरू करने का आरोप लगाया है। संगठन ने इसे अदालते के निर्देशों और पंजाब की स्वीकृत टीएनवीआर (TNVR) नीति का उल्लंघन बताया।
संगठन ने सरकार पर लगाया नीति उल्लंघन का आरोप
स्थानीय मीडिया 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, 'गिव अस लाइफ एनिमल वेलफेयर सोसाइटी' और 'नेशनल एलायंस ऑफ एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट्स एंड एडवोकेट्स पाकिस्तान' के प्रतिनिधियों ने लाहौर प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने यह भी आरोप लगाए कि पशुओ को लेकर आवाज उठाने वाले कार्यकर्ताओं को डराया और धमकाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि साल 2021 में TNVR (ट्रैप, न्यूटर, वैक्सीनेट एंड रिलीज यानी पकड़ना, नसबंदी करना, टीका लगाना और छोड़ना) नीति को मंजूरी दी थी ताकि आवारा कुत्तों की आबादी को मारने के बजाय नसबंदी और टीकाकरण के जरिए मानवीय तरीके से नियंत्रित किया जा सके।
आफिया खान ने WHO के TNVR समर्थन का किया जिक्र
पशु अधिकार कार्यकर्ता और संगठन की सह-संस्थापक आफिया खान ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी पाकिस्तान जैसे देशों के लिए TNVR मॉडल को समर्थन दिया है। उन्होंने दावा किया कि मेट्रोपॉलिटन कॉरपोरेशन लाहौर के कर्मचारी आवारा कुत्तों को पकड़ते हैं और कथित तौर पर उन्हें कुछ दिनों तक रखने के बाद मारने के लिए सगियां के पास के इलाकों में ले जाते हैं। उनके मुताबिक ये कार्रवाई अदालती निर्देशों का उल्लंघन हैं और पर्यावरण तथा पशु कल्याण मानकों के लिए भी खतरा पैदा करती हैं।
पाठ्यक्रम में शामिल हो पशु अधिकार और नागरिक जिम्मेदारी
अधिवक्ता अल्तमश सईद ने पशु कल्याण कानूनों को अधिक सख्ती से लागू करने और पशु अधिकारों के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने आगे कहा कि समाज में मानवीय व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए पशु अधिकार, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक जिम्मेदारी को शैक्षिक पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। जमात-ए-इस्लामी पब्लिक एड कमेटी लाहौर के अध्यक्ष कैसर शरीफ ने कहा कि आवारा कुत्तों को मारना इस समस्या का कोई दीर्घकालिक समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि पशु संरक्षण के लिए सरकारी प्रयास नाकाफी रहे हैं। उन्होंने रेस्क्यू शेल्टर और हेल्पलाइन के साथ-साथ TNVR कार्यक्रम को बड़े पैमाने पर लागू करने की मांग की।
अधिकारियों पर वादाखिलाफी का आरोप
शरीफ ने कहा कि उनका संगठन पिछले 10 महीनों से इस मामले पर अभियान चला रहा है। उन्होंने नसबंदी के माध्यम से आवारा कुत्तों के हमलों और उनकी आबादी पर नियंत्रण पाने के उद्देश्य से आठ सिफारिशें तैयार की हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के एक अन्य प्रतिभागी हैदर शाह ने दावा किया कि वे पकड़े गए कुत्तों के बारे में जानकारी लेने के लिए आफिया खान के साथ मेट्रोपॉलिटन कॉरपोरेशन लाहौर के कार्यालय गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने शुरुआत में उन्हें आश्वासन दिया कि कुत्तों का टीकाकरण करके उन्हें छोड़ दिया जाएगा लेकिन बाद में वे अपनी बात से मुकर गए, जिसके कारण दोनों पक्षों में बहस हो गई और बाद में पुलिस को बुलाना पड़ा।