पाकिस्तान द्वारा बलूच राजनीतिक एक्टिविस्ट्स पर किए

लंदन में बलूच एक्टिविस्ट उमर करीम की भूख हड़ताल, पाकिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन के खिलाफ खोला मोर्चा

Baloch Activist Begins Hunger Strike Outside 10 Downing Street

लंदन (यूके)। पाकिस्तान द्वारा बलूच राजनीतिक एक्टिविस्ट्स पर किए जा रहे दमन के विरोध में बलूच एक्टिविस्ट उमर करीम ने लंदन में 10 डाउनिंग स्ट्रीट स्थित ब्रिटिश प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास के बाहर शांतिपूर्ण भूख हड़ताल शुरू कर दिया है। उन्होंने विश्व समुदाय से बलूचिस्तान की गंभीर स्थिति पर ध्यान देने की मांग की।

साथी एक्टिविस्ट्स को सजा और हिरासत के खिलाफ आवाज

करीम ने 'एक्स' एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने बलूच लोगों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए गुरुवार को भूख हड़ताल शुरू किया है। यह हड़ताल 3 जुलाई शुक्रवार शाम 6:30 बजे तक जारी रहेगी। उनके बयान के मुताबिक उनका यह विरोध प्रदर्शन बलूच अधिकार एक्टिविस्ट्स महरंग बलूच और सिबघतुल्लाह शाहजी को हाल ही में दी गई आजीवन कारावास की सजा और साथ ही बीबो बलूच, बेबर्ग जेहरी और गुलजादी बलूच पर लगातार हिरासत में रखे जाने के कारण शुरू किया गया है।

ब्रिटिश विदेश कार्यालय (FCDO) तक पहुंचेगा विरोध प्रदर्शन

करीम ने कहा कि इस अन्याय को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। उनका प्रदर्शन बलूच एक्टिविस्ट्स की दुर्दशा और पाकिस्तान में जारी मानवाधिकार उल्लंघनों की ओर ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से था। एक्टिविस्ट ने कहा कि वे गुरुवार और शुक्रवार को 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर रहेंगे और फिर शुक्रवार को किंग चार्ल्स स्ट्रीट स्थित UK के फॉरेन, कॉमनवेल्थ एंड डेवलपमेंट ऑफिस (FCDO) में अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय और आम जनता से समर्थन की अपील

करीम ने पत्रकारों, संसद सदस्यों, मानवाधिकार संगठनों, बलूच प्रवासी समुदाय के सदस्यों और आम जनता से बलूच मुद्दे के समर्थन में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा, "समर्थन का हर घंटा मायने रखता है और लोगों से विरोध प्रदर्शन में शामिल होने और अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की मांग को तेज करने का आग्रह किया।"

बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी और मानवाधिकारों का गहराता संकट

बलूचिस्तान क्षेत्र में जबरन गुमशुदगी की चिंताजनक घटनाएं जारी हैं। इनमें से कुछ पीड़ितों को अंततः रिहा कर दिया जाता है, जबकि अन्य को लंबे समय तक हिरासत में रखा जाता है या लक्षित हत्याओं का शिकार बनाया जाता है। मौलिक अधिकारों के इन उल्लंघनों ने स्थानीय आबादी में असुरक्षा और अविश्वास को बढ़ा दिया है। मनमानी गिरफ्तारियों का निरंतर खतरा और जवाबदेही की कमी बलूचिस्तान को अस्थिर कर रही है। इससे शांति, न्याय और राज्य संस्थानों में जनता के विश्वास को बहाल करने के प्रयास विफल हो रहे हैं। (Source: ANI)

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