बलूच नेता मीर यार बलूच ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से

बलूच नेता ने स्वतंत्रता की वैश्विक मान्यता की मांग, पाकिस्तान पर अत्याचार के गंभीर आरोप

Baloch Leader Seeks Global Recognition of Independence

बलूचिस्तान [पाकिस्तान]: बलूच नेता मीर यार बलूच ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान की "स्वतंत्रता" को कानूनी, राजनीतिक, कूटनीतिक और नैतिक रूप से मान्यता देने का आग्रह किया है। उन्होंने पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान पर बलूचिस्तान में दमन करने का आरोप लगाते हुए इसकी कड़ी निंदा की।

स्वतंत्रता दिवस पर दुनिया से मान्यता की अपील

मीर यार बलूच ने एक पोस्ट में कहा कि बलूचिस्तान के छह करोड़ लोग हर साल 11 अगस्त को अपना राष्ट्रीय स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं। उन्होंने कहा कि अब यह ऐसा समय है जब बलूचिस्तान के लोग केवल अपनी स्वतंत्रता का जश्न नहीं मना रहे, बल्कि दुनिया से उनकी स्वतंत्रता को मान्यता देने की मांग भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "बलूचिस्तान के छह करोड़ लोग हर साल 11 अगस्त को अपना राष्ट्रीय स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं। आज हम उस मुकाम पर पहुंच गए हैं जहां हम न केवल अपनी स्वतंत्रता का जश्न मनाते हैं, बल्कि दुनिया से मांग करते हैं कि बलूचिस्तान की स्वतंत्रता को कानूनी, राजनीतिक, कूटनीतिक और नैतिक रूप से मान्यता दी जाए।" उन्होंने बलूचिस्तान में रहने वाले बलूच, पश्तून, हिंदू, सिख, ईसाई और सभी धर्मों के लोगों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं भी दीं।

भारत के मीडिया और समर्थकों का जताया आभार

बलूच नेता ने बलूचिस्तान के मुद्दे को वैश्विक स्तर पर उठाने वाले मीडिया संस्थानों, विचारकों, शोधकर्ताओं, कवियों, लेखकों, छात्रों, वकीलों, नागरिक समाज, व्यापार जगत, धार्मिक नेताओं और सांसदों का आभार जताया। उन्होंने विशेष रूप से भारत के मीडिया का उल्लेख करते हुए कहा कि इन लोगों ने बलूचिस्तान के लोगों की आवाज को दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान के लोगों को नैतिक समर्थन जारी रखने की अपील की।

पाकिस्तान पर हजारों लोगों के उत्पीड़न का आरोप

मीर यार बलूच ने पाकिस्तान पर बलूचिस्तान में स्वतंत्रता की आवाज को दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि पचास हजार से अधिक बलूच लोग अभी भी पाकिस्तान की "यातना कोठरियों" में अमानवीय अत्याचार झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान की स्वतंत्रता की लड़ाई में शहीद हुए लोगों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और कैदियों के बलिदान को कभी नहीं भुलाया जाएगा। उन्होंने कहा, "हम उन्हें कभी नहीं भूलेंगे। आज की स्वतंत्रता की सफलता हमारे महान शहीदों, हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं और कैदियों के अमर बलिदानों के कारण है।"

बलूचिस्तान की सैन्य क्षमता को लेकर किया बड़ा दावा

बलूचिस्तान के इतिहास और संघर्ष का जिक्र करते हुए मीर यार बलूच ने दावा किया कि बलूचिस्तान के लोगों ने हमेशा विदेशी आक्रमणकारियों का विरोध किया है और उन्हें पीछे हटने के लिए मजबूर किया है। उन्होंने पाकिस्तान की सैन्य ताकत का उल्लेख करते हुए दावा किया कि पाकिस्तान के पास हजारों टैंक, सैकड़ों युद्धक विमान, तोपखाना और बड़ी सेना होने के बावजूद बलूचिस्तान की सेना शारीरिक, मानसिक और युद्ध क्षमता के मामले में उससे कई गुना अधिक मजबूत है। उन्होंने दावा किया कि बलूचिस्तान गणराज्य ने पांच लाख सैनिकों की सेना तैयार की है और यह सेना हर परिस्थिति का सामना करने में सक्षम है।

संयुक्त राष्ट्र समेत अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अपील

अपने पोस्ट में मीर यार बलूच ने संयुक्त राष्ट्र, आसियान, अफ्रीकी संघ, इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) और यूरोप के सदस्य देशों से बलूचिस्तान के मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध क्षेत्र है और इन संसाधनों का इस्तेमाल स्वास्थ्य, शिक्षा और मानव कल्याण के क्षेत्र में वैश्विक योगदान के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को भी बलूचिस्तान के इतिहास का गहन अध्ययन करना चाहिए।

इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद करने का आरोप

मीर यार बलूच ने पाकिस्तान पर स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों को रोकने के लिए बलूचिस्तान के कई क्षेत्रों में मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं बंद करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि कलात, क्वेटा और खुजदार समेत कुछ अन्य क्षेत्रों में सैन्य छावनियों और पुलिस स्टेशनों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई और बड़ी-बड़ी खाइयां खोदी गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि बलूचिस्तान के विभिन्न इलाकों में पाकिस्तान की वायुसेना गश्त कर रही है, जबकि ड्रोन और हेलीकॉप्टरों के जरिए निगरानी की जा रही है।

इंटरनेट बंद होने से जानकारी पहुंचने में देरी का दावा

मीर यार बलूच ने कहा कि इन प्रतिबंधों के बावजूद बलूचिस्तान के लोगों ने अपने-अपने क्षेत्रों में स्वतंत्रता दिवस मनाया। उन्होंने दावा किया कि इंटरनेट सेवाएं बंद होने के कारण कार्यक्रमों की तस्वीरें, वीडियो और रिपोर्ट बाहर पहुंचने में समय लग रहा है। उन्होंने कहा कि जल्द ही बलूचिस्तान से जुड़ी घटनाओं और पाकिस्तान के कथित दमन को पूरी दुनिया के सामने रखा जाएगा।

जबरन गायब किए जाने को लेकर भी चिंता

बलूचिस्तान क्षेत्र में जबरन गायब किए जाने की घटनाओं को लेकर भी चिंता जताई गई है। आरोप है कि कुछ लोगों को बाद में रिहा कर दिया जाता है, जबकि अन्य को लंबे समय तक हिरासत में रखा जाता है या लक्षित हत्याओं का शिकार बनाया जाता है। मानवाधिकारों से जुड़े इन आरोपों के कारण स्थानीय आबादी में असुरक्षा और अविश्वास बढ़ने की बात कही गई है। मनमानी गिरफ्तारियों और जवाबदेही की कमी को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इन परिस्थितियों को बलूचिस्तान में अस्थिरता का एक प्रमुख कारण बताया गया है। साथ ही, शांति, न्याय और सरकारी संस्थानों में लोगों का विश्वास बहाल करने की दिशा में भी चुनौतियां बनी हुई हैं।

(एएनआई)

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