भूटान में ग्लेशियल झील फटने से बाढ़ का खतरा, उत्तर बंगाल में हाई अलर्ट; 10 हजार से अधिक लोग सुरक्षित स्थानों पर भेजे गए
सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल): भूटान के लेमथांग में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की खबर सामने आई है। झील का अतिरिक्त पानी मो छू नदी से होते हुए संकोश नदी की ओर बह रहा है। इसके बाद अधिकारियों ने पूरे उत्तर बंगाल में हाई अलर्ट जारी कर दिया है और आपातकालीन तैयारियां शुरू कर दी हैं। संकोश नदी और उसकी सहायक नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। दार्जिलिंग की पहाड़ियों, तराई और डुआर्स क्षेत्रों के लोगों से भी बाढ़ की आशंका को देखते हुए सतर्क रहने की अपील की गई है। दार्जिलिंग से BJP सांसद राजू बिस्टा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए इस घटनाक्रम को लेकर अलर्ट साझा किया। उन्होंने संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों से सावधानी बरतने की अपील की। पोस्ट में लिखा था, “भूटान के लेमथांग में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की खबर मिली है। झील का ओवरफ्लो पानी मो छू नदी से होते हुए नीचे की ओर संकोश नदी की तरफ बह रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “इसलिए, संकोश नदी और उससे जुड़ी सभी सहायक नदियों के जलग्रहण क्षेत्र में रहने वाले लोगों को अपनी जान बचाने के लिए तुरंत सुरक्षित दूरी पर जाने की सलाह दी गई है। दार्जिलिंग की पहाड़ियों, तराई और डुआर्स के सभी लोगों से सतर्क रहने की अपील है।”
क्या होता है GLOF?
GLOF, जिसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड कहा जाता है, अचानक आने वाली खतरनाक बाढ़ होती है। यह तब आती है, जब ग्लेशियल झील को रोकने वाला प्राकृतिक बांध टूट जाता है या उसमें दरार आ जाती है। इससे बड़ी मात्रा में पानी तेजी से निचले इलाकों की ओर बहने लगता है। तैयारियों के बारे में बात करते हुए राज्य मंत्री निशिथ प्रमाणिक ने कहा कि भूटान में ग्लेशियल झील फटने की खबर मिली है और झील का अतिरिक्त पानी मो छू नदी के जरिए संकोश नदी की ओर बढ़ रहा है। प्रमाणिक ने कहा, “भूटान में ग्लेशियल झील के फटने की रिपोर्ट अभी आई है। झील का पानी ओवरफ्लो होकर मो छू नदी में बह रहा है, जो संकोश नदी की ओर बढ़ रहा है। संकोश नदी और उसकी सहायक नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को अलर्ट कर दिया गया है। उन्हें अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तुरंत सुरक्षित दूरी पर जाने की सलाह दी जाती है।” उन्होंने आगे कहा कि अगले 5 से 6 घंटों में पानी के मैदानी इलाकों तक पहुंचने की उम्मीद है, जिससे क्षेत्र में बड़ी बाढ़ की आशंका बढ़ गई है। उन्होंने कहा, "हालात को संभालने के लिए राज्य आपदा प्रबंधन टीम को सक्रिय कर दिया गया है और NDRF को भी सूचना दे दी गई है। आपदा प्रबंधन स्वयंसेवकों को मौके पर मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है। सरकार जान-माल के नुकसान को रोकने के लिए पहले से कदम उठा रही है और हालात पर करीब से नजर रख रही है।"
प्रशासन ने भूटान के अधिकारियों से किया संपर्क
इस बीच, अलीपुरद्वार के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार शॉ ने लोगों से घबराने की अपील नहीं की और कहा कि प्रशासन हालात से निपटने के लिए भूटान के अधिकारियों और विभिन्न आपदा राहत एजेंसियों के साथ समन्वय कर रहा है। शॉ ने बताया, "सबसे पहले, मैं जिले के लोगों को बताना चाहूंगा कि घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। हालात अभी नियंत्रण में हैं। हम भूटान में अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं। हमारी पुलिस टीम, जिला मजिस्ट्रेट (DM) और ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) अपनी-अपनी टीमों के साथ सभी संबंधित एजेंसियों और हितधारकों के साथ मिलकर करीबी तालमेल से काम कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) इलाके में मौजूद है, जबकि NDRF की एक टीम भी रास्ते में है। तैयारियों में मदद के लिए सिविल डिफेंस टीम को भी तैनात किया गया है।
10 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया
पुलिस अधीक्षक ने बताया, "हमने पहले ही लगभग 4,000 से 5,000 लोगों को आश्रय स्थलों में पहुंचा दिया है। स्कूल की इमारतों को राहत केंद्र के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा, 6,000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।" शॉ ने आगे कहा कि मिली ताजा जानकारी के मुताबिक पानी का बहाव थोड़ा कम हुआ है, लेकिन प्रशासन अभी भी हाई अलर्ट पर है।
राहत केंद्रों में खाने-पीने और जरूरी सुविधाओं का इंतजाम
शॉ ने कहा, "पुलिस, DM ऑफिस और BDO ऑफिस ने सूखे खाने और पीने के पानी का इंतजाम कर दिया है। हमने यह भी सुनिश्चित किया है कि शौचालय जैसी दूसरी जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध हों। हम दो घंटे में देखेंगे कि हालात कैसे होते हैं। हम पूरी तरह तैयार हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।" उन्होंने आगे बताया कि संकोश नदी प्रणाली के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। चेतावनी दी गई है कि आने वाले पानी के साथ मरी हुई मछलियां और मलबा भी बहकर आ सकता है। इसमें लकड़ी और कंक्रीट के बड़े टुकड़े शामिल हो सकते हैं। शॉ ने कहा, "हमें उम्मीद है कि संकोश नदी में पानी का बहाव बढ़ेगा, जिसके साथ मरी हुई मछलियां, लकड़ी के बड़े टुकड़े और कंक्रीट का मलबा भी आ सकता है।" अधिकारी लगातार हालात पर नजर रख रहे हैं, जबकि आपदा राहत टीमों और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी अलर्ट पर हैं। संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों से प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की गई है।
(ANI)
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