बलोच नेशनल मूवमेंट ने अवारां में सभा के दौरान आजाद

BNM ने दोहराई आजाद बलूचिस्तान की मांग, सभा में राजनीतिक संघर्ष जारी रखने का आह्वान

BNM Reiterates Demand for Independent Balochistan at Awaran Gathering

बलूचिस्तान (पाकिस्तान)। बलूचिस्तान की राजनीतिक स्थिति को लेकर एक बार फिर अलगाववादी मांगें तेज होती दिखाई दे रही हैं। बलोच नेशनल मूवमेंट (BNM) ने अवारां ज़ोन में आयोजित एक सभा के दौरान ‘आज़ाद बलूचिस्तान’ की मांग दोहराई और इसे हासिल करने के लिए राजनीतिक व संगठनात्मक प्रयास जारी रखने का आह्वान किया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने 11 अगस्त को बलोच इतिहास की अहम तारीख बताते हुए क्षेत्र के इतिहास, मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और संभावित स्वतंत्र बलूचिस्तान के भविष्य पर अपने विचार रखे। हालांकि, 1947-48 की घटनाओं और बलूचिस्तान की स्थिति को लेकर किए गए कई ऐतिहासिक दावे विवादित हैं।

बलोच प्रतिज्ञा नवीनीकरण दिवस पर सभा, राजनीतिक प्रयास जारी रखने का आह्वान

सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'X' पर, BNM ने बताया कि यह कार्यक्रम "बलोच प्रतिज्ञा नवीनीकरण दिवस" ​​(Baloch Pledge Renewal Day) के मौके पर आयोजित किया गया था और इसमें तलार नाज़, मिराक, ज़ुबैर और मसूद ने भाषण दिए। BNM के अनुसार, वक्ताओं ने 11 अगस्त को बलोच इतिहास में एक महत्वपूर्ण तारीख बताया और अन्याय और विदेशी कब्ज़े के खिलाफ लगातार राजनीतिक और संगठनात्मक प्रयासों का आह्वान किया।

ब्रिटिश आक्रमण से लेकर 1948 के विलय तक का इतिहास चर्चा में

वक्ताओं ने 19वीं और 20वीं सदी में बलूचिस्तान से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने 1839 में कलात पर ब्रिटिश आक्रमण को याद किया और कलात के खान मीर मेहराब खान और अन्य लोगों की तारीफ़ की जिन्होंने ब्रिटिश सेनाओं का विरोध किया था। वक्ताओं के अनुसार, मार्च 1948 में पाकिस्तान द्वारा इस क्षेत्र को अपने में मिलाने से पहले, बलूचिस्तान ने 11 अगस्त, 1947 को आज़ादी हासिल की थी। उन्होंने बाद के दशकों को संघर्ष, लोगों के गायब होने, हत्याओं और सैन्य अभियानों के दौर के रूप में वर्णित किया और कहा कि बलोच राष्ट्रीय आंदोलन आज़ादी की मांग करता रहा है।

संभावित आज़ाद बलूचिस्तान के विकास मॉडल पर चर्चा

सभा में संभावित आज़ाद बलूचिस्तान के भविष्य पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। वक्ताओं ने तर्क दिया कि राजनीतिक आकांक्षाओं को शिक्षा, संस्थागत विकास, सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय जुड़ाव में निवेश का समर्थन मिलना चाहिए। इस दावे को खारिज करते हुए कि एक आज़ाद बलूचिस्तान को विकास करने में संघर्ष करना पड़ेगा, वक्ताओं ने क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति, विशाल तटरेखा, प्राकृतिक संसाधनों और सांस्कृतिक विरासत को आर्थिक विकास और राज्य के विकास के संभावित आधार के रूप में बताया।

आंदोलन को पिछली कमियों से सीखने और संगठन मजबूत करने पर जोर

BNM ने कहा कि आंदोलन को पिछली कमियों से भी सीखना चाहिए और समकालीन राजनीतिक और सामाजिक वास्तविकताओं के अनुसार खुद को संगठित करना चाहिए। वक्ताओं ने ज़ोर दिया कि अपने राजनीतिक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर तैयारी और बलिदान की आवश्यकता होगी।

बलूचिस्तान के इतिहास और राजनीतिक दावों पर विवाद जारी

ये बयान बलोच नेशनल मूवमेंट और उसके समर्थकों के रुख को दर्शाते हैं। बलूचिस्तान से जुड़े ऐतिहासिक और राजनीतिक दावे अभी भी विवादित हैं, खासकर 1947 और 1948 की घटनाओं और क्षेत्र की स्थिति के संबंध में। यह बैठक बलूचिस्तान के भविष्य को लेकर जारी तनाव और राजनीतिक टकराव के बीच हो रही है।

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