अमेरिका जैसे देश को भले ही अपेक्षित संख्या में युद

युद्धपोतों के निर्माण में छलांग लगा रहा चीन, सबसे बड़ा विमानवाही पोत बनाने की तैयारी

फाइल फोटो

हॉन्गकॉन्ग। अमेरिका जैसे देश को भले ही अपेक्षित संख्या में युद्धपोतों और पनडुब्बियों की डिजाइन तैयार और उन्हें बनाने के लिए जूझना पड़ रहा हो या बजट का अभाव हो लेकिन चीन के साथ ऐसी समस्या नहीं है। पिछला साल उसके लिए काफी उर्वर रहा। उसने अपनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवल (पीएलएएन) की जरूरतें पूरी की हैं।

पिछले साल बनाया 18 युद्धपोत, एक विमानवाही पोत भी

अनुमान है कि पिछले साल पीएलएएन ने 18 नौसैनिक जहाजों का निर्माण किया। हालांकि गोपनीयता के कारणों की वजह से ठीक-ठीक संख्या के बारे में पता नहीं चल पाता, खासकर पनडुब्बियां बनाने के मामलों में। चीन का सबसे बड़ा विमानवाहक युद्धपोत 'फुजियन' नौसैनिक बेड़े में शामिल हो गया। परंपरागत तरीके से संचालित यह विमान वाहक पोत में इलेक्ट्रो मैगनेटिक विमान लॉन्च करने की व्यवस्था से लैस है। इस प्रकार का यह पहला चीनी युद्धपोत है। चीन के पहले दो  विमानवाही युद्धपोत स्काई जंप रैम्प सिस्टम वाले हैं।

नवंबर 2025 में सेवा में शामिल हुआ था नवीनतम एयरक्राफ्ट कैरियर 'फुजियान'

एक अन्य समाचार के अनुसार, चीन का नवीनतम एयरक्राफ्ट कैरियर 'फुजियान' नवंबर 2025 में सेवा में शामिल हुआ और इसे बीजिंग की बढ़ती समुद्री ताकत का प्रतीक माना गया। 80000 टन वजनी यह जहाज चीन का पहला स्वदेशी डिजाइन वाला विमानवाहक पोत है, जिसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट लगाए गए हैं। इसे दुनिया का सबसे बड़ा पारंपरिक ईंधन से संचालित युद्धपोत भी बताया गया। लेकिन, हालिया तकनीकी आकलनों में 'फुजियान' एयरक्राफ्ट कैरियर के डिजाइन से जुड़ी गंभीर कमियां सामने आई हैं, जो अब चीन को कहीं बड़े, न्‍यूक्लियर एनर्जी पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर विकसित करने की दिशा में प्रेरित कर रही है। रिपोर्ट की मानें तो चीन अब अमेरिका की USS गेराल्‍ड आर फोर्ड से कहीं बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर डेवलप करने में जुटा है।

फ्लाइट डेक लेआउट से जुड़ी है फुजियान की सबसे बड़ी समस्या

सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, फुजियान की सबसे बड़ी समस्या इसके फ्लाइट डेक लेआउट से जुड़ी है। अमेरिकी सुपरकैरियर्स की तुलना में इसका ‘आइलैंड सुपरस्टक्चर’ डेक के बीचोंबीच स्थित है, जबकि अमेरिकी जहाजों में यह पीछे की ओर होता है. इससे विमानों की आवाजाही और पार्किंग के लिए उपलब्ध जगह कम हो जाती है और तेज गति से फ्लाइट ऑपरेशन के दौरान बाधाएं पैदा होती हैं। ऐसे में फाइटर जेट को उड़ान भरने में दिक्‍कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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