तीस्ता नदी परियोजना पर चीन का बड़ा बयान, कहा-'बांग्लादेश के साथ हमारा सहयोग किसी तीसरे पक्ष के खिलाफ नहीं'
बीजिंग: चीन ने बांग्लादेश के साथ तीस्ता नदी परियोजना पर आगे बढ़ते हुए भारत की चिंताओं के बीच एक बड़ा बयान दिया है। चीन ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि बांग्लादेश के साथ उसका सहयोग किसी तीसरे पक्ष को 'लक्ष्य' नहीं बनाता है और न ही इसे किसी बाहरी प्रभाव से प्रभावित होना चाहिए। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि बीजिंग बांग्लादेश की तीस्ता नदी की पुनर्वास परियोजना का समर्थन करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने इसे बांग्लादेश की एक महत्वपूर्ण 'आजीविका पहल' बताया।
चीन ने भू-राजनीतिक चिंताओं को किया खारिज
प्रवक्ता गुओ ने भू-राजनीतिक चिंताओं को खारिज करते हुए कहा, "चीन-बांग्लादेश सहयोग किसी तीसरे पक्ष को निशाना नहीं बनाता और इसे तीसरे पक्ष के प्रभाव से मुक्त होना चाहिए। चीन बांग्लादेश के साथ विकास रणनीतियों में अधिक तालमेल बनाने और जल संरक्षण, अर्थव्यवस्था और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार है।"
भारत का रुख और तीस्ता विवाद की पृष्ठभूमि
यह घटनाक्रम उन खबरों के बाद आया है, जिनमें दावा किया गया था कि चीन और बांग्लादेश तीस्ता नदी परियोजना पर एक समझौते पर पहुंच गए हैं। चूंकि, तीस्ता नदी भारत और बांग्लादेश दोनों से होकर बहती है, इसलिए नदी प्रबंधन में चीन की एंट्री भारत के लिए रणनीतिक और सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय रही है। पिछले महीने भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मुद्दे पर भारत का रुख साफ किया था। उन्होंने कहा था कि भारत और बांग्लादेश 54 नदियां साझा करते हैं और जल संबंधी मुद्दों पर चर्चा के लिए दोनों देशों के बीच 'सुनियोजित द्विपक्षीय तंत्र' मौजूद है, जो नियमित अंतराल पर काम करता है।
क्या है तीस्ता जल विवाद?
1983 में हुआ समझौता: साल 1983 में एक अस्थायी समझौता हुआ था, जिसमें बांग्लादेश को 36% और भारत को 39% जल आवंटित किया गया था, जबकि 25% का फैसला बाद में होना था। हालांकि, यह कभी पूरी तरह लागू नहीं हो सका।
2011 में भी प्रयास: तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बांग्लादेश यात्रा के दौरान एक समझौते का प्रस्ताव था, जिसके तहत बांग्लादेश को 37.5% और भारत को 42.5% पानी मिलना था। लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार के कड़े विरोध (कृषि हितों का हवाला देकर) के कारण यह समझौता लटक गया।
क्या है वर्तमान स्थिति: बांग्लादेश तीस्ता के पानी में उचित हिस्सेदारी की मांग करता रहा है, लेकिन भारत के भीतर आंतरिक राजनीतिक सहमति (विशेषकर पश्चिम बंगाल के विरोध) न बनने के कारण यह लंबित है। इसी बीच बांग्लादेश ने इस परियोजना के विकास के लिए चीन से बातचीत शुरू की है।