संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में उठा अफगानिस्तान पर बमबारी का मुद्दा, जताई गई गहरी चिंता
जिनेवा (स्विट्जरलैंड)। जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र के दौरान, कार्यकर्ताओं और समुदाय के प्रतिनिधियों ने अफगानिस्तान में पाकिस्तान द्वारा नागरिकों पर कथित बमबारी को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे कदम अस्थिरता को और गहरा कर सकते हैं। पहले से ही नाजुक इस क्षेत्र पर और अधिक दबाव डाल सकते हैं।
कार्यकर्ता मरियम मेहरज़ाद ने की शांति और एकता की अपील
इस कार्यक्रम में बोलते हुए, एक अफगान राजनीतिक कार्यकर्ता, मरियम मेहरज़ाद ने मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई आम लोग भी यही मानते हैं कि ऐसे कदम गलत हैं। उन्होंने दोनों देशों के लोगों के बीच साझा सांस्कृतिक और धार्मिक बंधनों पर ज़ोर दिया। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे समय में जब आध्यात्मिक महत्व सर्वोपरि है और करुणा तथा एकता सबसे ज़रूरी है, इस तरह की घटनाएँ विशेष रूप से परेशान करने वाली हैं। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। यह स्थिति उसकी मुश्किलों को और बढ़ा देती है।

पश्तून नेता अफरीदी ने मानवाधिकार उल्लंघनों पर उठाए सवाल
इस बीच, प्रमुख पश्तून कार्यकर्ता फजलुर रहमान अफरीदी ने बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने अफगानिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा कथित हमलों की भी निंदा की, जिनके परिणामस्वरूप कथित तौर पर नागरिकों की जान गई। अफरीदी ने कहा कि इस सम्मेलन में विभिन्न पृष्ठभूमि के प्रतिभागी एक साथ आए- जिनमें ईरानी, कश्मीरी, सिंधी और बलूच शामिल थे- ताकि लड़कियों की शिक्षा जैसे प्रमुख मुद्दों को उजागर किया जा सके।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप और जवाबदेही की मांग
उन्होंने आगे कहा कि चर्चाओं का मुख्य केंद्र बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति भी रही। इसमें खैबर पख्तूनख्वा में नागरिकों पर सेना की कथित सख्ती (क्रैकडाउन) के आरोप और अफगानिस्तान में अस्पतालों पर कथित हमले शामिल थे। इन्हें अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया गया। जैसे-जैसे चिंताएँ बढ़ रही हैं, प्रतिभागियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले का संज्ञान लेने का आग्रह किया। उन्होंने जवाबदेही, संयम और नागरिकों की सुरक्षा तथा मानवाधिकारों को बनाए रखने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
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