America : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वा

डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ से भारतीय गारमेंट निर्यातक संकट में..

डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ से भारतीय गारमेंट निर्यातक संकट में..

America : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारतीय वस्त्रों पर 50% से अधिक का भारी टैरिफ (शुल्क) लगाने से भारतीय निर्यातक गंभीर संकट में हैं। टैरिफ से गारमेंट्स पर कुल शुल्क 60% से ऊपर पहुँच गया है। इस वजह से भारतीय उत्पाद अमेरिका में मंहगे हो गये हैं और भारतीय निर्यातकों के आर्डर रद्द हो रहे हैं। भारतीय निर्यातकों ने केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन से आगामी बजट में टैक्स इंसेंटिव, इंपोर्ट ड्यूटी और इनवर्टेड कस्टम ड्यूटी को तर्कसंगत बनाने व वैश्विक बाजारों में मार्केटिंग के लिए वित्तीय मदद की मांग की है।

 "Marc Local" की रिपोर्ट के अनुसार डोनाल्ड ट्रम्प के टैरिफ से अमेरिकी खरीदारों ने ऑर्डर घटा दिए हैं। अमेरिकी खरीदारों ने या तो ऑर्डर कम कर दिए हैं या वे भारतीय निर्यातकों से कीमत में बड़ी छूट की मांग कर रहे हैं। इसका असर तिरुपुर, नोएडा और सूरत जैसे कपड़ा हब पड़ रहा है, जहाँ से भारी मात्रा में कपड़े अमेरिका निर्यात किए जाते हैं। इन सेंटरो पर उत्पादन धीमा होने से लाखों कर्मचारियों, विशेषकर महिला और प्रवासी श्रमिकों की नौकरियां खतरे में हैं।

"अपारल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल" द्वारा नई दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित गारमेंट मेले के दौरान विक्रेताओं और खरीदारों की समस्याओं पर पिछले दिनों चर्चा की गई थी। मेले में हिस्सा लेने आए निर्यातक अभिषेक सुराना ने बताया कि गत सितंबर के बाद अमेरिका से मिलने वाले गारमेंट के नए आर्डर रोक दिए गए हैं। सुराना महिलाओं के कपड़ों का निर्यात करते हैं। उन्हें यूरोप, अफ्रीका व मैक्सिको जैसे देशों से ही आर्डर मिल रहे हैं। इसी प्रकार यूरोप व अमेरिका में मेन्स वियर का निर्यात करने वाली कंपनी एचडब्ल्यू अपैरल के मुताबिक अमेरिका के छोटे खरीदारों ने भारी टैरिफ के कारण माल खरीदना बंद कर दिया है। अमेरिका निर्यात होने वाले मेन्स वियर पर पहले 17 प्रतिशत शुल्क लगता था जो अब 67 प्रतिशत हो गया है।

घरेलू और निर्यात दोनों क्षेत्रों में कारोबार करने वाले लुधियाना स्थित "भंडारी होजरी एक्सपोर्ट" हाउस के निदेशक अमृत मान कहते हैं कि निश्चित रूप से अमेरिकी शुल्क से हमारे निर्यात पर फर्क दिख रहा है। हालांकि अन्य देशों के आर्डर पहले की तरह है। यूरोपीय यूनियन (ईयू) के साथ मुक्त व्यापार समझौता होने पर उन्हें यूरोप से मिलने वाले निर्यात आर्डर में बढ़ोतरी की उम्मीद है। कुछ ऐसे ही विचार "एचडब्ल्यू अपैरल" के प्रमोटरों ने भी व्यक्त किये। "एचडब्ल्यू अपैरल" की दक्षिण भारत में 30 मैन्यूफैक्चरिंग यूनिटें हैं जहां सैकड़ों लोग काम करते हैं।

निर्यातकों ने इस संकट को देखते हुए केन्द्रीय वित्त मंत्री से आगामी बजट में टैक्स इंसेंटिव, इंपोर्ट ड्यूटी और इनवर्टेड कस्टम ड्यूटी को तर्कसंगत बनाने व वैश्विक बाजारों में मार्केटिंग के लिए वित्तीय मदद की मांग की है। निर्यातकों ने सुझाव दिया है कि बजट में इनवर्टेड कस्टम ड्यूटी का समाधान किया जाए। इनवर्टेड कस्टम ड्यूटी में तैयार उत्पादों के मुकाबले कच्चे माल, कंपोनेंट या इंटरमीडिएट्स पर अधिक इंपोर्ट ड्यूटी रहती है। कच्चे माल की कीमतों में इस अंतर के कारण घरेलू मैन्युफैक्चरिंग पर निगेटिव असर पड़ता है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगी। भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (FIEO) ने ज्यादातर माल विदेश में बेचने वाली इंडस्ट्रीज द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले कच्चे माल पर इंपोर्ट ड्यूटी को तर्कसंगत बनाने की सिफारिश की है। निर्यातकों ने सुझाव दिया है कि बजट में 'इनवर्टड कस्टम ड्यूटी' का तत्काल समाधान किया जाना चाहिए। इनवर्टेड कस्टम ड्यूटी में तैयार उत्पादों के मुकाबले कच्चे माल, कंपोनेंट या इंटरमीडिएट्स पर अधिक इंपोर्ट ड्यूटी रहती है। यह घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को प्रभावित करती है।

निर्यातकों ने बताया कि वस्त्र निर्माण के प्रमुख कच्चा माल सिंथेटिक धागे और फाइबर पर तैयार कपड़ों की तुलना में अधिक इंपोर्ट ड्यूटी लगती है। इससे कपड़ा उद्योग प्रभावित हो रहा है। इसी तरह इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स जैसे कि प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, कनेक्टर और सब असेंबलीज पर इंपोर्टेड यानि कि आयातित तैयार इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स से ज्यादा इंपोर्ट ड्यूटी है। केमिकल प्लास्टिक सेक्टर में भी बेसिक कच्चे माल पर तैयार माल से ज्यादा टैक्स है। लेदर और फुटवियर क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल पर भी हाई ड्यूटी के कारण भारतीय उत्पादकों भारी को नुकसान हो रहा है।

अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (एईपीसी) ने बजट में वित्तीय प्रोत्साहन और कर्ज पर ब्याज सब्सिडी बढ़ाने की मांग की है, ताकि कपडा क्षेत्र अमेरिकी टैरिफ के झटके से उबर सके। एईपीसी के चेयरमैन शक्तिवेल ने टेक्सटाइल मशीनरी पर जीएसटी दरों में कटौती और माइक्रो यूनिट्स के लिए एक नई टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन स्कीम का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि भारतीय परिधान क्षेत्र चुनौतीपूर्ण माहौल का सामना करना पड़ रहा है।

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