पेशावर में महंगाई का तांडव, पेट्रोल और आटे की कीमतों ने तोड़ी जनता की कमर
पेशावर (पाकिस्तान)। पेट्रोलियम की कीमतों में भारी वृद्धि ने पेशावर और खैबर पख्तूनख्वा के अन्य हिस्सों में आर्थिक संकट की एक नई लहर पैदा कर दी है। यहां दर्जनों परिवहन ऑपरेटरों ने ईद से पहले बढ़ते परिवहन किराए और आटे की बढ़ती कीमतों के विरोध में पेशावर के हाजी कैंप टर्मिनल पर विरोध प्रदर्शन किया। एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक आम नागरिक असहनीय मुद्रास्फीति और आर्थिक उपेक्षा से जूझ रहे हैं, जैसा कि कई लोग बताते हैं। एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक आम नागरिक असहनीय मुद्रास्फीति और आर्थिक उपेक्षा से जूझ रहे हैं जिससे उनके लिए गुजारा करना मुश्किल हो गया है।
जनता पर बढ़ता बोझ, ईद से पहले राहत की मांग
रिपोर्ट के मुताबिक परिवहन संचालकों ने पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों की निंदा की। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए और तत्काल राहत की मांग करते हुए चेतावनी दी कि अनियंत्रित ईंधन की कीमतों में वृद्धि से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था चरमरा रही है। कम आय वाले परिवार हताशा की ओर धकेले जा रहे हैं। परिवहन नेता जुबैर अहमद कुरैशी ने विरोध प्रदर्शन के दौरान कहा कि महंगाई उस स्तर पर पहुंच गई है जहां बुनियादी जीवनयापन भी मुश्किल हो रहा है। उन्होंने सीएनजी की कमी और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के दोहरे बोझ की आलोचना करते हुए कहा कि बेरोजगारी और महंगाई ने पहले ही गरीब परिवारों को तबाह कर दिया है। उन्होंने तर्क दिया कि ईद नजदीक आने के साथ कई परिवार अब खरीदारी करने या यहां तक कि आवश्यक खाद्य पदार्थों का खर्च भी वहन नहीं कर सकते।
बस किराए में भारी बढ़ोतरी, लंबी दूरी यात्रा महंगी
ईंधन की कीमतों में हालिया समायोजन के बाद, परिवहन किरायों में एक महीने के भीतर पांचवीं बार संशोधन किया गया है। नॉन-एसी बसों के किरायों में लगभग पांच प्रतिशत की वृद्धि हुई है। जबकि एसी बसों के किरायों में और भी अधिक बढ़ोतरी देखी गई है। पेशावर को नौशेरा, मरदान, एबटाबाद, हरिपुर, स्वात और मलकंद जैसे शहरों से जोड़ने वाले मार्गों पर किरायों में 50 रुपये से लेकर 500 रुपये तक की वृद्धि हुई है। एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार रावलपिंडी और लाहौर जाने वाले लंबी दूरी के यात्रियों को कथित तौर पर पहले से 3000 रुपये तक अधिक भुगतान करना पड़ रहा है।
आटे की कीमतें आसमान पर, रोटियों का आकार भी घटा
ईंधन की बढ़ती कीमतों से आटे की कीमतों पर भी गंभीर असर पड़ा है। 80 किलोग्राम आटे के बोरे की कीमत में करीब 1,000 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जबकि प्रीमियम किस्मों का आटा 11,000 रुपये तक पहुंच गया है। छोटे बोरे भी काफी महंगे हो गए हैं। वहीं उपभोक्ता शिकायत कर रहे हैं कि स्थानीय तंदूर रोटियों का आकार छोटा कर रहे हैं और अधिक दाम वसूल रहे हैं। एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, निवासी इस बिगड़ते संकट के लिए सरकारी नीतियों, पंजाब से आटे की आवाजाही पर प्रतिबंध और अनियंत्रित महंगाई को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं और चेतावनी दे रहे हैं कि सबसे गरीब नागरिक आर्थिक पतन की ओर धकेले जा रहे हैं। (एएनआई)
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