बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी के नए आरोपों के बाद प

बलूचिस्तान में तीन लोगों के कथित जबरन लापता होने का मामला, पाकिस्तान पर फिर उठे मानवाधिकारों के सवाल

Pakistan Faces Rights Questions Again

बलूचिस्तान (पाकिस्तान): बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी के नए आरोपों के बाद पाकिस्तान एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। बलूचिस्तान प्रांत के मस्तुंग और पंजगुर जिलों से तीन लोगों को कथित तौर पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद मानवाधिकारों को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं। यह जानकारी बलूचिस्तान पोस्ट की एक रिपोर्ट में सामने आई है।

मस्तुंग से युवक को घर से ले जाने का आरोप

बलूचिस्तान पोस्ट के मुताबिक, लापता व्यक्तियों में दिलमुराद के बेटे ज़करिया भी शामिल हैं। आरोप है कि 21 मार्च की रात करीब दो बजे मस्तुंग के किल्ली करेज़ सर स्थित उनके घर पर छापेमारी के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बल उन्हें हिरासत में लेकर चले गए। परिवार का कहना है कि तब से उन्हें ज़करिया के ठिकाने या कानूनी स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।

पंजगुर में दो और लोगों के लापता होने का दावा

एक अन्य मामले में, पंजगुर जिले के पारूम निवासी रसूल जान के बेटे सिद्दीक को कुछ दिन पहले एक सैन्य शिविर में बुलाया गया था। परिवार का आरोप है कि शिविर पहुंचने के बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया और तब से वे घर नहीं लौटे हैं। उनके संबंध में अब तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। वहीं, अब्दुल रशीद के बेटे आदिल को भी कथित तौर पर पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों ने पंजगुर के पारोम के लिगोर्क इलाके से हिरासत में लिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसके बाद से उनका भी कोई पता नहीं चल पाया है।

परिजनों ने कानूनी प्रक्रिया अपनाने की मांग की

तीनों लापता व्यक्तियों के परिवारों ने अधिकारियों से उनके ठिकाने का तुरंत खुलासा करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि उनके खिलाफ कोई आरोप हैं, तो उन्हें अदालत में पेश किया जाए और कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाए। अन्यथा उन्हें बिना किसी देरी के रिहा किया जाए।

मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता

बलूचिस्तान पोस्ट के अनुसार, लापता लोगों के परिवारों, मानवाधिकार संगठनों और विभिन्न राजनीतिक समूहों ने लंबे समय से जबरन गुमशुदगी के मामलों पर चिंता जताई है। इन समूहों का आरोप है कि लोगों को हिरासत में लेने के बाद लंबे समय तक उनके बारे में कोई जानकारी नहीं दी जाती, जिससे मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लगातार बढ़ रहे हैं।

ANI

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