रूस-यूक्रेन शांति वार्ता में EU का बड़ा बयान: काजा कलास बोलीं— 'बिना फायदे के कुछ नहीं देगा यूरोप'
विलनियस (लिथुआनिया)। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध खत्म कराने की नई कूटनीतिक कोशिशों के बीच यूरोपीय संघ (EU) ने अपनी स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास (Kaja Kallas) ने दो-टूक कहा है कि भविष्य में बनने वाले किसी भी शांति तंत्र में अगर यूरोपीय साझेदारों से बड़े योगदान और प्रतिबद्धताओं की मांग की जाती है, तो उसके बदले यूरोप को भी स्पष्ट व ठोस लाभ मिलने अनिवार्य होंगे।
लिथुआनिया दौरे पर अमेरिका की कूटनीति पर टिप्पणी
"काजा कलास ने यह अहम बयान सोमवार को लिथुआनिया के प्रधानमंत्री मिंडाउगास सिंकियाविशियस (Mindaugas Sinkevicius) के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अपने आधिकारिक दौरे पर दिया। कलास का यह बयान अमेरिकी वार्ताकारों—स्टीव विटकॉफ (Steve Witkoff) और जेरेड कुश्नर (Jared Kushner) के उस उच्चस्तरीय कूटनीतिक मिशन के ठीक बाद आया है, जिसके तहत उन्होंने सप्ताहांत में मॉस्को और कीव का दौरा कर ठप पड़ी शांति प्रक्रिया को गति देने का प्रयास किया था।
'हम मध्यस्थ नहीं, यूक्रेन के समर्थक हैं'
लिथुआनिया के प्रधानमंत्री मिंडाउगास सिंकियाविशियस (Mindaugas Sinkevicius) के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब कलास से अमेरिकी वार्ताओं और यूरोपीय संघ को अलग रखकर संभावित त्रिपक्षीय बैठक पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि मॉस्को और कीव के बीच सीधी बातचीत ही सबसे अहम है। उन्होंने रुख साफ करते हुए कहा, "यूरोपीय पक्ष से यह स्पष्ट है कि हम रूस और यूक्रेन के बीच मध्यस्थ नहीं बन सकते। उन्हें आपस में बात करने की आवश्यकता है। हम हमेशा यूक्रेन के पक्ष में रहे हैं, इसलिए इस स्थिति में हम तटस्थ नहीं हैं।"
शांति समझौते के बदले यूरोप की मांगें
विदेश नीति प्रमुख ने रेखांकित किया कि भविष्य के किसी भी संभावित समझौते में "यूरोप से बहुत सी मांगें" शामिल होंगी। हालांकि, उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में स्पष्ट किया कि "ये ऐसी चीजें नहीं हैं जो यूरोप को बिना कुछ बदले में पाए दे देनी चाहिए।" यानी यूरोप किसी भी शर्त को तब तक स्वीकार नहीं करेगा जब तक उसके अपने सुरक्षा और रणनीतिक हितों की गारंटी न दी जाए।
यूरोपीय संघ की परिषद और सुरक्षा प्राथमिकताओं पर मंथन
सोमवार को ही कलास ने लिथुआनिया के राष्ट्रपति गितानास नौसेदा (Gitanas Nauseda) से भी रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा की। यह बैठक यूरोपीय संघ की परिषद (Council of the European Union) की आगामी लिथुआनियाई अध्यक्षता के एजेंडे को लेकर थी। राष्ट्रपति नौसेदा ने बताया कि उनकी अध्यक्षता के दौरान महाद्वीपीय सुरक्षा व रक्षा, यूरोपीय एकीकरण, बाजार प्रतिस्पर्धात्मकता, आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक मजबूती मुख्य प्राथमिकताएं होंगी।
क्रेमलिन से कीव तक अमेरिकी दूतों की दौड़भाग
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रतिनिधियों ने समानांतर स्तर पर बातचीत तेज कर दी है। शनिवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने क्रेमलिन में अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर से मुलाकात की, जहां तीन घंटे से अधिक समय तक गहन चर्चा हुई। इसके तुरंत बाद, रविवार को अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने कीव पहुंचकर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात की।
अबू धाबी और जिनेवा वार्ताओं का बैकग्राउंड
इससे पहले भी संघर्ष सुलझाने के प्रयास किए गए थे। यूक्रेन, अमेरिका और रूस के प्रतिनिधिमंडलों ने अबू धाबी में 23-24 जनवरी और 4-5 फरवरी को दो दौर की बातचीत की थी, जिसके बाद 17-18 फरवरी को जिनेवा में तीसरे दौर की बैठक हुई थी। हालांकि, ये सभी त्रिपक्षीय वार्ताएं किसी नतीजे पर पहुंचे बिना बीच में ही अटक गईं और वर्तमान में निलंबित चल रही हैं। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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