यूरोपीय संसद ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय की

यूरोपीय संसद का बड़ा कदम: पाकिस्तान में जबरन धर्मांतरण और बाल विवाह के खिलाफ प्रस्ताव पारित

European Parliament Passes Resolution Against Forced Conversions and Child Marriages in Pakistan

ब्रुसेल्स (बेल्जियम)। यूरोपीय संसद ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय की कम उम्र की लड़कियों के अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और बाल विवाह की घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाया है। संसद ने गुरुवार को एक विशेष प्रस्ताव पारित कर इन अमानवीय प्रथाओं की कड़े शब्दों में निंदा की और पाकिस्तान सरकार से धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा मजबूत करने की मांग की।

मारिया शाहबाज का मामला बना मानवाधिकार उल्लंघन का प्रतीक

यूरोपीय संसद ने अपनी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में 13 वर्षीय ईसाई लड़की मारिया शाहबाज के मामले को प्रमुखता से उठाया। मारिया शाहबाज का अपहरण 29 जुलाई, 2025 को हुआ था। बाद में उसे जबरन इस्लाम में परिवर्तित कर उसके ही अपहरणकर्ता से शादी करा दी गई।

न्यायालय का रुख

आधिकारिक दस्तावेजों में मारिया के नाबालिग होने की पुष्टि के बावजूद, मार्च 2026 में वहां की अदालत ने इस शादी को वैध ठहरा दिया, जिसके बाद से वह आरोपी की हिरासत में है। यूरोपीय संसद के सदस्यों ने मारिया शाहबाज को तत्काल कानूनी प्रतिनिधित्व, उसके परिवार को सुरक्षा और मनोवैज्ञानिक सहायता देने की मांग की है।

पाकिस्तान में ईसाई और हिंदू लड़कियों के साथ होने वाले व्यवस्थित उत्पीड़न का हिस्सा

'ह्यूमन राइट्स फोकस पाकिस्तान' (HRFP) ने भी इस पर गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि मारिया का मामला कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान में ईसाई और हिंदू लड़कियों के साथ होने वाले व्यवस्थित उत्पीड़न का हिस्सा है।

संयुक्त राष्ट्र (UN) के चौंकाने वाले आंकड़े

प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र (UN) के साल 2025 के डेटा का हवाला देते हुए पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की बदहाली को रेखांकित किया गया। 75% हिंदू समुदाय और 25% ईसाई समुदाय की महिलाएं एवं लड़कियां जबरन धर्म परिवर्तन की शिकार हुई।

यूरोपीय संसद की प्रमुख मांगें

राष्ट्रीय तंत्र का गठन: अल्पसंख्यक लड़कियों के अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन की शिकायतों के त्वरित निपटारे के लिए एक प्रभावी "राष्ट्रीय तंत्र"  बनाया जाए।

बाल विवाह कानून का सख्ती से पालन: देश के कुछ प्रांतों में बाल विवाह के खिलाफ जो कानून पहले से मौजूद हैं, उन्हें पूरे पाकिस्तान में पूरी तरह से लागू किया जाए।

पारदर्शी जांच और सख्त सजा: नाबालिगों से जुड़े ऐसे सभी मामलों की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच हो, अपराधियों पर मुकदमा चलाया जाए और न्यायिक ढांचे को मजबूत कर पीड़ित लड़कियों की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित की जाए। (एएनआई)

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