FATF की बड़ी चेतावनी: सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म बन रहे हैं आतंकियों की फंडिंग का नया हथियार
पेरिस (फ्रांस)। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने चेतावनी दी है कि आतंकवादी समूह अपनी गतिविधियों के लिए फंड जुटाने के लिए सोशल मीडिया, इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं। FATF ने डिजिटल टेक्नोलॉजी से पैदा हो रहे नए खतरों की ओर इशारा करते हुए इस खतरे से निपटने के लिए मज़बूत वैश्विक सहयोग का आह्वान किया है।
क्राउडफंडिंग और क्रिएटर-इकोनॉमी के ज़रिए आतंकवाद को पैसा
शुक्रवार को जारी एक प्रेस रिलीज़ में, मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फ़ाइनेंसिंग (आतंकवाद के लिए फ़ंडिंग) पर नज़र रखने वाली ग्लोबल संस्था ने एक नई रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे आतंकवादी सोशल मीडिया, इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप्स और स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म (SMSP) का इस्तेमाल न सिर्फ़ प्रोपेगैंडा और फ़ंड जुटाने के लिए कर रहे हैं, बल्कि धोखाधड़ी वाले मानवीय क्राउडफ़ंडिंग कैंपेन, क्रिएटर-इकोनॉमी फ़ीचर्स, वर्चुअल एसेट के ज़रिए फ़ंड जुटाने और दूसरी जटिल वित्तीय गतिविधियों के लिए भी कर रहे हैं।
साधारण मैसेजिंग ऐप्स अब बने जटिल पेमेंट सिस्टम
FATF के मुताबिक पिछले दशक में SMSP (सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म) साधारण कम्युनिकेशन टूल से बदलकर जटिल डिजिटल इकोसिस्टम बन गए हैं। ये प्लेटफ़ॉर्म इंटीग्रेटेड पेमेंट सिस्टम, वर्चुअल एसेट, क्रिएटर मॉनेटाइज़ेशन और क्रॉस-बॉर्डर फाइनेंशियल सर्विस जैसी सुविधाएँ देते हैं। इससे टेररिस्ट फाइनेंसिंग (आतंकवादी गतिविधियों के लिए फंडिंग) के नए मौके बन रहे हैं।
लाइव स्ट्रीमिंग, QR कोड और वर्चुअल एसेट्स का बढ़ता दुरुपयोग
आतंकवादी फंडिंग के जोखिमों पर 2025 के व्यापक अपडेट को आधार बनाते हुए, 'सोशल मीडिया, इंस्टेंट मैसेजिंग एप्लिकेशन और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म (SMSPs) के ज़रिए आतंकवादी फंडिंग गतिविधियों का पता लगाना और उन्हें रोकना' शीर्षक वाली यह रिपोर्ट कई उभरते हुए तरीकों (टाइपोलॉजी) के बारे में बताती है। इनमें लाइव-स्ट्रीमिंग और टिपिंग सुविधाओं का गलत इस्तेमाल, रोटेटिंग वॉलेट और QR कोड का इस्तेमाल करके वर्चुअल एसेट्स के ज़रिए फंड जुटाना, पकड़े जाने से बचने के लिए कोड वाली भाषा और गायब हो जाने वाले कंटेंट का इस्तेमाल और आतंकवादी फंडिंग गतिविधियों को छिपाने के लिए कमर्शियल संस्थाओं का गलत इस्तेमाल शामिल है।
AI और DeFi ने बढ़ाई जांच एजेंसियों की चुनौती
FATF ने कहा है कि AI-आधारित कंटेंट, एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन, डिसेंट्रलाइज़्ड फ़ाइनेंस (DeFi), वर्चुअल एसेट्स और एम्बेडेड पेमेंट टूल्स के बढ़ते इस्तेमाल ने टेररिस्ट फ़ाइनेंसिंग के तरीकों को और ज़्यादा जटिल बना दिया है। इसके लिए सरकारों, फ़ाइनेंशियल संस्थानों और टेक्नोलॉजी कंपनियों के बीच बेहतर सहयोग की ज़रूरत है। रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि दुनिया के 30% से भी कम देश अपने राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले जोखिमों की जांच (National Risk Assessment) में इस बात पर ध्यान देते हैं कि सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप्स (जैसे वॉट्सऐप, टेलीग्राम) और लाइव स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल आतंकवाद की फंडिंग (टेरर फाइनेंसिंग) के लिए तो नहीं किया जा रहा है। इस कमी को देखते हुए अब सभी देशों के लिए यह बहुत ज़रूरी हो गया है कि वे इस बदलते हुए खतरे को गहराई से समझें और अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करें।
FATF प्रमुख ने वैश्विक सहयोग पर दिया जोर
FATF की प्रेसिडेंट एलिसा डी एंडा मद्राज़ो ने कहा कि टेररिस्ट फ़ाइनेंसिंग तेज़ी से डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर शिफ्ट हो गई है, जिससे चरमपंथी समूहों की ग्लोबल ऑडियंस तक पहुँचने की क्षमता काफ़ी बढ़ गई है। उन्होंने कहा, "आतंकवादियों को मिलने वाली फंडिंग अब डिजिटल हो गई है। इसके साथ ही, अरबों लोगों तक पहुँचने और हमलों के असर को कई गुना बढ़ाने की क्षमता पहले से कहीं ज़्यादा हो गई है। कोई भी एक देश या अथॉरिटी अकेले इस खतरे का सामना नहीं कर सकती, इसलिए हमें मिलकर काम करना होगा ताकि अपराधियों को दुनिया भर में नुकसान पहुँचाने के लिए इन प्लैटफ़ॉर्म का गलत इस्तेमाल करने से रोका जा सके।"
टेक कंपनियों के साथ मिलकर तैयार की गई नई रणनीति
FATF ने कहा है कि उसने इन कमज़ोरियों को बेहतर ढंग से समझने और देशों को इस दुरुपयोग से निपटने में मदद करने के लिए सुझाव तैयार करने को केलकर बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों और खास थिंक टैंक के साथ मिलकर काम किया है। अपनी सिफारिशों में, निगरानी संस्था ने मज़बूत पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप, बेहतर जानकारी साझा करने, अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल, मॉनेटाइज़ेशन फीचर्स की बेहतर समझ, मज़बूत रिस्क असेसमेंट और फाइनेंशियल व डिजिटल इंटेलिजेंस के बेहतर इंटीग्रेशन की मांग की।
ऐप्स पर होने वाली वित्तीय गतिविधियों पर रहेगी FATF की नजर
FATF ने कहा कि हालांकि सोशल मीडिया, मैसेजिंग और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म सीधे तौर पर उसके मनी लॉन्ड्रिंग रोकने और टेरर फंडिंग रोकने के नियमों के दायरे में नहीं आते हैं, लेकिन इन प्लेटफॉर्म के ज़रिए होने वाली कुछ फाइनेंशियल गतिविधियां पहले से ही FATF के मौजूदा नियमों के दायरे में आ सकती हैं। (Source: ANI)
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