पीट हेगसेथ के अनुसार, 2009 फोर्ट हूड हमले के दोषी

फोर्ट हूड हमले के दोषी को फायरिंग स्क्वाड से मिलेगी मौत की सजा: हेगसेथ

Fort Hood Attack Convict to Face Firing Squad

वॉशिंगटन: अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा है कि 2009 में टेक्सास के फोर्ट हूड सैन्य अड्डे पर हुई सामूहिक गोलीबारी में 13 लोगों की हत्या के दोषी पूर्व अमेरिकी सेना के मेजर निदाल मलिक हसन को फायरिंग स्क्वाड के जरिए मौत की सजा दी जाएगी। हेगसेथ के मुताबिक, जनता को भी इस प्रक्रिया को देखने का अवसर दिया जाएगा। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि आम लोग इसे किस माध्यम से देख सकेंगे।

3 दिसंबर को फोर्ट हूड में दी जाएगी सजा

‘रियल अमेरिकाज वॉयस’ को दिए एक साक्षात्कार में हेगसेथ ने इस फैसले को स्पष्ट बताया। उन्होंने कहा कि हसन को 3 दिसंबर, गुरुवार को दोपहर 1 बजे फोर्ट हूड में फायरिंग स्क्वाड के जरिए मौत की सजा दी जाएगी। यह वही समय है, जब 2009 में हमला हुआ था। हेगसेथ ने कहा कि सेना के एक मेजर ने अपने देश के साथ विश्वासघात किया और फोर्ट हूड में कई अमेरिकियों की जान ली। उन्होंने कहा कि सजा उसी सैन्य अड्डे पर दी जाएगी, जहां हमला हुआ था। हेगसेथ ने यह भी कहा कि फायरिंग स्क्वाड में शामिल सैनिक राइफलों से हसन को गोली मारेंगे। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया को सार्वजनिक करने का उद्देश्य लोगों को ऐसे हमलों के गंभीर परिणामों से अवगत कराना है।

सजा के प्रसारण को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं

‘एक्सियोस’ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में लगभग 90 वर्षों से कोई सार्वजनिक फांसी नहीं हुई है। ऐसे में हेगसेथ के बयान के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आम जनता को इस प्रक्रिया को देखने की अनुमति किस तरह दी जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन ने कहा है कि सजा का सीधा प्रसारण किया जाएगा, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि प्रसारण कहां उपलब्ध होगा। पेंटागन सोशल मीडिया मंच एक्स और यूट्यूब पर भाषण तथा वीडियो साझा करता है, लेकिन अभी यह तय नहीं है कि इन्हीं मंचों पर प्रसारण होगा या नहीं। ‘एक्सियोस’ के अनुसार, रक्षा विभाग ने हेगसेथ की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। यह भी स्पष्ट नहीं है कि जनता के लिए आयोजन स्थल पर प्रवेश उपलब्ध होगा, प्रसारण टीवी या ऑनलाइन होगा अथवा इसे केवल चुनिंदा लोगों को दिखाया जाएगा।

अमेरिका में सैन्य फांसी का दुर्लभ मामला

‘एक्सियोस’ की रिपोर्ट के अनुसार, यह 1961 के बाद अमेरिका में पहली सैन्य फांसी होगी। वहीं, एनपीआर के हवाले से बताया गया कि अमेरिकी सेना में फायरिंग स्क्वाड के जरिए आखिरी फांसी 1945 में हुई थी। उस समय प्राइवेट एडी स्लोविक को फ्रांस में भगोड़ा होने के आरोप में गोली मार दी गई थी। अमेरिका में फायरिंग स्क्वाड के जरिए मौत की सजा देना बेहद दुर्लभ है। ‘एक्सियोस’ के अनुसार, मृत्युदंड सूचना केंद्र के मुताबिक, इडाहो, मिसिसिपी, ओक्लाहोमा, दक्षिण कैरोलिना और यूटा में इस तरीके को अधिकृत किया गया है। पिछले साल दक्षिण कैरोलिना में फायरिंग स्क्वाड के जरिए सजा दी गई थी, जो 15 वर्षों में अमेरिका में इस तरह की पहली घटना थी। अमेरिका में आखिरी सार्वजनिक फांसी 1936 में हुई थी। ‘एक्सियोस’ की रिपोर्ट के अनुसार, उस समय केंटकी में रैनी बेथिया को फांसी दी गई थी, जिसे एक श्वेत महिला के साथ बलात्कार का दोषी ठहराया गया था।

ट्रंप ने दी थी मौत की सजा को मंजूरी

यह घटनाक्रम पेंटागन की उस घोषणा के बाद सामने आया है, जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हसन को फायरिंग स्क्वाड के जरिए मौत की सजा देने की मंजूरी दे दी है। पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बताया था कि हेगसेथ ने सजा की सिफारिश की थी और राष्ट्रपति ट्रंप ने उसे मंजूरी दी। पार्नेल ने कहा कि सेना के सचिव सजा का समय और स्थान तय करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि हसन के लिए न्याय का दिन आखिरकार आ गया है।

2009 के हमले में 13 लोगों की हुई थी मौत

अमेरिकी सेना के मेजर निदाल मलिक हसन को 5 नवंबर, 2009 को फोर्ट हूड में हुई गोलीबारी में 13 लोगों की हत्या और 30 से अधिक लोगों को घायल करने का दोषी ठहराया गया था। 2013 में सैन्य जूरी ने उसे मौत की सजा सुनाई थी। यह हमला टेक्सास स्थित विशाल सैन्य अड्डे के एक चिकित्सा भवन में हुआ था। फोर्ट हूड उन अमेरिकी सैनिकों के लिए प्रमुख केंद्र था, जो इराक और अफगानिस्तान में तैनाती की तैयारी कर रहे थे। हमले में मारे गए 13 लोगों में 12 सैनिक और एक नागरिक शामिल थे। इसके अलावा, 30 से अधिक लोग घायल हुए थे। गोलीबारी की सूचना मिलने पर पहुंचे नागरिक पुलिस अधिकारियों ने हसन को गोली मार दी थी, जिससे वह आंशिक रूप से लकवाग्रस्त हो गया।

मुकदमे में अल-कायदा से प्रेरित होने का आरोप

कोर्ट-मार्शल के दौरान हसन ने खुद अपना बचाव किया। उसने गवाह नहीं बुलाए, न ही गवाही दी और औपचारिक आरोपों का विरोध भी नहीं किया। उसके अदालत द्वारा नियुक्त बचाव पक्ष के वकील ने पहले चिंता जताई थी कि वह खुद अपने लिए मौत की सजा चाहता है। अभियोजकों ने तर्क दिया था कि हमला अल-कायदा से प्रेरित था। मुकदमे में पेश किए गए साक्ष्यों के अनुसार, हसन इराक और अफगानिस्तान में अमेरिकी सैन्य अभियानों का विरोध करता था। उसने अल-कायदा से जुड़े अमेरिकी मूल के कट्टरपंथी मौलवी अनवर अल-अवलाकी से ऑनलाइन बातचीत भी की थी। बाद में अल-अवलाकी यमन में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया था।

अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर पहले भी हुए हमले

अमेरिका में सामूहिक गोलीबारी की घटनाएं अक्सर होती हैं, लेकिन सैन्य ठिकानों पर हमले अपेक्षाकृत कम होते हैं। 2025 में जॉर्जिया स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर एक सैनिक ने गोलीबारी की थी, जिसमें पांच साथी सैनिक घायल हुए थे। बाद में आरोपी को काबू कर गिरफ्तार कर लिया गया। 2019 में अमेरिकी नौसेना के एक नाविक ने हवाई के सैन्य ठिकाने पर दो लोगों की हत्या कर दी और एक अन्य को घायल कर दिया था। उसी वर्ष फ्लोरिडा के एक अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर सऊदी अरब के एक सैन्य छात्र ने तीन लोगों की हत्या की थी। 2015 में कुवैत में जन्मे एक अमेरिकी नागरिक ने टेनेसी में दो सैन्य ठिकानों पर हमला किया था, जिसमें चार मरीन और एक नाविक की मौत हुई थी। एफबीआई ने बाद में कहा था कि यह हमला एक विदेशी आतंकवादी समूह से प्रेरित था। वहीं, 2013 में वाशिंगटन नेवी यार्ड में एक बंदूकधारी ने 12 लोगों की हत्या कर दी और आठ अन्य को घायल कर दिया था। बाद में पुलिस ने उसे गोली मारकर मार गिराया।

(एएनआई)

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