जेनेवा में तीन दिवसीय फोटो प्रदर्शनी में बांग्लादे

जेनेवा में फोटो प्रदर्शनी के जरिए बांग्लादेश और पाकिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों को उठाया गया

Geneva Photo Exhibition Highlights Rights Issues in Bangladesh, Pakistan

जेनेवा [स्विट्जरलैंड]: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र के साथ-साथ जेनेवा में बांग्लादेशी प्रवासी सदस्यों द्वारा आयोजित तीन दिवसीय फोटो प्रदर्शनी के दौरान बांग्लादेश और पाकिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाए गए। प्रतिष्ठित 'ब्रोकन चेयर' स्मारक के पास आयोजित इस प्रदर्शनी में लगभग 30 पोस्टर प्रदर्शित किए गए, जिनमें से आयोजकों का कहना है कि 15 पोस्टर बांग्लादेश और 15 पाकिस्तान पर केंद्रित थे। मानवाधिकार परिषद का 63वां सत्र 7 सितंबर से 7 अक्टूबर तक जेनेवा में चल रहा है।

पूर्व सांसद ने बांग्लादेश के हालात पर जताई चिंता

सभा को संबोधित करते हुए बांग्लादेश के पूर्व सांसद अबू सईद अल महमूद स्वपन ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनी का उद्देश्य बांग्लादेश में जारी मानवाधिकार उल्लंघनों की ओर अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करना था। स्वपन ने कहा, "हम अभी संयुक्त राष्ट्र के जेनेवा कार्यालय, 'ब्रोकन चेयर' स्मारक के सामने हैं। यहां हम बांग्लादेश और पाकिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों पर आधारित एक पोस्टर प्रदर्शनी का आयोजन कर रहे हैं।"

1971 के मुक्ति युद्ध का किया जिक्र

1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "हम उसे भूले नहीं हैं। आज भी पाकिस्तान बांग्लादेश में चरमपंथ को संरक्षण दे रहा है। वे अभी भी सक्रिय हैं और बांग्लादेश में चरमपंथियों को संरक्षण दे रहे हैं।" उन्होंने आगे आरोप लगाया कि बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता को लेकर गंभीर चुनौतियां हैं।

कानून के शासन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया

स्वपन ने कहा, "बांग्लादेश हत्याओं की घाटी बन गया है, मौत की घाटी।" उन्होंने आरोप लगाया कि हजारों लोग मारे गए हैं और अल्पसंख्यकों तथा बच्चों को भी भारी पीड़ा झेलनी पड़ी है। उन्होंने कहा, "बांग्लादेश में न तो कानून का शासन है, न अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, न ही संगठन बनाने का अधिकार है।" उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय "लोकतंत्र, कानून का शासन, बोलने की स्वतंत्रता, मानवाधिकार, बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा" और राजनीतिक अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करे। स्वपन ने "बांग्लादेश में स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनाव" की भी मांग की।

30 पोस्टरों के जरिए उठाए गए मुद्दे

बांग्लादेशी मानवाधिकार कार्यकर्ता रहमान खलीलुर मामून ने कहा कि इस प्रदर्शनी का उद्देश्य जेनेवा में एकत्रित अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के समक्ष इन मुद्दों को उठाना था। मामून ने कहा, "इस फोटो प्रदर्शनी के माध्यम से हमने लगभग 30 पोस्टर प्रदर्शित किए हैं — 15 बांग्लादेश पर और 15 पाकिस्तान पर — जिनमें सैन्य बलों और अधिकारियों द्वारा आम लोगों, अल्पसंख्यकों और गरीब समुदायों के खिलाफ किए जा रहे अत्याचारों को उजागर किया गया है।"

बलूच और सिंधी समुदायों का भी मुद्दा उठाया

उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने चरमपंथी समूहों का समर्थन किया है और बलूच, सिंधी और अन्य समुदायों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, "हम पाकिस्तान के भीतर बलूच लोगों, सिंध के लोगों, जम्मू-कश्मीर के लोगों और अन्य समुदायों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों के खिलाफ भी आवाज उठा रहे हैं।"

1971 की घटनाओं को नहीं भूलने की बात कही

मामून ने 1971 की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा, "हम 1971 में अपने देश में हुए अत्याचारों को नहीं भूले हैं... हम उस नरसंहार को कभी नहीं भूल सकते।" उन्होंने आगे कहा, "हम इस पोस्टर प्रदर्शनी के माध्यम से इन अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। साथ ही, हम बांग्लादेश में जो हो रहा है उसे भी उजागर कर रहे हैं।"

(एएनआई)

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