पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान और अमेरि

'समय बर्बाद करने का युग समाप्त': ग़ालिबफ़ का ऐलान, सात शर्तें पूरी होने तक बंद रहेगा होर्मुज़ जलडमरूमध्य

Ghalibaf Announces: Hormuz to Remain Closed Until Conditions Met

तेहरान [ईरान]: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। इसी बीच ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ ने कहा है कि रणनीतिक होर्मुज़ जलडमरूमध्य तब तक बंद रहेगा, जब तक अमेरिका जून में हुए 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन के आधार पर तय सात शर्तों को पूरा नहीं करता।

अमेरिका के प्रस्तावों पर ईरान का रुख स्पष्ट

ग़ालिबफ़ ने ईरानी संसद में अपने संबोधन के दौरान कहा कि अमेरिका ने हाल ही में एक मध्यस्थ के जरिए कुछ प्रस्ताव भेजे हैं, लेकिन ईरान का रुख स्पष्ट है। उन्होंने कहा, “ईरानी राष्ट्र के प्रतिरोध और दृढ़ता को देखकर अमेरिकी भी हताश हो गए हैं। मीडिया में अलग-अलग बातें कहने वाले अमेरिकियों ने हाल ही में एक मध्यस्थ के माध्यम से कुछ प्रस्ताव रखे हैं।”

एकतरफा मांगें स्वीकार नहीं करेगा ईरान

ग़ालिबफ़ ने कहा कि ईरान वाशिंगटन की एकतरफा मांगों को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को सात शर्तों की पूर्ति से जोड़ते हुए कहा कि अब “समय बर्बाद करने और एकतरफा मांगें थोपने का युग समाप्त हो चुका है।” उन्होंने कहा, “इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन पर आधारित हमारी सात शर्तें पूरी होने तक होर्मुज़ जलडमरूमध्य नहीं खोला जाएगा।”

जून में हुआ था 14 सूत्रीय समझौता

ग़ालिबफ़ की यह टिप्पणी जून में हुए 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन के विफल होने के बाद आई है। इस समझौते का उद्देश्य ईरान और अमेरिका के बीच शत्रुता को समाप्त करना और आगे की बातचीत का रास्ता तैयार करना था। इसमें विशेष रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर बातचीत का प्रावधान था। समझौते के तहत 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए एक रोडमैप तैयार किया गया था। अमेरिका और ईरान ने मध्यस्थता प्रक्रिया की राजनीतिक निगरानी के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाने पर भी सहमति जताई थी।

परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर बातचीत की योजना

समझौते के तहत दोनों देशों के मुख्य वार्ताकारों को नियमित रूप से समिति को रिपोर्ट देनी थी। इसके अलावा परमाणु मुद्दों, प्रतिबंधों और समझौता ज्ञापन के क्रियान्वयन में मदद के लिए निगरानी और विवाद समाधान तंत्र पर केंद्रित कार्य समूह बनाए जाने थे।

जुलाई में टूट गया था समझौता

जुलाई में समझौता ज्ञापन के टूटने के बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष फिर तेज हो गया। अमेरिका ने ईरानी सैन्य और नागरिक ठिकानों पर हमले किए, जबकि ईरान ने जवाबी कार्रवाई में खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया।

(एएनआई)

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