इस्लामाबाद में अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान के बीच त

इस्लामाबाद में शुरू हुई अमेरिका-ईरान-पाकिस्तान की निर्णायक वार्ता

High-Stakes US-Iran-Pakistan Talks Begin in Islamabad

इस्लामाबाद (पाकिस्तान)। इस्लामाबाद में अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान के बीच त्रिपक्षीय संघर्ष-विराम वार्ता शुरू हो गई है। अल जज़ीरा की एक रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से वाशिंगटन और तेहरान के बीच यह अब तक की सबसे उच्च-स्तरीय वार्ता है। अमेरिका के साथ वार्ता से पहले ईरानी वार्ताकार टीम ने पाकिस्तान में एक रणनीतिक बैठक की। उच्च-स्तरीय चर्चाओं में भाग लेने के लिए इस्लामाबाद पहुंचे इस प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिका के साथ शांति वार्ता की औपचारिक शुरुआत से पहले अपने एजेंडे को अंतिम रूप दिया।

इस्लामाबाद बना कूटनीतिक केंद्र

व्हाइट हाउस के एक बयान के मुताबिक इस वार्ता से पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक की थी। वहीं, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर ग़ालिबफ़ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से मुलाकात की। यह वार्ता इस्लामाबाद स्थित सेरेना होटल में हो रही है जो फिलहाल कूटनीतिक गतिविधियों का एक मुख्य केंद्र बन गया है। यहां ईरानी और अमेरिकी, दोनों प्रतिनिधिमंडल वार्ता में भाग लेने के लिए पहुंचे हैं।

जेडी वेंस की मौजूदगी में 'मेक या ब्रेक' वार्ता

जेडी वेंस के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में स्टीव विटकॉफ़ और जेरेड कुशनर शामिल हैं। शहबाज शरीफ ने इससे पहले इस वार्ता को निर्णायक (make or break) बातचीत करार दिया था। कड़ी सुरक्षा के बीच आयोजित इस वार्ता का उद्देश्य एक नाजुक संघर्ष-विराम को स्थिर करना और क्षेत्रीय सुरक्षा के भविष्य की दिशा तय करना है। संघर्ष-विराम की घोषणा 8 अप्रैल को की गई थी।

ईरान की चेतावनी- अमेरिकी रुख तय करेगा समझौते का भविष्य

ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रज़ा आरिफ़ ने इससे पहले संकेत दिया था कि इस वार्ता का परिणाम पूरी तरह से अमेरिकी दृष्टिकोण पर निर्भर करेगा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि यदि ईरानी प्रतिनिधि उन लोगों से मिलते हैं जो अमेरिका फर्स्ट (America First) का प्रतिनिधित्व करते हैं, तो दोनों पक्षों और पूरी दुनिया के लिए फायदेमंद किसी समझौते की संभावना है। हालाँकि, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनका सामना इज़राइल फर्स्ट (Israel First) के प्रतिनिधियों से होता है, तो कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा, "हम निश्चित रूप से अपनी रक्षा पहले से भी अधिक ज़ोर-शोर से जारी रखेंगे, और दुनिया को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।"

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