संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने पाकिस्ता

UNSC में भारत ने PoK मुद्दे पर पाकिस्तान की आलोचना की, अधिकारों के दमन का लगाया आरोप

India Criticises Pakistan at UNSC Over Alleged Rights Violations in PoK

न्यूयॉर्क,(अमेरिका)। भारत ने गुरुवार को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में कश्मीरियों के बुनियादी अधिकारों के निरंतर दमन और मौलिक स्वतंत्रता के हनन की कड़ी निंदा की। ये टिप्पणियां संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश परवथानेनी ने विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के तंत्र को मजबूत करने पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बहस के दौरान कीं।

पाकिस्तानी राज्य का वास्तविक स्वरूप पूरी तरह उजागर

उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर में चल रहे घटनाक्रमों की ओर ध्यान दिलाया और बताया कि कैसे ये घटनाक्रम पाकिस्तानी राज्य के वास्तविक स्वरूप को पूरी तरह उजागर करते हैं। राजदूत हरीश ने कहा, "दुनिया पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में कश्मीरियों के बुनियादी अधिकारों, अभिव्यक्ति और संगठन की स्वतंत्रता के निरंतर दमन और मौलिक स्वतंत्रता के हनन की गवाह है। ये अलग-थलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान द्वारा लगभग आठ दशकों से रची गई एक बड़ी साजिश का हिस्सा हैं।"

यह सिलसिला पाकिस्तान के अन्य क्षेत्रों तक भी फैला

उन्होंने आगे कहा कि यह सिलसिला पाकिस्तान के अन्य क्षेत्रों तक भी फैला हुआ है, जहां दमन का सामना करना पड़ता है। “पूर्व प्रधानमंत्री समेत नेताओं की कैद, मुख्य विपक्षी दल पर चुनावी प्रतिबंध, 27वें संशोधन के जरिए सेना द्वारा संवैधानिक तख्तापलट और इस तरह की अन्य कार्रवाइयों ने लोकतंत्र की हर झलक को मिटा दिया है।” राजदूत हरीश ने आगे कहा, “पाकिस्तान को घरेलू स्तर पर वाहवाही बटोरने और संयुक्त राष्ट्र के व्यापक सदस्य देशों को गुमराह करने के उद्देश्य से धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल करते हुए मनगढ़ंत कहानी गढ़ने के बजाय आत्मनिरीक्षण करना चाहिए और देश के वास्तविक मुद्दों का समाधान करना चाहिए।”

पाकिस्तान के दुस्साहसी प्रयास की कड़ी आलोचना

उन्होंने कहा, “जबकि अन्य देशों में इसी तरह की घटनाओं की संयुक्त राष्ट्र द्वारा कड़ी निंदा की जाती है, पाकिस्तान में इस तरह के दमन और घटनाओं पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता जितना दिया जाना चाहिए।” राजदूत हरीश ने विभाजनकारी एजेंडे के लिए इस प्रतिष्ठित मंच का दुरुपयोग करने के पाकिस्तान के दुस्साहसी प्रयास की कड़ी आलोचना की और दोहराया कि जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश हमेशा से भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग रहा है, है और रहेगा। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “यह संवैधानिक और कानूनी वास्तविकता है जिसे पाकिस्तान जानबूझकर नजरअंदाज करना चुनता है। जम्मू और कश्मीर के संबंध में एकमात्र लंबित मुद्दा पाकिस्तान द्वारा भारत की संप्रभु भूमि पर किया गया खुला आक्रमण और अवैध कब्जा है।” (एएनआई)

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