देश के फार्मा निर्यात में 9.4% की वृद्धि, पहुंचा 30.5 बिलियन डॉलर
US tariffs : अमेरिकी टैरिफ और चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल के बावजूद भारतीय दवाओं की वैश्विक स्तर पर मांग के कारण देश के औषधि निर्यात में वर्ष 2024-25 में निरंतर वृद्धि जारी रही। इस दौरान देश से औषधि निर्यात 9.4 प्रतिशत बढ़कर 30.47 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार बीते वित्तीय वर्ष में अच्छी सफलता के बाद अब फार्मा सेक्टर के लिए 2026-27 तक दोहरे अंकों की निर्यात वृद्धि दर हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो प्रमुख विदेशी बाजारों में मूल्य दबाव और नियामक सख्ती के दौर के बाद नए सिरे से आत्मविश्वास का संकेत है।
वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि बीते वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान देश का फार्मा निर्यात 9.4 प्रतिशत बढ़कर 30.47 अरब डालर रहा है। उद्योग ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 में दोहरे अंक की वृद्धि का लक्ष्य रखा है।
मंत्रालय के अनुसार, इस समय फार्मा क्षेत्र का आकार करीब 60 अरब डालर है और इसमें 2030 तक 130 अरब डालर तक पहुंचने का अनुमान है। 200 देशों को दवाओं के निर्यात के साथ मात्रा के लिहाज से दुनिया में तीसरे स्थान पर है और 60 प्रतिशत से ज्यादा निर्यात कड़े नियामकीय बाजारों के लिए होता है। देश के फार्मास्यूटिकल्स निर्यात में अमेरिका की 34 प्रतिशत और यूरोप की 19 प्रतिशत हिस्सेदारी है। मंत्रालय ने कहा कि फार्मा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए वह लगातार निर्यातकों, नियामकों और विदेश में भारतीय मिशनों के साथ बातचीत जारी रखेगा।
मंत्रालय के डाटा के अनुसार 2024-25 के प्रदर्शन से भारत के फार्मा निर्यातकों के लिए स्थिरता के दौर का संकेत मिलता है। सस्ती जेनेरिक दवाओं की मांग निर्यात की रीढ़ बनी रही, हालांकि कड़ी प्रतिस्पर्धा, विशेष रूप से अमेरिका में, के कारण लाभ मार्जिन कम हो गया था। विकसित बाजारों में नियामक अनुपालन लागत और अनुमोदन में लगने वाला लंबा समय भी लाभप्रदता पर दबाव डालता रहा, जिससे विकास मात्रा के बजाय पैमाने, दक्षता और उत्पाद मिश्रण पर अधिक निर्भर होता जा रहा है।
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