पाकिस्तान में आटा, दाल, खाना पकाने का तेल, दूध और

रमज़ान से पहले कराची में महंगाई का कहर, लोगों का बिगड़ा बजट

Inflation Surge Casts Shadow Over Ramadan in Karachi

कराची (पाकिस्तान)। जैसे-जैसे रमजान पास आ रहा है, कराची के बाज़ारों में निराशा बढ़ रही है, जहाँ लोगों का कहना है कि बिना रोक-टोक वाली महंगाई और कमज़ोर सरकार ने रमजान के महीने को पैसे की तंगी में बदल दिया है।

जरूरी सामान के दाम दोगुने, घरों का बजट चरमराया

जोड़िया बाज़ार में खरीदारों ने बताया कि आटा, दाल, खाना पकाने का तेल, दूध और अंडे जैसी ज़रूरी चीज़ों की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी हुई है। कई लोगों का कहना है कि पिछले साल की तुलना में दाम लगभग दोगुने हो गए हैं, जिससे परिवारों को सामान की मात्रा कम करनी पड़ रही है और रोज़मर्रा की ज़रूरतों में कटौती करनी पड़ रही है। एक निवासी ने कहा कि, "जहाँ पहले हम 10 किलो खरीदते थे, अब मजबूरन पाँच किलो लेना पड़ रहा है।" इससे घर के बजट पर पड़ रहे दबाव का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

सरकार पर मूल्य नियंत्रण में नाकामी के आरोप

लोगों का कहना है कि चीजों की सबसे अधिक मांग होती है तब सरकार कीमतों को नियंत्रित करने या ज़्यादा मुनाफाखोरी रोकने में नाकाम रहती है। कई लोगों ने आरोप लगाया कि रमज़ान में दुकानदार लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर दाम बढ़ा देते हैं, क्योंकि लोगों को ज़रूरी सामान खरीदना ही होता है। उनका कहना है कि कीमतों को स्थिर रखना राज्य की ज़िम्मेदारी है, खासकर उस देश में जो अपने संविधान में खुद को एक कल्याणकारी राज्य बताता है।

मध्यम और निम्न आय वर्ग पर बढ़ा बोझ

अधिवक्ता गुलक़दम मलिक ने कहा कि 25,000 से 30,000 रुपये महीना कमाने वाले मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए गुज़ारा करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा, "वे पहले ही किराया, बिजली बिल, पेट्रोल और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा रहे हैं। रमज़ान ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ती कीमतों के कारण कई घरों में खाने की मात्रा कम कर दी गई है।

बेरोज़गारी और औद्योगिक मंदी ने बढ़ाई परेशानी

स्थानीय लोगों ने महंगाई को बढ़ती बेरोज़गारी और औद्योगिक मंदी से भी जोड़ा। उनका कहना है कि कपड़ा, रसायन और ऑटो क्षेत्रों में फैक्ट्रियों के बंद होने से कई परिवार प्रभावित हुए हैं। लोगों के अनुसार, यह दबाव सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि मानसिक भी है, और समुदायों में बढ़ता तनाव साफ दिखाई दे रहा है। कई नागरिकों ने पाकिस्तान की तुलना उन देशों से की जहाँ त्योहारों के दौरान सरकारें राहत पैकेज देती हैं या सामान पर सब्सिडी देती हैं। इसके विपरीत, उनका आरोप है कि पाकिस्तान में त्योहारों के समय अक्सर कीमतें और बढ़ जाती हैं।

राहत की मांग के बीच भी कायम है आस्था

मुश्किल हालात के बावजूद, लोगों ने रमज़ान मनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही, उन्होंने प्रशासन से सख्त मूल्य नियंत्रण और ठोस राहत उपाय लागू करने की मांग की। उनका कहना है कि अगर तुरंत कदम नहीं उठाए गए तो महंगाई जनता का भरोसा और कम कर देगी और आर्थिक संकट को और गहरा कर देगी।

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