ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने मक्का संयुक्त रक्षा

मुस्लिम देशों की एकजुटता पर अराघची का जोर, 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' का किया स्वागत

Iranian Foreign Minister Seyed Abbas Araghchi

तेहरान (ईरान)। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शुक्रवार को इस्लामी देशों से क्षेत्रीय एकजुटता को मजबूत करने और विदेशी ताकतों के बजाय अपनी आंतरिक क्षमताओं पर भरोसा करने का आह्वान किया। उन्होंने ईरान की सेना द्वारा अमेरिका के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन को एक साहसिक कदम बताया।

अमेरिकी सेना के सामने शक्ति प्रदर्शन की सराहना

अराघची ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में ईरान की सैन्य शक्ति के प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए पड़ोसी और मुस्लिम बहुल देशों से बाहरी खतरों का सामना करने के लिए एकता की वकालत की। अराघची ने अमेरिकी सशस्त्र बलों का जिक्र करते हुए लिखा, "ईरान की शक्तिशाली सशस्त्र सेनाओं ने दुनिया की सबसे महंगी सेना के सामने अपनी तैयारी, क्षमता और शक्ति का प्रदर्शन किया है।" उन्होंने अमेरिकी सशस्त्र बलों का जिक्र करते हुए कहा, "जब मुसलमान एकजुट होते हैं, तो हम दुर्भावनापूर्ण बाहरी ताकतों की हर चुनौती का डटकर सामना कर सकते हैं। अब समय आ गया है कि हम केवल खुद पर भरोसा करें और सच्चे भाईचारे को अपनाएं।"

मक्का में हुआ अहम रक्षा समझौता

पश्चिमी एशिया में बढ़ते संघर्ष के मद्देनजर मक्का में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान द्वारा त्रिपक्षीय संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद विदेश मंत्री ने ये टिप्पणियां कीं। "मक्का संयुक्त रक्षा समझौता" नामक इस समझौते का उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा खतरों के बीच तीनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को मजबूत करना है।

<blockquote lang="en" dir="ltr">Iran&#39;s Powerful Armed Forces have shown their readiness, capability, and might in face of the world&#39;s most expensive military.<br><br>When Muslims stand together, we can face every challenge by malicious outsiders head-on.<br><br>Time to rely only on ourselves and embrace true brotherhood.</p>&mdash; Seyed Abbas Araghchi (@araghchi) <a href="https://x.com/araghchi/status/2085791206542320058?ref_src=twsrc%5Etfw">August 7, 2026</a></blockquote> <script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>

समझौते का मुख्य उद्देश्य और सामूहिक सुरक्षा

शिखर सम्मेलन के बयान में कहा गया, "इस समझौते का उद्देश्य किसी भी आक्रामक कार्रवाई के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध को मजबूत करना है, और इसमें यह प्रावधान है कि तीनों देशों में से किसी एक पर भी सशस्त्र हमले को उन सभी पर हमला माना जाएगा। साथ ही, इसमें तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के सभी पहलुओं को बढ़ाने का भी प्रावधान है।" यह समझौता सऊदी अरब में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बीच हुई बैठक के दौरान संपन्न हुआ।

सुरक्षा साझेदारियों का विस्तार और क्षेत्रीय तनाव

सुरक्षा के लिहाज से यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब सऊदी अरब, ईरान में चल रहे संघर्ष के बीच कई हमलों का सामना करने के बाद, अपनी सुरक्षा साझेदारियों का विस्तार करने की कोशिश कर रहा था। ईरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों (जिनमें हूथी और इराकी मिलिशिया समूह शामिल हैं) द्वारा किए गए लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों में किंगडम के प्रमुख बुनियादी ढांचे और पेट्रोलियम संपत्तियों को निशाना बनाया गया था। इसके अलावा, यह समझौता गाजा और व्यापक क्षेत्रीय तनाव (जिसमें ईरान और लेबनान में संघर्ष शामिल हैं) को लेकर तुर्की और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के समय हुआ है।

ट्रंप ने संघर्ष जल्द खत्म होने की जताई उम्मीद

यह घटनाक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गुरुवार को यह भरोसा जताने के बाद हुआ है कि ईरान से जुड़ा संघर्ष "बहुत जल्द" खत्म हो जाएगा; उन्होंने कहा कि उनका मानना ​​है कि इस्लामिक गणराज्य "बहुत लंबे समय तक नहीं चल पाएगा"। उन्होंने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जुड़ी बातचीत को लेकर उम्मीद जताई और साथ ही ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के अपने संकल्प को दोहराया।

होर्मुज पर दुनिया की नजर

यह घटनाक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा गुरुवार को ईरान से जुड़े संघर्ष के बहुत जल्द समाप्त होने का विश्वास व्यक्त करने के बाद हुआ है। इसमें उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि इस्लामी गणराज्य "बहुत लंबे समय तक नहीं टिक सकता।" उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य से संबंधित चल रही वार्ताओं पर भी आशा व्यक्त की, साथ ही ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के अपने संकल्प को दोहराया। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी बातचीत को लेकर भी उम्मीद जताई। यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से तेल की ढुलाई होती है। ​(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)

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