IRGC ने दावा किया कि उसने कुवैत के अली अल सलेम अमे

कुवैत में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमले का दावा, IRGC बोला- ड्रोन हैंगर और ईंधन डिपो नष्ट किए

IRGC Claims Fuel Depot, Hangar Destroyed

तेहरान: ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने दावा किया है कि उसने कुवैत स्थित अमेरिकी नियंत्रण वाले अली अल सलेम हवाई अड्डे पर हमला कर दो ड्रोन हैंगर और सैन्य विमानों व हेलीकॉप्टरों के लिए बने ईंधन भंडारण केंद्र को नष्ट कर दिया है।

IRGC ने जारी किया बयान

ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, IRGC ने शुक्रवार को कुवैत के नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा कि तेहरान की सैन्य कार्रवाई तब तक जारी रहेगी, जब तक क्षेत्र से अमेरिकी सेनाओं को पूरी तरह बाहर नहीं कर दिया जाता। ईरान के इन दावों को अमेरिकी सेना ने खारिज कर दिया है। अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) ने कहा कि हालिया ईरानी हमलों में कोई भी अमेरिकी विमान नष्ट या क्षतिग्रस्त नहीं हुआ है। CENTCOM ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि सभी मिसाइलों और ड्रोन को या तो रोक दिया गया या वे अपने लक्ष्य तक पहुंचने में नाकाम रहे।

अल-अजराक एयरबेस हमले पर भी विवाद

इससे पहले IRGC ने दावा किया था कि उसने जॉर्डन के अल-अजराक एयरबेस पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया, जहां अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमान तैनात हैं। ईरान ने तीन F-35 विमानों के नष्ट होने और अन्य विमानों को नुकसान पहुंचने का दावा किया था। हालांकि, अमेरिकी सेना ने इन दावों को भी खारिज करते हुए कहा कि उसके किसी भी विमान को नुकसान नहीं पहुंचा है और अमेरिकी सेनाएं पूरे क्षेत्र में पूरी तरह सक्रिय हैं।

ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ा

दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच ये विरोधाभासी दावे सामने आए हैं। ईरान ने क़ेशम द्वीप पर अमेरिकी हमले के जवाब में कार्रवाई करने की बात कही है, जिसमें कथित तौर पर एक परिवार के लोगों की मौत हुई थी। IRGC ने अमेरिका पर आरोप लगाते हुए कहा कि क्षेत्र में संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक अमेरिकी सेनाएं वहां से बाहर नहीं हो जातीं।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी असर

संघर्ष के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। IRGC ने दावा किया कि अमेरिकी समर्थन से जलडमरूमध्य पार करने की कोशिश कर रहे तेल टैंकरों को वापस लौटना पड़ा।

क्षेत्रीय तनाव कई देशों तक फैला

इस संघर्ष का असर जॉर्डन, कुवैत और मिस्र जैसे देशों तक भी पहुंच गया है। जॉर्डन ने ईरानी मिसाइलों को रोकने का दावा किया है, जबकि मिस्र ने एक गैस आयात केंद्र पर ड्रोन हमले के बाद जांच शुरू कर दी है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे के दावों का खंडन कर रहे हैं।

(एएनआई)

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