अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मौजूदगी में

शांति की ओर ऐतिहासिक कदम: अमेरिका की मध्यस्थता से इज़रायल और लेबनान ने ढांचागत समझौते पर किए हस्ताक्षर

समझौते के दौरान मार्को रुबियो, अमेरिका में इजरायल के राजदूत येचिएल लीटर और लेबनान के राजदूत नाडा हमादेह

वॉशिंगटन डीसी: मध्य पूर्व में दशकों से चले आ रहे तनाव को कम करने की दिशा में एक बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शुक्रवार (स्थानीय समय) को इज़राइल और लेबनान के बीच अमेरिका की मध्यस्थता से हुए एक ऐतिहासिक ढांचागत समझौते (Framework Agreement) की घोषणा की है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में "स्थायी शांति और सुरक्षा" बहाल करना है। 

हिज़्बुल्लाह को तुरंत गोलीबारी बंद करने की कड़ी शर्त

इस महत्वपूर्ण समझौते में युद्धविराम का प्रावधान शामिल है, लेकिन इसके लिए एक सख्त शर्त रखी गई है कि हिज़्बुल्लाह को सभी प्रकार की गोलीबारी तुरंत बंद करनी होगी और दक्षिणी लेबनान के क्षेत्र से पूरी तरह पीछे हटना होगा।

"यह यात्रा का पहला और सबसे कठिन कदम" - मार्को रुबियो

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर विदेश विभाग ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के हवाले से इस समझौते की पुष्टि की। रुबियो ने इस मील का पत्थर हासिल करने के लिए सभी पक्षों की सराहना करते हुए कहा, "जाहिर है, इज़राइल के लोगों को शांति और सुरक्षा में रहने का पूरा अधिकार है। विशेष रूप से उत्तरी इज़राइल के निवासियों को, जिन पर लेबनान की धरती से बार-बार आतंकवादी हमले किए गए हैं। ये हमले लेबनानी सरकार या वहां के लोगों द्वारा नहीं, बल्कि एक बाहरी ताकत (ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह) द्वारा किए गए हैं, जिसने उस क्षेत्र का इस्तेमाल निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाने के लिए किया।"

सम्मानित महसूस कर रहा अमेरिका- अमेरिकी विदेश मंत्री

उन्होंने आगे कहा कि आगे का रास्ता कठिन है, क्योंकि जब भी सायरन बजता है, बच्चों को पढ़ाई और बड़ों को काम रोककर बंकरों में भागना पड़ता है। यह समझौता 'शुरुआत की शुरुआत' है और अमेरिका इसे साकार करने में अपनी भूमिका पाकर सम्मानित महसूस कर रहा है।

लेबनान ने जताया अमेरिकी नेतृत्व का आभार

अमेरिका में लेबनान की राजदूत नाडा हमादेह ने इस लंबी और जटिल वार्ता की मेजबानी के लिए अमेरिकी नेतृत्व का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति औन के नेतृत्व, प्रधानमंत्री सलाम की दृढ़ता, राजदूत करम के धैर्य और लेबनानी सशस्त्र बलों की देशभक्ति के कारण ही आज दोनों देश इस समझौते तक पहुंच पाए हैं।

'शक्ति के बल पर शांति' का दृष्टिकोण हुआ सफल

अमेरिका में इज़रायल के राजदूत येचिएल लीटर ने इस प्रक्रिया को ऐतिहासिक बताते हुए अमेरिकी टीम और स्टेट डिपार्टमेंट के काउंसलर डेनियल हॉलर (डैन) की अथक मेहनत की तारीफ की। उन्होंने कहा, "हमने राष्ट्रपति ट्रम्प के 'शक्ति के बल पर शांति' (Peace through Strength) स्थापित करने के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाया है। चार दिन पहले यह व्यवस्था पटरी से उतर रही थी, क्योंकि ईरान और उसके सहयोगी इसे बिगाड़ना चाहते थे, लेकिन अमेरिकी टीम ने इसे वापस पटरी पर ला दिया।"

अमेरिका में इजरायल के राजदूत ने जान गंवाने वालों को किया याद

राजदूत लीटर ने उत्तरी गैलील के निवासियों के दृढ़ संकल्प और इज़रायल रक्षा बलों (IDF) के उन वीर पुरुषों और महिलाओं के बलिदान को भी याद किया, जिन्होंने ईरान और उसके सहयोगियों के खिलाफ लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति दी।

इजरायल-लेबनान के बीच समझौता ईरान के लिए झटका: नेतन्याहू

इजराइयल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिका, इजराइयल और लेबनान के बीच हुआ यह शुरुआती (फ्रेमवर्क) समझौता ईरान के लिए एक बड़ा झटका है। उन्होंने एक टेलीविजन संबोधन में कहा कि यह समझौता ईरान के प्रभाव को कमजोर करता है। इजराइयली सेना की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए उनके बयान के अनुसार, नेतन्याहू ने यह भी कहा कि जब तक लेबनान हिज्बुल्लाह को निःशस्त्र नहीं करता, तब तक इजराइयल की सेना दक्षिणी लेबनान में बनी रहेगी।

आतंकवाद के साए से मुक्ति की उम्मीद

अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि इज़राइल और लेबनान दोनों ही प्राचीन सभ्यताओं के उत्तराधिकारी हैं, जिनकी जड़ें बाइबिल काल तक जाती हैं। दोनों देशों के पास बेहद उद्यमी लोग और खूबसूरत समुद्र तट हैं, लेकिन दशकों से आतंकवादी मिलिशिया और उनके आकाओं ने लेबनान की संप्रभुता को कमजोर किया और पूरे मध्य पूर्व में अराजकता फैलाई। यह समझौता इस अशांति को समाप्त करने की दिशा में एक उम्मीद की नई किरण है।