इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग ने विपक्षी नेता

इजरायल में बेंजामिन नेतन्याहू को बड़ा झटका, राष्ट्रपति हर्ज़ोग ने गादी आइसेनकोट को दिया सरकार बनाने का न्योता

Gadi Eisenkot (File Photo)

यरूशलेम (इजरायल)। इजरायल की राजनीति में एक बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला है। राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग ने शनिवार को पूर्व सैन्य प्रमुख और यशार पार्टी के अध्यक्ष गादी आइसेनकोट को देश की अगली सरकार के गठन की औपचारिक जिम्मेदारी सौंप दी है।

बहस और परामर्श के आंकड़े

राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग और 120 सीटों वाली नेसेट के सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के बीच गहन विचार-विमर्श के बाद यह कदम उठाया गया है। राष्ट्रपति कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक आधिकारिक बयान जारी कर इस बात की पुष्टि की है कि आइसेनकोट को संसद में भारी समर्थन मिला है। परामर्श के दौरान नेसेट के 67 सदस्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले गुटों ने आइसेनकोट के नाम की सिफारिश की, जो सरकार गठन के लिए जरूरी 61 सीटों के जादुई आंकड़े से काफी अधिक है।

शपथ ग्रहण और जनादेश समारोह

राष्ट्रपति भवन में आज रविवार शाम पांच बजे जनादेश-कॉन्फरल समारोह आयोजित किया जाएगा। इसके तहत गादी आइसेनकोट को छह सप्ताह का वैधानिक समय मिलेगा जिसके भीतर वे संभावित सहयोगियों से बातचीत कर बहुमत साबित करेंगे और प्रधानमंत्री कार्यालय से नेतन्याहू को विदा करने की प्रक्रिया पूरी करेंगे। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक यह घटनाक्रम पिछले महीने हुए चुनावों के बाद सामने आया है।

विपक्षी एकता और नेतन्याहू का झटका

आइसेनकोट को मिले 67 समर्थन वोटों में यहूदी-नेतृत्व वाला विपक्षी गुट (यशार, टूगेदर, द डेमोक्रेट्स और यिसराएल बेतेनु) की 48 सीटें, रा'म पार्टी की 8 सीटें और जॉइंट लिस्ट की 11 सीटें शामिल हैं। वहीं दूसरी ओर बेंजामिन नेतन्याहू को केवल 46 सीटों का समर्थन मिल पाया है। अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यूनाइटेड टोरा जुडाइज्म पार्टी द्वारा तटस्थ रहने और समर्थन न करने के फैसले के कारण नेतन्याहू का गठबंधन कमजोर हो गया है।

संकटकाल में चार सूत्रीय रूपरेखा

नेतन्याहू के कार्यवाहक नेतृत्व का विरोध करते हुए आइसेनकोट ने आपातकालीन प्रशासन के लिए चार प्रमुख आधार तय किए हैं। इनमें इजरायल को यहूदी और लोकतांत्रिक राज्य के रूप में मान्यता देना, स्वतंत्रता की घोषणा का सम्मान करना, अनिवार्य राष्ट्रीय व सैन्य सेवा लागू करना और हमास के सैन्य व राजनीतिक विंग का पूरी तरह सफाया करना शामिल है। (इनपुट: ANI)

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