'ग्लोबल साउथ' 4F संकट की चपेट में, AI पर एकाधिकार खतरनाक: विदेश मंत्री एस. जयशंकर
नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) के सामने खड़े ईंधन, भोजन, वित्त और उर्वरक के '4F संकट' पर गहरी चिंता व्यक्त की है। नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ कहा कि इन वैश्विक समस्याओं के समाधान में विकसित देशों (ग्लोबल नॉर्थ) को भी अपनी बराबर की जिम्मेदारी समझनी होगी।
4F संकट और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का जोखिम
संयुक्त राष्ट्र दिवस के मौके पर 'विश्व समझ के लिए अद्वैत' विषय पर आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन में विदेश मंत्री ने वैश्विक व्यवस्था पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि व्यापारिक पाबंदियों और सप्लाई चेन की रुकावटों से बाजार बिगड़ रहा है, जिसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है।
जयशंकर ने जोर देकर कहा, "आज 'ग्लोबल साउथ' वित्त, ईंधन, भोजन और उर्वरक के 4F संकट से जूझ रहा है। 'ग्लोबल नॉर्थ' को यह अहसास होना चाहिए कि इसका हल निकालने में उसकी भी उतनी ही जवाबदेही है। अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को जोखिम से उबारना और देशों को व्यापार के ज्यादा विकल्प देना अब बेहद जरूरी हो चुका है।"
AI क्रांति: किसी एक का एकाधिकार मंजूर नहीं
विदेश मंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते असर पर भी दुनिया को आगाह किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मानव इतिहास को बदलने वाली इतनी शक्तिशाली तकनीक की कमान सिर्फ चुनिंदा कंपनियों या देशों के हाथों में नहीं सौंपी जा सकती।
जयशंकर ने कहा, "प्रगति का सीधा नाता तकनीक से है और आज दुनिया एक अहम मोड़ पर खड़ी है। AI हर बड़े बदलाव की धुरी बनने जा रहा है। ऐसे में इतने व्यापक परिणामों वाली तकनीक पर कुछ ही लोगों का एकाधिकार होना, पिछले 80 वर्षों में दुनिया भर में मजबूत हुई आजादी और लोकतंत्र की सोच के खिलाफ होगा।"
जिम्मेदार और मानव-केंद्रित AI का भारत ने किया समर्थन
AI के वैश्विक नियम-कायदों (गवर्नेंस) पर भारत का रुख दोहराते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि यह तकनीक हर किसी के जीवन को प्रभावित करती है। इसलिए इसका दायरा समावेशी होना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि भारत हमेशा से ही एक जिम्मेदार, समावेशी और मानव-केंद्रित AI दृष्टिकोण की वकालत करता रहा है। तकनीक का लाभ पूरी मानवता तक पहुंचे, इसके लिए दुनिया को अपनी सोच का दायरा और बढ़ाना होगा। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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