केट मिडलटन ने 24 घंटे में ब्रिटेन की तीन सबसे ऊंची

कैंसर से उबरने के बाद केट मिडलटन ने 24 घंटे में पूरी की नेशनल थ्री पीक्स चैलेंज

केट मिडलटन

लॉस एंजिल्स,(अमेरिका)। कैंसर से उबरने के बाद ब्रिटेन की राजकुमारी केट मिडलटन ने लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से ब्रिटेन की प्रतिष्ठित नेशनल थ्री पीक्स चैलेंज सफलतापूर्वक पूरी की। पीपल पत्रिका के अनुसार, उन्होंने स्कॉटलैंड के बेन नेविस, इंग्लैंड के स्कैफेल पाइक और वेल्स के स्नोडन—तीनों सबसे ऊंचे पर्वतों पर केवल 24 घंटे के भीतर चढ़ाई पूरी की। करीब 23 मील लंबे इस कठिन ट्रेक में 10,000 फीट से अधिक की ऊंचाई तय करनी होती है।

केट ने तीनों पर्वतों की चढ़ाई अकेले की पूरी

स्नोडन पर अपनी अंतिम चढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद, केट का स्वागत प्रिंस विलियम, उनके तीन बच्चों - प्रिंस जॉर्ज, प्रिंसेस शार्लोट और प्रिंस लुई, उनके माता-पिता कैरोल और माइकल मिडलटन और उनके भाई जेम्स मिडलटन ने किया। महल ने भी इसकी पुष्टि की है। केट ने तीनों पर्वतों की चढ़ाई अकेले पूरी की, हालांकि पूरे अभियान के दौरान माउंटेन रेस्क्यू टीमों ने उनकी सुरक्षा और सहयोग सुनिश्चित किया।

बेन नेविस की चोटी से तस्वीर सोशल मीडिया पर की साझा

रविवार को उन्होंने बेन नेविस की चोटी से अपनी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करते हुए बताया कि कैंसर से उबरने के बाद उन्होंने यह चुनौती क्यों स्वीकार की। उन्होंने लिखा कि हर साल लाखों लोग कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का सामना करते हैं और यह अनुभव व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है। इसका असर केवल मरीज तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार, दोस्तों, कामकाज और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ता है।

इलाज केवल दवाइयों तक सीमित नहीं, इसके लिए मानसिक और भावनात्मक मजबूती भी जरूरत

केट ने कहा कि कैंसर सिर्फ शरीर को प्रभावित नहीं करता, बल्कि यह इंसान के सोचने, महसूस करने और जीवन को देखने के नजरिए को भी बदल देता है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, कि इलाज की यात्रा केवल दवाइयों तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसके लिए मानसिक और भावनात्मक मजबूती की भी जरूरत होती है।

 जनवरी 2025 में कैंसर-मुक्त घोषित हुई केट

पिछले वर्ष अपने कैंसर के बारे में सार्वजनिक रूप से जानकारी देने वाली केट मिडलटन ने जनवरी 2025 में खुद को कैंसर-मुक्त घोषित किया था। उन्होंने कहा कि यह चुनौती केवल तीन पर्वतों की चोटियों तक पहुंचने की नहीं थी, बल्कि यह कैंसर से जूझ रहे लोगों में उम्मीद, साहस और जीवन के प्रति सकारात्मक सोच का संदेश देने का प्रयास भी है। (एएनआई)

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