पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में लगातार आ रही पर्य

खैबर पख्तूनख्वा में जंगल की आग और डूबने के हादसे, पाकिस्तान की आपदा प्रबंधन की खुली पोल

KP Wildfires Expose Pakistan’s Crumbling Disaster Response

पेशावर (पाकिस्तान)। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में लगातार आ रही पर्यावरणीय आपदाओं और डूबने की घटनाओं ने वहां की प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल दी है। इन हादसों ने साफ कर दिया है कि यह अशांत उत्तर-पश्चिमी प्रांत न तो आपदाओं से निपटने के लिए तैयार है और न ही इसके पास कोई मजबूत आपातकालीन बुनियादी ढांचा है।

कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर और खराब शासन बना बड़ी चुनौती

डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक लोअर दीर ​​के पहाड़ी बार चराई तलाश इलाके में तेजी से फैल रही जंगल की आग को काबू करने का प्रयास लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। रिपोर्ट में बताया गया कि तेज हवाओं, भीषण गर्मी और दुर्गम इलाके ने बचाव कार्यों में बाधा डाली, जबकि उचित सड़कों के अभाव में आग बुझाने वाले वाहन प्रभावित इलाकों तक नहीं पहुंच पाए। बचाव कर्मियों, वन अधिकारियों, नागरिक सुरक्षा कर्मियों और स्वयंसेवकों को खतरनाक पहाड़ी रास्तों से पैदल चलकर पारंपरिक तरीकों से आग बुझानी पड़ी, जिससे पाकिस्तान के दूरदराज के इलाकों में आधुनिक आपदा प्रतिक्रिया क्षमताओं की कमी साफ झलकती है।

पर्यावरणीय कुप्रबंधन से बढ़ता जा रहा आपदाओं का खतरा

इस स्थिति ने एक बार फिर यह उजागर कर दिया है कि वर्षों की उपेक्षा, कमजोर बुनियादी ढांचे और खराब शासन ने कमजोर समुदायों को जलवायु से जुड़ी बार-बार आने वाली आपदाओं के सामने कितना असुरक्षित बना दिया है। यह संकट पाकिस्तान के व्यापक पर्यावरणीय कुप्रबंधन को भी दर्शाता है। हाल के वर्षों में, वनों की कटाई, अनियंत्रित निर्माण और वन सुरक्षा की अपर्याप्त नीतियों ने खैबर पख्तूनख्वा और पाकिस्तान के कब्जे वाले पहाड़ी क्षेत्रों में जंगल की आग का खतरा और बढ़ा दिया है। पर्यावरण विशेषज्ञों की बार-बार की चेतावनियों के बावजूद अधिकारी प्रभावी रोकथाम तंत्र या आपातकालीन पहुंच प्रणाली स्थापित करने में विफल रहे हैं। (ANI)

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