रूसी विदेशमंत्री सर्गेई लावरोव ने पश्चिमी एशिया सं

बीजिंग में शी जिन्पिंग से मिले रूसी विदेशमंत्री सर्गेई लावरोव, की पश्चिमी देशों की आलोचना

Lavrov Meets Xi in Beijing, Criticizes Western Nations on Iran Issue

बीजिंग (चीन)। रूस के विदेशमंत्री सर्गेई लावरोव ने पश्चिमी एशिया संकट के बीच बुधवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिन्पिंग से वार्ता की। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिमी ताकतों ने अंतरराष्ट्रीय स्थिति को बिगाड़ा है। लावरोव ने कहा कि उनकी चीन के विदेशमंत्री वांग ई से भी वार्ता हुई।

अंतरराष्ट्रीय और द्विपक्षीय मुद्दों पर हुई गहन चर्चा

लावरोव ने कहा कि इस बातचीत में विभिन्न मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। इनमें ज्यादातर द्विपक्षीय मुद्दे शामिल थे। सबसे पहले जो होना चाहिए, अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बात हुई, खासकर जब से पश्चिमी साथियों की कार्रवाई से स्थिति बिगड़ी। इस सिलसिले में उन्होंने यूक्रेन, लैटिन अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य की समस्याओं का उल्लेख किया।

गाजा-फिलिस्तीन से ध्यान न हटाने की अपील

रूसी विदेशमंत्री ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र का संकट कोई छोटी बात नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी उलझी हुई गांठ है जिसे खोलना बहुत मुश्किल होगा। इस संकट को जबरदस्ती खत्म करने की कोशिशें कामयाब नहीं होंगी। लावरोव ने जोर देकर कहा कि दुनिया का ध्यान गाजा, फिलिस्तीन और पश्चिमी किनारे से नहीं हटना चाहिए। उनके मुताबिक, इन मुद्दों को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर रूस और चीन की सोच एक जैसी है। दोनों देश मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि इन क्षेत्रों की समस्याओं को हाशिए पर न धकेला जाए।

पश्चिमी देशों की नीतियों पर कड़ा प्रहार

रूसी विदेश मंत्री ने अमेरिका और यूरोप की जमकर आलोचना की। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देश आज भी अपनी पुरानी सोच के साथ दुनिया पर राज करना चाहते हैं। लावरोव के अनुसार, पिछले 500 सालों से दुनिया को अपने हिसाब से चलाने वाले ये देश अब भी नए तरीकों से दूसरों का फायदा उठाकर खुद आगे बढ़ना चाहते हैं। उन्होंने इसे आधुनिक गुलामी जैसा बताते हुए कहा कि रूस, चीन और दुनिया के ज्यादातर देश पश्चिमी देशों की इस मनमानी को स्वीकार नहीं करेंगे।

नाटो और यूरोप में बढ़ते तनाव पर रूस की चिंता

बैठक के दौरान लावरोव ने बताया कि नाटो की वजह से यूरोप में तनाव के नए केंद्र बन रहे हैं। उन्होंने यूक्रेन को नाटो में शामिल करने की कोशिशों और यूरोपीय संघ के सैन्यीकरण पर भी सवाल उठाए। लावरोव के मुताबिक, वाशिंगटन और यूरोपीय देशों के बीच आपसी मतभेद बढ़ रहे हैं।

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