मशहूर भारतीय-अमेरिकी वकील नील कात्याल ने कहा है कि

ट्रंप के नए वैश्विक टैरिफ पर क़ानूनी विवाद, नील कात्याल ने उठाए सवाल

फाइल फोटो

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से लगाए गए नए वैश्विक टैरिफ (आयात शुल्क) पर मशहूर भारतीय-अमेरिकी वकील नील कात्याल ने कहा है कि अगर राष्ट्रपति को इतने बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाना है तो उन्हें संविधान के अनुसार कांग्रेस से मंजूरी लेनी चाहिए, न कि सिर्फ अपने अधिकारों का इस्तेमाल करके ऐसा कदम उठाना चाहिए।

व्यापार घाटा और भुगतान संतुलन घाटा दोनों अलग चीजें

कात्याल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि ट्रंप जिस कानून, ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122, का सहारा लेकर 15 प्रतिशत तक का वैश्विक टैरिफ लगा रहे हैं, वह कानूनी तौर पर कमजोर आधार है। उन्होंने बताया कि पहले इसी मामले में अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि यह धारा यहां लागू ही नहीं होती, क्योंकि व्यापार घाटा और भुगतान संतुलन घाटा दोनों अलग चीजें हैं। अब सरकार उसी धारा का इस्तेमाल कर रही है, जो खुद उसकी पहले की दलील से टकराता है।

पुराने आदेश के रद्द होते ही ट्रंप प्रशासन ने बदला रास्ता

यह विवाद ऐसे समय में खड़ा हुआ है जब हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पुराने व्यापक टैरिफ को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने साफ कहा था कि टैक्स लगाने का अधिकार मुख्य रूप से कांग्रेस के पास होता है और राष्ट्रपति ने आईईईपीए कानून का गलत इस्तेमाल किया था। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने तुरंत नया रास्ता अपनाते हुए पहले 10 प्रतिशत का वैश्विक टैरिफ लगाया, जिसे बाद में बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया। ट्रंप ने इसे 'अस्थायी आयात शुल्क' बताया और कहा कि यह अमेरिका के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी है।

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